ताजा सामाचार

आप यहाँ है :

राधा स्काय गार्डन से पता चलता है सरकारों और मुख्यमंत्री को कौन गिरवी रखता है‍!

कहते हैं कि मनी में बहुत पावर होता है। इसी लिए इस मनी के दम पर बिल्डर अफ़सरों को ही नहीं मुख्यमंत्रियों को भी अपनी ज़ेब में रखते हैं। मायावती तब उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। नोएडा एक्सटेंशन जो अब ग्रेटर नोएडा वेस्ट नाम से प्रचलित है का काम बड़ी तेज़ी से चल रहा था। मथुरा का एक बिल्डर राम अग्रवाल भी मायावती से मिला। मायावती तब प्रति एकड़ दो करोड़ रुपए की रिश्वत खुलेआम का रेट खोले हुई थीं। अथॉरिटी को निर्धारित पैसा अलग था। इस बिल्डर राम अग्रवाल ने मायावती को पचास एकड़ के लिए सौ करोड़ रुपए एडवांस रिश्वत के मद में दे दिया। पर जब ज़मीन आवंटित हुई तो सैतालिस एकड़ ही हुई। बिल्डर राम अग्रवाल भागा-भागा मायावती के पास लखनऊ आया। बताया कि पैसे तो पचास एकड़ के लिए दिए थे। तीन एकड़ कम मिला है। सुन कर मायावती मुस्कुराईं। बोलीं , ‘ अब तो जो होना था , हो गया। ‘ बिल्डर राम अग्रवाल गिड़गिड़ाया , ‘ बहुत नुकसान हो जाएगा ! ‘ मायावती फिर मुस्कुराईं। पूछा , ‘ कितने मंज़िल का नक्शा है तेरा ? ‘ बिल्डर राम अग्रवाल बोला , ‘ 15 मंज़िल का। ‘ मायावती ने कहा , ‘ चल 19 मंज़िल बना ले ! ‘ वह बोलीं , ‘ तेरा नुकसान बराबर हो जाएगा। ‘ बिल्डर ख़ुशी-ख़ुशी लखनऊ से लौट गया। 19 मंज़िल के 20-22 अपार्टमेंट बना लिए इस 47 एकड़ की ज़मीन पर। प्लाट नंबर है जी एच – 05 , सेक्टर 16 बी , ग्रेटर नोएडा वेस्ट – 201310 उत्तर प्रदेश। कंपनी का नाम है एम / एस एस जे पी इंफ्राकन लिमिटेड। सोसाइटी का नाम है श्री राधा स्काई गार्डन।

श्री राधा स्काई गार्डन में अब 15 की जगह 19 मंज़िल के 20 -22 अपार्टमेंट बन कर खड़े हैं। 25-30 परसेंट लोग रहने भी आ गए हैं। ज़्यादातर लोग जो नहीं आए हैं , वह इनवेस्टर लोग हैं। या कब्ज़ा नहीं मिला है। ज़्यादातर काला धन को सफ़ेद करने वाले इनवेस्टर। मतलब नौकरशाह आदि लोग हैं। इन लोगों ने भी अपने दूर या नज़दीक़ के परिजनों के नाम पर फ़्लैट बुक कर छोड़ दिए हैं। बड़े-बड़े नौकरशाहों का काला धन राम अग्रवाल की कंपनी में लगा हुआ है। काला धन सफ़ेद करने की फैक्ट्री है यह बिल्डर राम अग्रवाल। मैंने भी इस श्री राधा स्काई गार्डन में एक फ़्लैट ले रखा है। पहले यह फ़्लैट एक इनकम टैक्स कमिश्नर का था। पर उस ने अपने नाम से नहीं बुक किया था। अपने पिता और सास के नाम से ज्वाइंट बुक कर रखा था। फ़्लैट ख़रीदने के पहले बिल्डर से लाख कहा कि एक बार जिस का फ़्लैट है , उस से मिलवा दीजिए। पर बिल्डर ने कहा कि , ‘ सर आप को जानते हैं। मिलना नहीं चाहते। ‘ मैं ने पूछा , ‘ क्यों ? दिक़्क़त क्या है ? ‘ बिल्डर बोला , ‘ उन्हें डर है कि आप उन से पैसे कम करने का दबाव बनाएंगे। और वह आप की बात टाल नहीं पाएंगे। फिर आप के सामने वह पड़ना भी नहीं चाहते।

