कोटा । देश के जानेमाने पर्यटन लेखक डॉ. प्रभात कुमार सिंघल को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर कोटा में आयोजित संभागीय सम्मेलन में गांधीनगर की पंजीकृत वैश्विक संस्था " समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत"द्वारा कला,संस्कृति, पर्यटन और साहित्य की सेवाओं के लिए अभिनंदन पत्र से सम्मानित किया गया। संस्था के संस्थापक एवं संयोजक डॉ. मुकेश कुमार व्यास ' स्नेहिल, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शशि जैन एवं अन्य राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने उन्हें सम्मान पत्र प्रदान कर अभिनंदन किया।
साहित्यकार रेणु सिंह राधे ने सम्मान पत्र का वाचन करते हुए बताया कि डॉ. प्रभात कुमार सिंघल राजस्थान के ऐसे लेखक हैं जिन्होंने भारत पर्यटन का प्रचार अन्तर्राष्ट्रीय जगत में कर पर्यटन लेखक के रूप में अपनी विशेष पहचान बनाई हैं। इन्हें देश के प्रमुख पर्यटन लेखकों में शामिल किया जाना गौरव हम सबके लिए गौरव की बात है।
डॉ. सिंघल का जन्म 15 अक्टूबर 1953 को कोटा में हुआ। इनके पिता स्व. चमन लाल राजस्थान के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थे। माता स्व. सुमन लता धार्मिक विचारों की महिला थी। इन्होंने इतिहास विषय में पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त कर पत्रकारिता और जनसंचार विषय में मास्टर डिग्री प्राप्त की। राजस्थान सरकार के सूचना एवं जन संपर्क विभाग में संयुक्त निदेशक पद से अक्टूबर 2013 में सेवा निवृत होने के पश्चात नितंतर लेखन एवं पत्रकारिता में लगे हैं। विगत 4 वर्षों से विशेषकर साहित्यिक पत्रकारिता में सक्रिय है।आप राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय अधिस्वीकृत पत्रकार हैं और कई समाचार पत्रों एवं राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल्स के स्थाई लेखकों की सूची में शामिल हैं।
डॉ. सिंघल इतिहास, पुरातत्व, कला, संस्कृति और पर्यटन के विविध पहलुओं सहित साहित्य क्षेत्र में अब तक 61 पुस्तकें लिख चुके हैं। इनकी 6 खंडों में अद्भुत भारत पुस्तक के 5 संस्करण प्रकाशित हुए हैं। पर्यटन पर लिखी इनकी 10 पुस्तकें वी एस आर डी प्रकाशन मुंबई द्वारा160 देशों में विक्रय के लिए भेजी गई। इनकी पर्यटन में लोकप्रियता को देखते हुए साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर द्वारा सात पुस्तकों का लेखन करवा कर प्रकाशित किया है।
डॉ. सिंघल ने पर्यटन के साथ - साथ साहित्य क्षेत्र में अत्यंत अल्प समय में जो कर दिखाया वह लंबे समय में भी करना किसी के लिए बहुत मुश्किल है। जियो तो ऐसे जियो, राजस्थान के साहित्य साधक, नारी चेतना की साहित्यिक उड़ान और राजस्थान रचनाकार परिचय कोश पुस्तकें साहित्य जगत को इनकी अमूल्य देन और ऐतिहासिक दस्तावेज कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। अथक परिश्रम से इनके साथ - साथ महिलाओं और बच्चों में साहित्यिक चेतना जागृति की लहर उत्पन्न करने का भागीरथी कार्य आशातीत सफलता के साथ अंजाम दिया। ये लक्ष्य निर्धारित कर पूरी सामर्थ्य से कार्य करते हैं। इनके कार्य प्रत्यक्ष प्रमाण है कि इनमें समाज में परिवर्तन और सकारात्मक चिंतन लाने की अदभुत क्षमताएं हैं।
आपको पर्यटन और साहित्यिक उपलब्धियों के लिए लाइफ टाइम एचीवमेंट अवॉर्ड और अनेक राष्ट्रीय पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए हैं। ये स्वभाव से सरल,सहज, मिलनसार, सबको साथ ले कर चलने वाले, सकारात्मक सोच से कार्य करने वाले, अत्यंत परिश्रमी, योजनाकार, और पारदर्शी व्यक्तित्व के धनी हैं। आज विश्व पर्यटन दिवस - 26 के अवसर पर डॉ. सिंघल को इस अभिनंदन पत्र से सम्मानित कर हम सभी अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इस अवसर पर हाड़ोती के गणमान्य साहित्यकार बड़ी संख्या में मौजूद रहे।





