प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना शिक्षा मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य आर्थिक तंगी का सामना कर रहे मेधावी छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा को सुलभ बनाना है। यह योजना ऐसे छात्रों को देश के शीर्ष रैंक वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के लिए बिना किसी जमानत (कोलैटरल-फ्री) और बिना किसी गारंटर के शिक्षा ऋण प्रदान करती है। यह पारिवारिक आय के आधार पर ब्याज छूट के माध्यम से लाभार्थियों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करती है, जिससे उच्च शिक्षा हासिल करने में आने वाली आर्थिक तंगी कम होती हैं। इस तरह, यह योजना भारत को सतत विकास लक्ष्य 4 (एसडीजी 4) की दिशा में प्रगति करने में योगदान देती है। एसडीजी 4 का उद्देश्य 2030 तक सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना है।
पिछले एक दशक के दौरान भारत में उच्च शिक्षा में दाखिले तेजी से बढ़े हैं। सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 2014-15 में जहां 23.7% था वह 2023-24 में बढ़कर 30.0% हो गया। हालांकि, कई मेधावी छात्रों के लिए आर्थिक तंगी की वजह से देश के शीर्ष रैंक वाले संस्थानों में गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा पाना अभी भी मुश्किल भरा रहा है। कई छात्र शिक्षा ऋण के माध्यम से इस आर्थिक तंगी को पूरा करने का प्रयास करते हैं, लेकिन ऐसे कई और छात्र हैं जो इन ऋणों पर लगने वाली ऊंची ब्याज दरों को वहन नहीं कर सकते। इसके कारण अपनी योग्यता के बावजूद इन छात्रों का आईआईटी, आईआईएम और देश के कई अन्य शीर्ष रैंक वाले संस्थानों में पढ़ाई करने का सपना पूरा नहीं हो पाता।
यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी), 2020 से प्रेरित है, जो सिफारिश करती है कि सार्वजनिक और निजी दोनों उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआईएस) में अध्ययन के लिए मेधावी छात्रों को विभिन्न माध्यमों से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे की कमी के कारण कोई भी मेधावी छात्र देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में पढ़ने से वंचित न रहे। पीएम विद्यालक्ष्मी योजना समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने तथा सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसर उपलब्ध कराने के माध्यम से सतत विकास लक्ष्य (एडीजी) 4 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में सकारात्मक योगदान देती है।
पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत देश के नामित गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों (QHEIs) में अपनी योग्यता के आधार पर प्रवेश पाने वाले छात्रों को बिना किसी जमानत और गारंटर के शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत 1,425 उच्च शिक्षण संस्थान शामिल हैं, जिनमें सार्वजनिक और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। मैनेजमेंट कोटा, एनआरआई कोटा आदि के तहत होने वाले दाखिले इस योजना के लाभ के लिए पात्र नहीं होंगे।
बैंकों को कवरेज का विस्तार करने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा ₹ 7.5 लाख तक के ऋण पर 75% क्रेडिट गारंटी प्रदान की जाती है। 8 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले छात्रों के लिए यह योजना 10 लाख रुपये तक के ऋण पर 3% ब्याज सब्सिडी का प्रावधान करती है। यह उस पूरी ब्याज सब्सिडी के अलावा है जो पहले से ही उन छात्रों को दी जाती है जिनके परिवार की सालाना आय ₹4.5 लाख तक है।
पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत पात्र गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों (QHEIs) में प्रवेश पाने वाले छात्र बिना किसी जमानत या तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना भी शिक्षा ऋण प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षा ऋण की अधिकतम राशि पर कोई निश्चित सीमा नहीं है। यह राशि उच्च शिक्षण संस्थान द्वारा निर्धारित कोर्स फीस और अन्य शुल्क (जैसे मेस, हॉस्टल फीस, QHEI की अन्य रिफंडेबल और नॉन-रिफंडेबल फीस, एक उचित गुणवत्ता वाले लैपटॉप की लागत और पाठ्यक्रम की अवधि के दौरान छात्र द्वारा आवश्यक रहने का उचित खर्च)आदि पर निर्भर करेगी। सभी आय वर्गों के छात्र इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
ऋण देने वाली संस्थाओं को छात्रों को शिक्षा ऋण उपलब्ध कराने हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार 7.5 लाख रुपये तक के ऋण पर 75% क्रेडिट गारंटी प्रदान करती है। इससे ऋणदाताओं का जोखिम काफी कम होता है और छात्रों के लिए शिक्षा ऋण प्राप्त करना आसान होता है।
योजना के तहत शिक्षा ऋण पर ली जाने वाली ब्याज दर संबंधित बैंक की एक्सटर्नली बेंचमार्क्ड लेंडिंग रेट (ईबीएलआर) + 0.5% तक सीमित होगी। यह दर हमेशा बैंक द्वारा पीएम-विद्यालक्ष्मी के दायरे से बाहर दिए जाने वाले अन्य शिक्षा ऋणों पर लागू ब्याज दर से कम होगी। शिक्षा ऋण की अधिकतम पुनर्भुगतान अवधि 15 वर्ष तक होगी। इसमें पाठ्यक्रम की अवधि और उसके बाद एक वर्ष की मोराटोरियम अवधि शामिल नहीं होगी। यह ऋण भारत में संचालित सभी डिग्री/डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए उपलब्ध है और ऐसे ऋण प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या की कोई सीमा नहीं है। योजना के तहत शिक्षा ऋण अनुसूचित बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबीएस) और इसमें भाग लेने वाले सहकारी बैंकों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है।
पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना, पीएम-यूएसपी सीएसआईएस (प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी योजना) की पूरक है। पीएम-यूएसपी सीएसआईएस के तहत, के तहत एनएएसी से मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों (HEIs) में तकनीकी/व्यावसायिक पाठ्यक्रम या एनबीएस से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम करने वाले ऐसे छात्र, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय 4.5 लाख रुपये तक है, उन्हें 10 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर मोराटोरियम अवधि के दौरान 100% ब्याज सब्सिडी मिलती है।
इसके अतिरिक्त, पीएम-विद्यालक्ष्मी की ब्याज सब्सिडी योजना का दायरा व्यापक है और इसमें नामित गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों (QHEIs) के सभी पाठ्यक्रम शामिल हैं। इस योजना के तहत 8 लाख रुपये से कम वार्षिक पारिवारिक आय वाले मेधावी छात्रों को 10 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण पर मोराटोरियम अवधि (पाठ्यक्रम की अवधि और उसके बाद एक वर्ष) के दौरान 3% ब्याज सब्सिडी दी जाती है।
यदि शिक्षा ऋण की राशि 10 लाख रुपये से अधिक है, तो ब्याज सब्सिडी केवल 10 लाख रुपये तक की वितरित कुल मूलधन राशि पर ही प्रदान की जाएगी।
जो छात्र केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य छात्रवृत्ति, ब्याज सब्सिडी योजना या शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का लाभ ले रहे हैं, वे सीएसआईएस या पीएम-विद्यालक्ष्मी योजना के तहत ब्याज सब्सिडी का लाभ लेने के पात्र नहीं होंगे।
एक वर्ष में अधिकतम 1 लाख छात्र मोराटोरियम अवधि के दौरान 3% ब्याज सब्सिडी के लिए पात्र होंगे। हालांकि, सीएसआईएस लाभार्थियों के लिए ऐसी कोई अधिकतम सीमा निर्धारित नहीं है।





