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ज्ञान के मानसरोवर में प्रबुद्ध मीडिया का आत्म चिंतन

आबू रोड। समाज को दिशा देने का गुरुतर दायित्व जिस मीडिया पर है वह खुद अपने आप को किस हाल मे पा रहा है। बाजार की शक्तियों समेत जिन चुनौतियों से जूझने की चिंता स्वयं मीडिया में काम करने वालों को खाये जा रही है उनसे निपटने में ध्यान, योग, साधना जैसी उपासना किस हद तक सहायक हो सकती है, यही तलाशने देश विदेश के दो हजार मीडियाकर्मी पांच दिनों के लिए आबू रोड स्थित ब्रह्माकुमारीज के शांतिवन में जुटे हैं।

शुक्रवार शाम स्वागत सत्र के साथ राष्ट्रीय मीडिया महा सम्मेलन शुरू हुआ पर उसका औपचारिक शुभारंभ शनिवार के उद्घाटन सत्र में गंभीर विचार विमर्श के साथ प्रारंभ हुआ। नवभारत टाइम्स मुम्बई के सम्पादक सुंदरचंद ठाकुर ने ,जो कि सेना से निवृत्ति लेकर मीडिया के फील्ड में एक उपन्यास लिखकर आये हैं, ने दम खम से अपने अनुभवों का खुलासा करते हुए कहा कि सत्य की राह पर चलकर ही मीडिया अपनी गिरती हुई प्रतिष्ठा को रोक पाएगा। मीडिया के प्रबुद्ध होने से ही समाज के प्रबुध्द होने की शुरुआत होगी। वरिष्ठ टीवी पत्रकार संजय शर्मा ने भी दो टूक बात कही कि यदि समय रहते मीडिया अपने समक्ष आ रही चुनौतियों के प्रति गंभीर नहीं हुआ तो वह ठगा सा रह जाएगा क्योंकि वह व्यवस्था में परिवर्तन लाने की स्थिति में नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत में असमानता का मुद्दा लोगों को पूर्ण नागरिक बनने में बाधक साबित हो रहा है। उन्होंने मीडिया के कुछ हिस्सों को प्रायोगिक तौर पर ट्रस्टीशिप के अंतर्गत लाने का सुझाव भी दिया। उद्घाटन सत्र को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विवि की मुख्य प्रशासिका दादी रतनमोहिनी, मीडिया विंग के प्रमुख करूणा भाई सहित अन्य कई वक्ताओं ने संबोधित किया। उद्घाटन सत्र के बीज वक्तव्य में प्रो. कमल दीक्षित ने मीडिया शिक्षा के कैरियर उन्मुख होने पर चिंता जताई। बेहतर विश्व निर्माण के लिए प्रबुध्द मीडिया विषय पर केंद्रित सम्मेलन 25 सितंबर तक चलेगा। समारोह में पत्रिका सत्य केसरी और मीडिया मेकर्स आफ राजस्थान नामक पुस्तक का लोकार्पण भी अतिथियों ने किया।

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