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स्वच्छता अभियान में धर्मगुरू भी आगे आए

साँची।. विभिन्न धर्मो के प्रतिनिधियों ने ऐलान किया है कि समाज की समृद्धि के लिए सामूहिक रूप से स्वच्छता अभियान चलाने की जरूरत है। यह ऐलान 24 मार्च 2015 को साँची में आयोजित म.प्र. में स्वच्छता पर केन्द्रित अन्तःपान्थिक संवाद में विभिन्न धर्म के प्रतिनिधियों ने किया। साँची घोषणा के नाम से जारी एक बयान में स्वच्छता की जरूरत पर जोर देते हुए नैतिक शिक्षा को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में सुधार कर इसे अनिवार्य बनाने की अपील की गई है।

यूनिसेफ और स्पंदन संस्था की ओर से आयोजित इस संवाद में जारी इस घोषणा पत्र पर जिन प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए है उनमे प्रो. सामदोंग रिम्पोचे, स्वामी हनुतश्री, सै.मुशताक़ अली नदवी, ज्ञानी दिलीप सिंह, फादर साजी, स्वामी बलबीर दास, आचार्य रजनीश पवार, शेखर बाबा, ड़ा कयानात काजी के नाम शामिल है। खासकर बच्चों और महिलाओं के कल्याण के मद्देनजर जारी इस घोषणा पत्र मे कहा गया है कि अज्ञान के कारण कई तरह की गंदगी विकसित होती है अगर इनको कारगर तरीके से दूर किया जाए तो हम समाज को स्वर्ग बना सकते है । इसके साथ ही खुले में शौच की प्रवृत्ति को खत्म करने की अपील की गई है। भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि जब तक मनुष्य की सोच नही बदलेगी तब तक स्वच्छता को लागू नहीँ किया जा सकता. उन्होँने कहा कि इस्लाम मेँ स्वच्छता को बहुत महत्व दिया गया है.

सभी धर्म गुरुओं के वक्तव्यों पर अपनी टिप्पणी देते हुए बौद्ध गुरु और सांची विश्वविद्यालय के चांसलर प्रो. रिम्पोचे ने कहा कि सभी धर्म आध्यत्मिक शिक्षा के साथ व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर सफाई पर भी जोर देते रहे है। उन्होने तेजी से बदलती जीवन शैली को मौजूदा समस्याओं की वजह बताते हुए कहा कि आज पानी मिट्टी हवा और परिवेश अशुद्ध हो गए है। म.प्र.यूनिसेफ प्रमुख ट्रेवर क्लार्क ने कहा कि यूनिसेफ बच्चों के प्रति अत्यत संवेदनशील है स्वच्छता का सवाल बच्चो की मौत से जुड़ा हुआ है। इसमे लापरवाही बच्चो की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती है। यदि हम स्वच्छता को अपनाते है तो इन खतरो से बचा जा सकता है। वहीं यूनीसेफ के जानसन ने कहा कि मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों मे 90 फीसदी आबादी खुले में शौच करती है जिस कारण बच्चे और महिलाए भारी संख्या में अकाल मौत की शिकार होती है। सर्वप्रथम स्वामी हनुतश्री ने कहा कि धर्म की शुरूआत स्वच्छता से होती है यह ईश्वर के करीब ले जाती है। नदियों के किनारे शहर स्वच्छता को ध्यान में रखकर ही बसाए गए थे, किंतु अब नदिया प्रदूषित हो गई है। इन्होने साफ-सफाई को सबसे महत्वपूर्ण माना है । 

आर्ट आफ लिविंग के स्वामी अनुपम ने कहा कि अब समय बाहर निकलकर कुछ करने का है एक ठोस कार्य योजना बनाए और उस पर अमल करें। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम के आरंम्भ में स्पंदन के सचिव अनिल सौमित्र ने कार्यक्रम के उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा कि धर्म गुरुओं के साथ संवाद एक महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योकि विभिन्न धर्मोँ के प्रतिनिधि हर समुदाय को प्रभावित करने में सक्षम है। यूनिसफ के जनसंपर्क अधिकारी अनिल गुलाटी ने कहा कि स्वच्छता बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है और इस मामले में मध्यप्रदेश पिछड़ा है। हालाकि हाल के प्रयासों से शिशु मृत्यु दर में गिरावट आई है। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनेक तरह के प्रयास किए जा रहे है। यह कार्यक्रम उसी का हिस्सा है । कार्यक्रम में ज्ञानी दिलीप सिँह, ब्रह्मकुमारीज की बहन रीना, ड़ा अनवर शफ़ी, ड़ा. अंजना गुप्ता, शेखर बाबा, भंते चन्द रतन थेरो, ब्रह्म्चारी अमित जैन ने भी अपने विचार रखे।

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