ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

“सृजन” द्वारा गद्य साहित्य चर्चा का आयोजन

हिंदी दिवस के पूर्व विशाखापटनम की सक्रिय हिन्दी साहित्य संस्था “सृजन” की मासिक गद्य साहित्य चर्चा का आयोजन ऑनलाइन किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण करते हुए सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा वर्मा ने उपस्थितों का स्वागत किया और कहा– सृजन के 135 वें कार्यक्रम में गद्य साहित्य चर्चा होगी। गद्य लिखना यूं तो कठिन है, पर सृजन में गद्य लिखने वालों की कमी नहीं है। सृजन का उद्देश्य है रचनाकारों को मंच मिले, कविता और गद्य लिखने के लिए प्रोत्साहन मिले, प्रेरणा मिले ताकि वे साहित्य सृजन कर सकें। ऑनलाइन गद्य चर्चा का संचालन सृजन के सचिव डॉ टी महादेव राव ने किया।

सबसे पहले मधुबाला कुशवाहा ने अपने लेख “समाज के नव निर्माण में शिक्षकों की भूमिका” में इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्तमान सामाजिक प्रगति में किस तरह शिक्षक अपना योगदान दे सकते हैं और बदलते परिवेश के साथ उन्हें शिक्षा की रीतियों में नव आशावादी परिवर्तन लाना होगा। एल चिरंजीव राव ने पोर्ट ब्लेयर की यात्रा संस्मरण बड़े रोचक ढंग से सुनाया। यात्राएं न केवल हमें तरोताजा बनाती हैं, बल्कि ज्ञान के नए द्वार भी खोलती हैं।

अपने यात्रा वृत्तान्त में बी शोभावतीने अपने लद्दाख यात्रा का जीवंत वर्णन किया उनकी टांग की हड्डी की तकलीफ के बावजूद भी साहस किया नमन। एस वी आर नायडू ने जीवन की विविध स्थितियों पर परिभाषाओं के रूप में व्यंग्य प्रस्तुत किया। सब्जीवाला शीर्षक संवेदना से भरी कहानी भारती शर्मा ने पढ़ा, जिसमें एक ज़रूरतमन्द ग़रीब की व्यथा थी। अपने लेख मोहन राकेश के नाटकों के अवदान में जय प्रकाश झा ने नाटकों की रचना दारा नाटककार द्वारा स्थापित मूल्यों की बात की।

रामप्रसाद यादव ने छंदमुक्त काव्य की शास्त्रीय विवेचना लेख में कविता सृजन और स्वीकारने के विभिन्न पहलुओं का खुलासा किया। सीमा वर्मा ने भाग्यवान कहानी में एक स्त्री के छात्र जीवन से गृहस्थ जीवन की यात्रा को बखूबी प्रस्तुत किया।

अपने चिंतन लेख दूध भात में नीरव कुमार वर्मा ने बचपन से अब तक की स्थितियों को जीवंत करते हुयी आज के दूषित परिवेश को रेखांकित किया।

डॉ टी महादेवराव ने श्रोता होने का दुख में आजकल के अनर्गल प्रलाप करते वक्ताओं के चंगुल में फंसे एक श्रोता की हालत पर व्यंग्य कसा। सभी रचनाओं पर चर्चा हुई।

हिंदी के प्रचार प्रसार के प्रयास में इस संस्था का योगदान दक्षिण प्रांत मे एक लम्बे समय से अपनी विविध साहित्यिक गतिविधियों से आन्ध्रप्रदेश के विशाखापत्तनम शहर मे कार्यरत है। इसकी यह 135 वीं बैठक ही इसका प्रमाण है।

अंत में सृजन की वरिष्ठ सदस्या सीमा वर्मा ने उपस्थित सभी का आभार माना और कहा इस तरह मिलजुल कर हम एक दूसरे की रचनाओं से न केवल सीखते हैं, बल्कि नए सृजन की ओर प्रेरित भी होते हैं। हम सब साहित्य सृजन की ओर अग्रसर हो सभी हमारी प्रतिभा का और सर्जना का सही अर्थ सामने आएगा। इस कार्यक्रम का संयोजन नीरव कुमार वर्मा का था।

(लेखक ” सृजन” के सचिव हैं)
प्रेषक..लिंगम चिरंंजीव राव
सदस्य -सृजन संस्था विशाखा।

image_pdfimage_print


Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

सम्बंधित लेख
 

Back to Top