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हिंदी प्रेमी मोदीजी के राज में दूरदर्शन पर हिंदी का ये हाल है

हिंदी में बिंदी और कॉमा बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इनका गलत प्रयोग अर्थ का अनर्थ कर सकता है। दूरदर्शन के साथ भी बीते दिनों कुछ ऐसा ही हुआ। दूरदर्शन के ट्विटर हैंडल पर एक ऐसी गलती हो गई, जिसने न केवल सरकारी चैनल के कर्मियों के हिंदी ज्ञान पर सवालिया निशान लगाया, बल्कि पांच राज्यों में हार का सामना कर रही भाजपा के ज़ख्मों पर नमक भी छिड़क दिया। हालांकि, ये बात अलग है कि दूरदर्शन के किसी ज्ञानी शख्स की नज़र पड़ते ही गलती भरे ट्वीट को हटा लिया गया, लेकिन तब तक ट्वीट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वैसे भी सोशल मीडिया पर चीज़ें हमारे सांस लेने से भी ज्यादा तेज़ी से फैल जाती हैं।

दरअसल, पांच राज्यों के चुनावी परिणामों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शीतकालीन सत्र में भाग लेने के लिए संसद पहुंचे थे। इस दौरान पीएम पत्रकारों से भी मुखातिब हुए। उन्होंने विपक्षी दलों से संसद चलने देने की अपील करते हुए कहा कि चर्चा भले ही तीखी हो, लेकिन चर्चा तो हो। सरकारी चैनल होने के नाते दूरदर्शन ने तुरंत पीएम मोदी के शब्दों को ट्वीट का रूप दिया और उनकी फोटो के साथ पोस्ट कर दिया। अपने ट्वीट में डीडीन्यूज़हिंदी ने लिखा ‘संसद के शीतकालीन सत्र से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा तेज-तर्रार चर्चा हो, तीखी चर्चा हो, मगर चर्चा तो हो।’

दूरदर्शन का ट्विटर हैंडल संभालने वाले शख्स ने इस ट्वीट में हिंदी के सामान्य ज्ञान का परिचय नहीं दिया, जिसके चलते प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री जैसे नज़र आए। हिंदी व्याकरण के अनुसार, पूर्व के बाद कॉमा लगाया जाना चाहिए था। कॉमा नहीं होने के चलते इसे एकसाथ पढ़ा गया, यानी कि पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। जिसने भी ये ट्वीट देखा, कुछ देर के लिए समझ नहीं पाया कि पांच राज्यों में भाजपा की हार से नरेंद्र मोदी पूर्व प्रधानमंत्री कैसे हो सकते हैं?

इससे पहले कि दूरदर्शन इस ट्वीट को हटाता, लोगों ने स्क्रीनशॉट लेकर उसे वायरल कर दिया। आम यूजर्स के साथ ही कुछ पत्रकारों ने भी इस पर चुटकी लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कुछ लोगों ने तो यहाँ तक पूछ लिया कि अब किसी नौकरी जाने वाली है।

वैसे ये कोई पहला मौका नहीं है जब दूरदर्शन गलती के चलते सुर्ख़ियों में है। इससे पहले भी कई बार उसकी फजीहत हो चुकी है। 2014 में दूरदर्शन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से जुड़ी खबर में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें दिखा दीं थीं। इतना ही नहीं, एक दूसरे टाइम स्‍लॉट में भी इन्‍हीं विजुअल्‍स को प्रसारित किया गया था।

इसी तरह चीनी राष्‍ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान दूरदर्शन की महिला एंकर ने शी चिनफिंग का नाम इलेवन जिंगफिन पढ़ दिया गया था। इस गलती के चलते भले ही एंकर को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा, लेकिन सरकारी चैनल का मजाक भी जमकर उड़ा। दरअसल, अनुभवी एंकरों की अनुपस्थिति में एक नई एंकर को लेट नाइट शो की जिम्‍मेदारी थमा दी गई थी। इसके बाद जब वह चीनी राष्‍ट्रपति की भारत यात्रा के बारे में बता रही थी तो उसके मुंह से शी चिनफिंग के नाम की जगह इलेवन निकल गया। इसके बाद दूरदर्शन ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए एंकर को नौकरी से निकाल दिया था।

कुछ ऐसा ही नज़ारा कश्मीर में आई बाढ़ के वक़्त भी देखने को मिला था। दूरदर्शन के एक एंकर ने कश्मीर के शहर अनंतनाग को इस्लामाबाद और हिमालय की पहाड़ी ‘शंकराचार्य हिल’ को ‘कोह-ए-सुलमान’ पढ़ डाला था। ताज्जुब वाली बात ये थी कि एंकर ने लगातार दो दिनों तक ये गलतियां की, लेकिन प्रसारण में लगे अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों ने उस पर ध्यान भी नहीं दिया।

दरअसल, अनंतनाग के लिए ‘इस्लामाबाद’ और ‘शंकराचार्य‌ हिल’ के लिए ‘कोह-ए-सुलेमान’ का इस्तेमाल कश्मीरी अलगाववादी करते हैं, जबकि भारत सरकार ने उन नामों को मान्यता नहीं दी है। गनीमत इतनी थी कि एंकर जिस कार्यक्रम की एंकरिंग कर रहा था, उसका सीधा प्रसारण भी नहीं किया जा रहा था। सोशल मीडिया में मामले की चर्चा होने और दफ्तर में फोन आने के बाद दूरदर्शन का गलती की ओर ध्यान गया, जिसके बाद एंकर को तत्काल समाचार पढ़ने के काम से हटाकर एसाइनमेंट के काम पर लगा दिया गया।

साभार- http://www.samachar4media.com से

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