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ये है सेवा कर का फंडा, 10 लाख की कमाई है तो देना ही पड़ेगा सेवा कर

अगर आप उद्यमी हैं तो सेवा कर नियमों की कुछ बातें परेशान कर सकती हैं। हालांकि सेवा कर भुगतान करने के लिए ग्राहकों को दिए जाने वाले बिल की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है, लेकिन एक बार 10 लाख रुपये से अधिक सेवा कर योग्य बिल के लिए पंजीकृत होने पर भविष्य में इस रकम से कम बिल आने पर भी उतनी ही रकम का भुगतान करना होगा। 1 जून से सेवा कर मौजूदा 12.36 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गया है। दरअसल जो कोई भी सेवा प्रदान करता है वह सेवा कर भुगतान करने के योग्य है। इनमें वकील, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट या ब्यूटी पार्लर, कोचिंग क्लास और फिटनेस सेंटर चलाने वाले लोग हैं। हालांकि आय कर की तरह सेवा कर स्वत: नहीं लगता है। इनके कुछ अलग पहलू होते हैं। 

सेवा प्रदाता को यह विकल्प दिया जाता है कि वह तब तक सेवा कर के लिए पंजीकरण नहीं कर सकते हैं जब तक साल में ग्राहकों को दी गई सेवा का मूल्य 9 लाख रुपये से अधिक नहीं हो जाता है। हालांकि पंजीकरण कराने के कुछ फायदे भी  हैं।  मिसाल के तौर पर मुंबई के चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव गोखले कहते हैं कि किसी भी प्रकार के लिए सरकारी विभाग या कार्यालय पंजीकृत सेवा प्रदाताओं को तवज्जो देते हैं। यानी आप ऐसी कंपनी चला रहे हैं जो हाउसकीपिंग सर्विसेज देती है और सरकारी परियोजना हासिल करने के लिए जोर लगा रही है तो पहले सेवा कर अधिकारियों के साथ स्वयं को पंजीकृत कराना बेहतर होगा। पंजीकरण के बाद भी आपको तक तक सेवा कर भुगतान करने की जरूरत नहीं है जब तक बिल सालाना 10 लाख रुपये से अधिक नहीं हो जाता है। लेकिन यह सीमा पार करने पर आपको सेवा कर का भुगतान करना होगा। सेवा कर की अधिकतम सीमा की गणना पिछले साल और मौजूदा साल के कुल कारोबार के आधार पर की जाती है। लिहाजा आपकी सेवा कंपनी ने अगर 2014-15 में 11 लाख रुपये मूल्य की सेवाएं मुहैया कराई हैं तो आपको सेवा कर का भुगतान करना पड़ेगा, क्योंकि आप 10 लाख रुपये की अधिकतक सीमा पार कर चुके हैं। अगर आपकी सेवाओं का मूल्य 2015-16 में 8 लाख रुपये से अधिक रहता है तो भी सेवा कर का भुगतान करना होगा, क्योंकि सेवा कर की गणना पिछले साल के आधार पर की जाती है। अगर 2016-17 में सेवाओं का कुल मूल्य 7 लाख रुपये रहा तो आपके पास सेवा कर भुगतान नहीं करने का विकल्प होगा, क्योंकि पिछले साल 2015-16 में सेवा कर अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये से कम (8 लाख रुपये) था। लेकिन 2016-17 में कुल मूल्य 10 लाख रुपये से अधिक रहता है तो आपको सेवा कर का भुगतान करना होगा।

सेवा कर भुगतान में रियायत छोटे उद्यमियों को दी जाती है, ताकि उन्हें अपने ग्राहकों के लिए शुल्क बढ़ाने पर विवश नहीं होना पड़े।  अन्स्र्ट ऐंड यंग (ईवाई) के टैक्स पार्टनर विपिन सपरा कहते हैं कि अगर आप अपने ग्राहकों से सेवा कर लेते तो आपको सरकार को भी इसका भुगतान करना होगा भले ही आपका सालाना कारोबार 10 लाख रुपये पार नहीं करता है। सपरा कहते हैं, 'कंपनियां अपनी कंपनी का विभाजन कर कारोबार 10 लाख रुपये से कम दिखाकर सेवा कर बचाने की कोशिश करती हैं।' एक दूसरी शर्त यह है कि अगर आप किसी फ्रैंचाइजी के हिस्से हैं तो आप पहले दिन से सेवा कर देने के भागी हैं भले ही आपने कितनी रकम का ही कारोबार क्यों नहीं किया है।

इसी तरह, ब्यूटी पार्लर का उदाहरण लें तो अगर यह एकल है तो सेवा मूल्य 10 लाख रुपये पार करने पर ही सेवा कर लगेगा। मान लें कि यह फ्रैंचाइजी चेन लॉरियल का हिस्सा है तो पहले दिन से ही इसे सेवा कर देना होगा। सपरा कहते हैं, 'इसके पीछे तर्क यह है कि किसी फ्रैंचाइजी का हिस्सा होने पर आप एक बड़े ब्रांड के हिस्से बन जाते हैं और इसका आपको लाभ भी मिलता है। सेवा कर में रियायत केवल छोटे उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाती है।' अब सेवा कर भुगतान ऑनलाइन किया जाता है। कंपनी को हरेक माह इसका भुगतान करना होता है, जबकि प्रॉपराइटी या पार्टनरशिप फर्म को तिमाही आधार पर भुगतान करना होता है। रिटर्न छमाही आधार पर दाखिल करना होता है।

साभार- बिज़नेस स्टैंडर्ड से 

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