अहमदाबाद। डाक टिकट वास्तव में एक नन्हा राजदूत है, जो विभिन्न देशों का भ्रमण करता है एवम् उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत से अवगत कराता है। हर डाक टिकट के पीछे एक कहानी छुपी हुई है और इस कहानी से आज की जेन-जेड और जेन-एल्फा युवा पीढ़ी को जोड़ने की जरूरत है। उक्त उद्गार उत्तर गुजरात परिक्षेत्र के पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने गुजरात में पाटन जनपद में आयोजित प्रथम दो दिवसीय जिला स्तरीय डाक टिकट प्रदर्शनी 'पाटनपेक्स-2026' का गोकुल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सिद्धपुर के दीक्षांत सभागार में 5 अक्टूबर, 2026 को उद्घाटन करते हुए व्यक्त किये। इससे पहले बतौर मुख्य अतिथि पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव और सिद्धपुर विधायक श्री बलवंतसिंह सी. राजपूत ने फीता काटकर व दीप प्रज्वलन कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में देश-दुनिया में जारी तमाम डाक टिकटों और फिलेटलिक आइटम्स के कुल 86 फ्रेम लगाए गए हैं। इस अवसर पर डाक विभाग द्वारा पाटन की विरासत एवं गांधी आश्रम, झीलिया पर विशेष आवरण व विशेष विरूपण भी जारी किए गए।

पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि 'पाटनपेक्स' डाक टिकट प्रदर्शनी का प्रमुख उद्देश्य युवाओं में फिलेटली के प्रति रुचि उत्पन्न करना और उन्हें इसके शैक्षणिक व सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराना है। पाटन एक लंबे समय तक गुजरात की राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र रहा। ऐसे में ‘पाटन की विरासत’ पर आज जारी विशेष डाक आवरण में रानी की वाव, रुद्र महालय, बिंदु सरोवर, सहस्रलिंग तालाब और पाटन पटोला को एक साथ दर्शाया गया है। जिससे पाटन की यह गौरवशाली धरोहरें देश-विदेश तक पहुँच सकें। 

पाटन स्थित ‘रानी की वाव’ और ‘पाटन पटोला’ पर भारत सरकार द्वारा वर्ष 2017  और 2002 में डाक टिकट जारी किया जा चुका है। श्री यादव ने कहा कि, फिलेटली का शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने में अहम योगदान है। डाक टिकटों के माध्यम से जेन-जेड व जेन-एल्फा पीढ़ी भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक घटनाओं, स्वतंत्रता संग्राम के ज्ञात-अज्ञात नायकों, महान व्यक्तित्वों, साहित्य, कला व स्थापत्य, विज्ञान प्रौद्योगिकी, आई.टी., जैव विविधता, स्पोर्ट्स, अंतरिक्ष से लेकर तमाम समसामयिक विषयों, घटनाओं आदि से रूबरू हो सकेगी। यह युवा पीढ़ी को मोबाइल व सोशल मीडिया की लत से परे फिलेटली जैसी रचनात्मक हॉबी से जुड़ने में योगदान देगी। फिलेटली को 'किंग आफ हॉबी व हॉबी आफ किंग' के रूप में जाना जाता है।

सिद्धपुर विधायक श्री बलवंतसिंह सी. राजपूत ने कहा कि, यह प्रदर्शनी डाक टिकटों के माध्यम से भारत की विविधता और गौरवशाली अतीत को समझने का अवसर प्रदान करती है। फिलेटली इतिहास और वर्तमान के बीच एक सुंदर सेतु का कार्य करती है। देश और प्रदेश के समृद्ध व गौरवशाली इतिहास से परिचय करने में डाक टिकटों का अहम स्थान है। उन्होंने पाटन जनपद में पहली बार डाक टिकट प्रदर्शनी करने और युवाओं के बीच फिलेटली को बढ़ावा देने के लिए डाक विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।

गोकुल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. अरविंदकुमार चौहान ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए फिलेटली एक शौक के साथ-साथ ज्ञानवर्धन का भी सशक्त माध्यम है।

पाटन मंडल के अधीक्षक डाकघर श्री आर.ए. गोस्वामी ने बताया कि प्रदर्शनी 5 व 6 अक्टूबर को सुबह 10:30 से शाम 6 बजे तक लोगों के अवलोकनार्थ खुली रहेगी। प्रदर्शनी के दौरान स्कूली विद्यार्थियों के लिए पत्र-लेखन प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी, डाक टिकट डिजाइन इत्यादि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। डाक टिकटों पर अपनी और अपने प्रियजनों  की फोटो छपवाने की सुविधा हेतु 'माई स्टैम्प' का विशेष काउंटर भी आकर्षण का केंद्र बिंदु रहा।

इस अवसर पर सहायक निदेशक अल्पेश शाह, डीन, गोकुल ग्लोबल यूनिवर्सिटी, डॉ. अरविंदकुमार चौहान एवं डॉ. विपुलकुमार डाभी, मेनेजर, गांधी आश्रम, जिलीया, लालजीभाई एम. देसाई, सहायक अधीक्षक के. बालासुब्रमण्यम, बिरंग शाह, डाक निरीक्षक शाहनवाज घांची, नेहल पटेल, जितेंद्र अदालिया सहित तमाम अधिकारी, फ़िलेटलिस्ट और विश्वविद्यालय के प्रोफेसर व विद्यार्थी उपस्थित रहे।