भारतीय शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल से आरंभ होकर आज एआई(कृत्रिम बुद्धिमता)तक पहुंच चुकी है।आज भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में युवाओं की सक्रिय भागीदारी स्पष्ट नजर आ रही है।वर्तमान शैक्षिक परिवेश में दिन प्रतिदिन क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिल रहा है।आज की युवा पीढ़ी सर्वांगीण विकास के नित्य नये-नये शिखरों को छू रही है।फिर भी,जिस भारतीय सनातनी संस्कार और संस्कृति को बचाने में कोई एक शिक्षाविद् सफल रहा है तो वह हैं ओड़िशा प्रदेश की राजधानी भुवनेश्वर स्थित कीट-कीस और कीम्स के प्राणप्रतिष्ठाता, महान् शिक्षाविद्, भारतीय संसद के राज्यसभा तथा ओड़िशा कंधमाल लोकसभा के पूर्व सांसद प्रोफेसर अच्युत सामंत।वे मन,वचन और कर्म से त्यागी,तपस्वी और संयमी शिक्षाविद् हैं। वे सदाचारी,सत्यनिष्ठ तथा आत्मविश्वासी हैं। वे स्व अनुशासित तथा ईमानदार हैं। वे परमार्थ चेतना के जीवंत प्रमाण हैं।
क्रिकेट से लेकर एथलेटिक तक,लान टेनिस से लेकर शतरंज तक तथा खेलो इण्डिया से लेकर एशियन गेम्स तक,राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय महिला-पुरुष हाकी तक अगर उनकी संस्थाओं कीट-कीस की असाधारण उपलब्धियों की समीक्षा की जाय तो यह निश्चित रूप से मानना पड़ेगा कि प्रोफेसर अच्युत सामंत के विदेह और निःस्वार्थ शैक्षिक पहल भारतवर्ष ही नहीं अपितु दुनिया के लिए वास्तविक रूप में गौरवमयी तथा प्रेरणामयी वास्तविकता है।हाल ही में, 2026 के सिजनः16 की इंडियन आइडल विजेता बनी हैं कीट की ही पूर्व छात्रा ज्योतिर्मयी नायक।
प्रोफेसर अच्युत सामंत कहते हैं कि शिक्षा बालक-युवाओं का तीसरा नेत्र है जिसको वे अपनी शेक्षिक पहल कीट-कीस-कीम्स के माध्यम से भारतवर्ष की गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था से लेकर आज की एआई शिक्षा व्यवस्था तक पूर्णरुपेण साकार कर रहे हैं।
(लेखक भुवनेश्वर में रहते हैं और ओड़िशा की साहित्यिक, सांस्कृतिक, धार्मिक व सामाजिक गतिविधियों पर निरंतर लेखन करते हैं, साहित्य के क्षेत्र में योगदान देने के लिए आपको राष्ट्रपति ने भी सम्मानित किया है)