‘ बिल्डर ने उस इनकम टैक्स के पिता का एकाउंट नंबर दिया। मैं ने आर टी जी एस के मार्फ़त उस अकाउंट में पैसा जमा कर दिया। बिल्डर ने रजिस्ट्री करवा दी। वह ख़ुश था कि नंबर एक में पैसा मिल गया। मेरे फ़्लैट की रजिस्ट्री तो ख़ैर पैसा देने के पंद्रह दिन बाद ही हो गई। पर ऐसे बहुत से लोग हैं , जिन का पूरा पैसा जमा है। पर बिल्डर रजिस्ट्री नहीं कर रहा। यहां तक तो न ठीक होते हुए भी सब ठीक था। पर अब जो थोड़े-बहुत लोग रहने लगे हैं , उन की भी कोई सुनने वाला नहीं है। न कोई रेरा , न कोई अथॉरिटी। न कोई मंत्री , न मुख्यमंत्री। तब जब कि श्री राधा स्काई गार्डेन के रेजीडेंट्स में कुछ सेलिब्रेटीज टाइप लोग भी हैं। कुछ मीडिया पर्सन भी। बड़े मीडिया घरानों में मशहूर लोग। अथॉरिटी के सी ई ओ हों या रेरा के बॉस लोग या एन पी सी एल के बाप लोग। सब के सब बिल्डर की ज़ेब में बैठ कर ऐश कर रहे हैं।

बिल्डर ने 19 मंज़िल के तमाम अपर्टमेंट बना दिए। पर बीते पांच साल से बेसमेंट को गटर बना रखा है। सीवर का सारा पानी लीक हो कर यहीं हिंडन नदी बना रहता है। नतीज़तन समूची बिल्डिंग कमज़ोर हो रही है। कब धसक कर ट्विन टावर की तरह बैठ जाए , कोई नहीं जानता। लोगों की जान और बिल्डिंग ख़तरे में है तो रहे। बिल्डर की बला से। दूसरे , बेसमेंट में पार्किंग की जगह लोग इस्तेमाल नहीं कर पाते। क्यों कि यहां सीवर के जल की पार्किंग है। चहुं ओर बदबू ही बदबू। तब जब कि रजिस्ट्री के समय प्रति पार्किंग तीन लाख रुपए अलग से ले कर रजिस्ट्री की है बिल्डर ने। लेकिन लोग बाहर पार्किंग के लिए विवश हैं। बिल्डर ने क्लब , जिम , स्वीमिंग पुल आदि की सुविधा भी अभी तक नहीं दी है। यह सुविधाएं तो छोड़िए जब मन तब सिक्योरिटी गार्ड सारे गेट खुला छोड़ कर हड़ताल पर चले जाते हैं। क्यों कि उन्हें कभी समय से वेतन नहीं मिलता। हड़ताल करते हैं तो कुछ पैसा मिल जाता है।

हर अपार्टमेंट में दो लिफ्ट हैं। एक लिफ्ट हरदम बंद रहती है। दूसरी लिफ्ट भी जब-तब विश्राम ले लेती है। लोग 19 मंज़िल की सीढ़ी चढ़ते-उतरते हैं। कैसे उतरते हैं , वह ही जानते हैं। कब कौन ऊपर लटक जाए , कौन नीचे फंस जाए , हरदम की यातना है यह। बिजली जब-तब हर हफ़्ते कट जाती है। यह तब है जब बिजली बिल की प्री पेड व्यवस्था है। लेकिन बिल्डर पर लाखों रुपए का बिजली बिल काफी समय से बकाया है। टोकन पेमेंट पर बिजली जुड़ती है। फिर कट जाती है। जेनरेटर भी किराए का है। डीजल हरदम समाप्त रहता है। तब जब कि जनरेटर वाली बिजली 22 रुपए प्रति यूनिट है। बाक़ी 7 रुपए यूनिट। लोड का शुल्क अलग से। लगभग रोज का 50 रुपए। भले अपने फ़्लैट में आप ताला बंद रखिए। यह बिल देना ही है। अजब डकैती है। सफाई स्टाफ , कूड़ा उठाने वाला स्टाफ भी कब हड़ताल पर चले जाएं , वह भी नहीं जानते। टोकन पेमेंट पर काम करते हैं बिचारे। वह भी समय से नहीं मिलता। ऐसे ही अनेक समस्याएं मुंह बाए रोज खड़ी रहती हैं। यह सब तब है जब लोगों ने दो साल का मेंटेनेंस चार्ज दो साल का एडवांस दे रखा है। अब बिल्डर बिना कोई सुविधा दिए मेंटेनेंस चार्ज एक्स्ट्रा वसूलने का दबाव बनाए हुए है।

