Friday, June 21, 2024
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कौमी एकता और समरसता को बढ़ावा देना डॉ.सिंघल के लेखन का मूल है

समाज में जाति और धर्म के बनधनों से मुक्त होकर कोमी एकता की भावना से कार्य करने वालों में  एक शख्सियत है लेखक, पत्रकार और पूर्व वरिष्ठ जन सम्पर्क अधिकारी डॉ.प्रभात कुमार सिंघल। राजस्थान में कोटा के निवासी  इस शख्स की कार्यशैली, व्यवहार ,कर्म और लेखन में इसकी झलक साफ देखी जा सकती है।
मुझे बहुत नजदीक से इनके विचारों, व्यवहार, कार्यशैली और लेखन को देखने – समझने का मोका मिला है। इन्होंने कभी भी किसी धर्म और जाति की बात नहीं कर सभी जातियों और धर्मो को समभाव से देखा। सरकारी सेवा काल में सभी वर्ग के सहकर्मियों को बिना पक्षपात के एक साथ लेकर चले। इनके सम्पर्क में आने वाले हर धर्म और जाति के व्यक्ति इनके मुरीद रहें। व्यक्ति चाहे  किसी भी जाति या धर्म के हो इनके मन में सभी की हर संभव मदद करने, उनकी समस्या और पीड़ा में भागीदार बनना और सभी से पूरा आदर एवं स्नेह भाव रखना इनका अपना निराला अंदाज है।
  सेवाकाल और पश्चात निरन्तर समाज के सभी प्रतिभाशाली, किसी भी क्षेत्र के विशेषज्ञ व्यक्तियों, बच्चों पर लिखते समय उन्हें प्रोत्साहन देने और अन्य लोगों को प्रेरित करने का भाव ही हमेशा इन के मन में रहा। सभी को साथ लेकर चलना, टीम भावना से कार्य करना, सभी का विनम्र भाव से सम्मान करना आदि ऐसी वजह रही कि ये सभी राजनीतिक व्यक्तियों, धर्माचार्यों, समाजसेवियों, पत्रकारों, कलाकारों,साहित्यकारों, अधिकारियों, सह कर्मियों, कलाकारों, उद्यमियों और समाज के अन्य वर्गो में इनकी लोकप्रियता है।
    सेवाकाल के पश्चात अपने लेखन से समाज में निरन्तर कोमी एकता और सदभाव का संदेश दे रहे हैं। सभी धर्मों पर समान रूप से लेखन करते हैं। धार्मिक संकीर्णता लेशमात्र भी नजर नहीं आती है। आराध्य तीर्थ पुस्तक कोमी एकता का जीवंत उदाहरण है। इसमें सभी धर्म के आस्था स्थलों को पूरी श्रद्धा के साथ सम्मान दिया गया हैं। इन्होंने जहां भारत के सभी प्रमुख मंदिरों पर लिखा वहीं हाल ही में देश के इस्लामिक स्थापत्य पर इनकी पुस्तक की सभी वर्गो ने मुक्त कंठ से सराहना की। इस पुस्तक का महत्व इससे भी है कि यह ऐसे समय आईं है जब देश में सदभाव बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ऐसे ही  देश के जैन मंदिरों पर पुस्तक लिखी है। मैने इनकी सभी पुस्तकें देखी हैं, सभी धर्मो की सामाजिक व्यवस्था, रीति रिवाज और संस्कृति के दर्शन इनकी कई पुस्तकों में होते हैं। इनके आलेख भी कोमी एकता की खुशबू बिखेरते हैं।
   समाज और देश में कोमी एकता और आपसी सदभाव कायम रखने में निश्चित ही इनका लेखन सार्थक है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता। हमें नाज़ है ऐसे समभाव और विचारशील लेखक पर जो अपने लेखन से समाज की एकता को बनाए रखने की दिशा में निरन्तर प्रयासरत है। इनके राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार -पत्रों और पत्रिकाओं में अब तक करीब 10 हजार,फीचर,रिपोर्ताज, आलेख, यात्रावृतांत, स्तंभ, संपादकीय प्रकाशित हो चुके हैं। पिछले 40 वर्षो से पर्यटन, कला और संस्कृति -लेखन पर निरंतर कलम चला रहे हैं, आपकी अब तक पर्यटन के विभन्न पहलुओं पर 25 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही 10 पुस्तकें प्रकाशक के माध्यम से 170 देशों में पहुँच चुकी है जो हम सबके लिए गौरव की बात है।
इनके लेखन को सामाजिक समरसता बढ़ाने वाला मानते हुए पिछले दिनों इनको ऑल इंडिया पीस मिशन, गुरुग्राम द्वारा ” राष्ट्रीय सामाजिक समरसता सम्मान -2022″ , अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन लेखन प्रतिभा के रूप में कर्मयोगी सेवा संस्थान द्वारा ” कर्मयोगी इंटरनेशनल प्राइड अवार्ड 2023″ एवम हाल ही  में इन्हें पर्यटन क्षेत्र में झालावाड़ की सामर्थ्य सेवा संस्थान द्वारा राष्ट्रीय सम्मान ” सामर्थ्य ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड 2023″ से सम्मानित किया जाना हम सभी के लिए गौरव की बात हैं। आपको तीन बार जिला प्रशासन कोटा द्वारा विभिन्न पदों पर सम्मानित किए जाने के साथ – साथ विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
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