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हिन्दी प्रदेशों में उत्पादों की जानकारी हिन्दी में क्यों नहीं

माननीय श्री शिवराज जी
मुख्यमंत्री 
मध्यप्रदेश शासन

तीसरी बार प्रदेश की  कमान संभालने के लिए बधाई और शुभकामना।

महोदय,

मैं और मेरे जैसे लाखों लोग अंग्रेजी की असहनीय अतिशयता के प्रभाव स्वरूप हो रही भारतीय भाषाओं की दुर्दशा और तदॄजनित सांस्कृतिक पतन से दुखी और चिंतित हैं।  इसे रोकने के लिए तत्काल कुछ किए जाने की महती आवश्यकता है।
अपने इस कार्यकाल में अपनी राजभाषा को उसका वास्तविक स्थान दिलाने की दिशा में भी कुछ ठोस काम हो तो यह प्रदेश के लिए एक स्थायी सौगात होगी। कुछ कदम तो तत्काल उठाए जा सकते हैं, जैसे:- १-आप स्वयं तो हस्ताक्षर हिन्दी में ही करते हैं।  आपके मंत्री मंडल के सभी सदस्य भी हस्ताक्षर हिन्दी या अन्य किसी देशी भाषा में ही करें और इस बात को सगर्व मीडिया में प्रचारित भी किया जाए।

२- सभी शासकीय/अर्धशासकीय/अशासकीय निकायों/संस्थानों के अधिकारी/कर्मचा‍रियों को आपके द्वारा अपने हस्ताक्षर हिन्दी में करने के लिए प्रेरित किया जाए। यह कार्य शासकीय आदेश या मीडिया या दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। 
३-सभी शासकीय प्रारूप केवल हिन्दी में ही तैयार किए जाएं। सभी शासकीय कम्प्यूटर, लेपटॅाप, मोबाइल फोन, वेब साइट्स हिन्दी में ही संचालित हों। इससे हिन्दी न जानने वाले भी हिन्दी सीखने के लिए प्रेरित होंगे।
४- सभी शासकीय/अर्धशासकीय/अशाकीय निकायों/संस्थानों के नामपट केवल हिन्दी भाषा में ही बनें।
५-शासकीय आदेश या मीडिया के माध्यम से प्रदेश के दुकानदारों से दुकानों/संस्थानों के नामपट केवल हिन्दी में ही लगाने की अपील आपके द्वारा की जाए। इससे प्रदेश का चेहरा तो कम से कम अपना लगने लगेगा। अभी तो शहरों के बाजारों की भाषा देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे हम पुन: गुलाम हो गए हैं।
६-आपसे पूर्व शासनकाल में एक शासकीय आदेश के द्वारा भारतीय अंकों को हठात् शासकीय प्रणाली से बाहर कर दिया गया। वह आदेश निरस्त कर भारतीय अंको को पुनर्जीवित किया जाए। जिस देश ने विश्व को अंकग‍णित दिया, शून्य और दशमलव की सौगातें दी, उस देश के अंक मरने तो नहीं चाहिए ना।
७-प्रदेश में राजभाषा विभाग को अधिक सशक्त और साधन संपन्न बनाया जाए।  प्रदेश के सभी शासकीय विभागों और प्रदेश स्थित सभी केन्द्रिय विभागों को राजभाषा विभाग के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य किया जाए।
८-प्रदेश में हर स्तर पर शिक्षा का माध्यम हिन्दी ही हो जाए, अंग्रेजी केवल एक विषय के रूप में ही पढुाई जाए तो बहुत से बच्चे आत्महत्या करने से बचाए जा सकंगे।
 ९. मप्र में निर्मित होने वाले एवं बिकने वाले सभी उत्पादों पर उत्पाद की जानकारी, निर्माण तिथि, अवसान तिथि, उपयोग विधि की जानकारी हिन्दी में छापने का अनिवार्य नियम बनाया जाए.

हमारे प्रदेश के सभी लोग मुख्यत:हिन्दी में ही व्यवहार करते हैं। यदि संसदीय चुनाव से पूर्व उपरोक्त उपायों पर अमल हो सका तो निश्चित ही इसका फायदा आपकी पार्टी को भी मिलेगा। आप राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक बन जाएंगे। 

शीघ्र कार्यवाही की अपेक्षा के साथ

भवदीय
तुषार कोठारी
स्वभाषा अभियान
२०१-बी, गोपाल कृष्ण भवन, प्लाट -९८,
श्रीमद राजचंद्र मार्ग, तिलक रोड, घाटकोपर पूर्व, मुंबई -४०००७७.

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