अब लोगों ने बिल्डर को अपनी तकलीफ़ बतानी शुरु की। एकल भी। समूह में भी। मथुरा जा-जा कर। लिखित भी , मौखिक भी। मीडिया में भी कहानियां आने लगीं। ख़बरों पर ख़बरें। प्रिंट में भी , इलेक्ट्रानिक में भी। पर जब आश्वासन का झुनझुना टूटता ही गया तो लोगों ने नोएडा अथॉरिटी की राह पकड़ी। शिकायतें दर्ज होने लगीं। तीन-चार साल से अथॉरिटी भी मीटिंग करती है , सो जाती है। तमाम लोग रेरा में भी याचिका दायर कर चुके हैं। पर रेरा और अथॉरिटी ने भी श्री राधा स्काई गार्डेन के निवासियों को प्रकारांतर से बता दिया है कि आप लोग आदमी नहीं , झुनझुना हैं। हम जब-तब बजाते रहेंगे। आप बजते रहिए। बता दिया कि हम बिल्डर की जेब में हैं , सो लाचार हैं। दो साल पहले लोग एन पी सी एल गए। कि कम से कम बिजली के मामले में तो बिल्डर से मुक्त हो जाएं। पर दुनिया भर के सर्वे और फ़ार्म वगैरह भरवाने की क़वायद के बाद एन सी पी एल ने भी बता दिया लोगों को कि तुम लोग आदमी नहीं , झुनझुने हो। किसी को कोई कनेक्शन नहीं मिला बिजली का। एन पी सी एल ने भी बता दिया कि हम बिल्डर की जेब में हैं , सो लाचार हैं।

श्री राधा स्काई गार्डेन के लोगों को बहुत उम्मीद थी की योगी राज में उन की ज़रुर सुनवाई होगी। क्षेत्रीय विधायक भी आए और झुनझुना बजा कर चले गए। सारी फ़रियाद श्री राधा स्काई गार्डेन के बेसमेंट के गटर में सड़ गई। बाद में लोगों को समझ आया कि मथुरा का श्रीकांत शर्मा जो तब ऊर्जा मंत्री था , बिल्डर राम अग्रवाल ने उसे ख़रीद लिया था । श्रीकांत शर्मा कहीं कुछ होने ही नहीं देता था। पर योगी राज – दो में भी सब कुछ ढाक के तीन पात है। संयोग देखिए कि आवास मंत्रालय का विभाग मुख्यमंत्री योगी के ही पास है। तो इतना कोहराम मचने के बाद योगी के कान पर जूं क्यों नहीं रेंग रही ? क्या राम अग्रवाल ने योगी को भी मैनेज कर लिया है ? ऊर्जा मंत्री अरविंद शर्मा क्या कर रहे हैं ? कि श्रीकांत शर्मा की तरह अरविंद शर्मा भी बिक गए हैं ?

दिलचस्प यह कि श्रीराधा स्काई गार्डन की यह कथा सिर्फ़ श्री राधा स्काई गार्डेन की ही नहीं है। सेक्टर 16 -बी ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सभी सोसाइटियों की है। हर कहीं बस एक ही समस्या , एक ही शोर। पर सभी बिल्डरों ने नोएडा अथॉरिटी , रेरा और एन पी सी एल को बेभाव ख़रीद रखा है। सभी का महीना बंधा हुआ है। योगी राज में भ्रष्टाचार की खुली किताब है , नोएडा अथॉरिटी , रेरा और एन पी सी एल। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की सारी सोसाइटियांइस की गवाह हैं।

आज एक चैनल पर ट्विन टावर वाले सुपर टेक का एक निदेशक आर के अरोड़ा ने इंटरव्यू में जिस ठसक के साथ बार-बार नोएडा अथॉरिटी का ज़िक्र किया और बताया कि उस ने जो भी किया था , अथॉरिटी की स्वीकृति के बाद ही किया था। एंकर पूछती रही कि नोएडा अथॉरिटी को कैसे आप ने मैनेज किया ? इस सवाल को मुसलसल टालता रहा आर के अरोड़ा। गौरतलब है की सुप्रीमकोर्ट ने साफ़ कहा है कि नोएडा अथारिटी नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है इसकी आंख, नाक, कान और यहां तक कि चेहरे तक से भ्रष्टाचार टपकता है।

योगी जी , आंख, नाक, कान और यहां तक कि चेहरे इस टपकते भ्रष्टाचार पर बुलडोजर कब चलेगा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखो नागरिक इस बुलडोजर की प्रतीक्षा में हैं। इन भ्रष्ट अफसरों और राम अग्रवाल जैसे बिल्डरों को जेल भेजिए। इन की काली कमाई को ज़ब्त कीजिए। याद कीजिए यह वही नोएडा अथॉरिटी है , जिस की सी ई ओ रही नीरा यादव महाभ्रष्ट कहलाईं और अदालत में भ्रष्टाचार सिद्ध होने पर सज़ायाफ़्ता हुईं। जेल गईं।

साभार- https://sarokarnama.blogspot.com/2022/08/blog-post_29.html से

image_pdfimage_print


Leave a Reply
 

Your email address will not be published. Required fields are marked (*)

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

Get in Touch

Back to Top