वंदेमातरम और डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार पर केंद्रित है यह फिल्म, 24-25 अक्टूबर को उज्जैन में आयोजित फिल्म फेस्टिवल में होगी स्क्रीनिंग

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और ‘वंदेमातरम’ से जुड़े उनके ऐतिहासिक संघर्ष पर आधारित एआई शॉर्ट फिल्म ‘वंदेमातरम और डॉ. हेडगेवार’ का चयन प्रतिष्ठित ‘उज्जैनी शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल' (सीजन-4) में स्क्रीनिंग के लिए किया गया है। इस फिल्म के निर्देशक एवं पटकथा लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. लोकेन्द्र सिंह हैं। फिल्म की कहानी ऐतिहासिक तथ्यों और संस्मरणों पर आधारित है, जो आज की युवा पीढ़ी में राष्ट्रभक्ति की अलख जगाती है। उल्लेखनीय है कि यह साल वंदेमातरम की रचना का 150वाँ वर्ष और आरएसएस का शताब्दी वर्ष है।

फिल्म की पटकथा दर्शकों को 1905 के बंग-भंग आंदोलन और ब्रिटिश हुकूमत द्वारा लागू किए गए कुख्यात ‘रिस्ले सर्कुलर’ के दौर में ले जाती है। कहानी दर्शाती है कि कैसे अंग्रेजी सरकार द्वारा ‘वंदेमातरम’ के उद्घोष पर पाबंदी लगाने के बावजूद, 1907 में नील सिटी हाईस्कूल नागपुर के एक 18-19 वर्षीय किशोर केशव बलिराम हेडगेवार ने ब्रिटिश स्कूल इंस्पेक्टर के स्वागत में पूरी कक्षा से गगनभेदी ‘वंदेमातरम’ का नारा लगवा दिया था।

फिल्म में 1908 के रामपायली (बालाघाट, मध्य प्रदेश) में दशहरे के अवसर पर युवा केशव के ओजस्वी भाषण ‘सीमोल्लंघन’, उनके खिलाफ चले राजद्रोह के मुकदमे और परिवार द्वारा झेले गए दमन को भी बेहद मार्मिक ढंग से रेखांकित किया गया है। इसके अलावा 1930 के यवतमाल जंगल सत्याग्रह के दौरान अकोला जेल यात्रा के समय रेलवे स्टेशनों पर उमड़ी जनमेदिनी और ‘वंदेमातरम’ की गूंज, तथा 1937 में प्रांतीय सरकारों के दौर में इस राष्ट्रगीत के सम्मान की रक्षा के लिए डॉ. हेडगेवार के दृढ़ संकल्प को प्रभावशाली दृश्यों व संगीत के माध्यम से जीवंत किया गया है।

देशभक्ति और ऐतिहासिक चेतना का सशक्त दस्तावेज :

फिल्म के निर्देशक लोकेन्द्र सिंह ने बताया कि ‘वंदेमातरम’ केवल एक गीत या नारा नहीं, बल्कि भारत की स्वाधीनता का बीज मंत्र और राष्ट्रीय चेतना की अमर ध्वनि है। डॉ. हेडगेवार का पूरा जीवन मातृभूमि की वंदना और इस मंत्र के सम्मान के लिए समर्पित रहा। यह लघु फिल्म दर्शकों को इतिहास के उन अनछुए और गौरवशाली पन्नों से रूबरू कराती है, जहाँ त्याग और राष्ट्रभक्ति सर्वोपरि थी। उन्होंने बताया कि यह उनकी पहली एआई फिल्म है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी उनकी फिल्में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में सराही जा चुकी हैं, जिनमें ‘बाचा : द राइजिंग विलेज’, ‘समिधा’, ‘गो-वर’ और ‘कद’ प्रमुख तौर पर शामिल हैं।