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मीडिया विमर्श पत्रिका ने अपने प्रकाशन के 10 साल पूर्ण कर लिए हैं। पत्रिका ने अपने प्रत्येक अंक को विषयकेंद्रित करते हुए बेहद महत्वपूर्ण और शोधपरक सामग्री का प्रकाशन कर आप सबका प्यार और स्वीकृति पायी है। 11 वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर पत्रिका अपने वार्षिकांक का प्रकाशन कर रही है। इस का विषय है- राष्ट्रवाद और मीडिया। इस विषय पर हमारे मन में कुछ प्रश्न हैं, उनसे गुजरकर आप अपना लेख, विश्लेषण या अनुभव कथन भेज सकेगें तो यह सामग्री हमारे लिए उपयोगी होगी। ये कुछ विचार बिंदु हैं-
1. राष्ट्र, देश, राष्ट्रवाद यह सब पर्यायी हैं या इनमें कोई मूलभूत अंतर है?
2. देश प्रेम, देशभक्ति, राष्ट्रवादी यह सब भाषायी भेद हैं या इन शब्दों में अवधारणात्मक भेद है?
3. व्यक्ति से देश है या देश के कारण व्यक्ति है, दोनों के अंर्तसंबंध में महत्व किसे दिया जाना चाहिए?
4. वर्तमान बदलाव के संदर्भ में राष्ट्रवाद कितना प्रासंगिक है?
5. आपकी दृष्टि में राष्ट्रवाद क्या है?
6. टूटती भौगोलिक सीमाओं के बीच राष्ट्रवाद का क्या महत्व है?
7. कहा जाता है कि भारतीय राष्ट्रवाद पश्चिमी राष्ट्रवाद से भिन्न है, इस संदर्भ में भारतीय राष्ट्रवाद से आप क्या समझते हैं?
8. राष्ट्रीयता (Nationality), राष्ट्रवाद (Nationalism) और राष्ट्रत्व(Nationhood) के बीच आप किस तरह से अंतर करेंगें?
9. राष्ट्रवाद के केंद्र में व्यक्ति प्रधान होता है। लोकतंत्र में समूह तथा आमजन की प्रधानता है। देशहित में किसे महत्व दिया जाना चाहिए?
10. यूरोप, अफ्रीका, लतीनी अमरीका इत्यादि पश्चिमी देशों में राष्ट्रवाद समाप्त हो रहा है। ऐसे में भारत में राष्ट्रवाद का विकास सामासिक संस्कृति के विरोध में होगा, आपकी इस बारे में क्या राय है?
11. संस्कृति में पुरातनता तथा उसके जैविक विकास में लोगों का विकास तथा भलाई किसमें हो सकती है, कृपया स्पष्ट करें?
कृपया उक्त संदर्भों पर दृष्टि रखते हुए अपना लेख हमें 30 नवंबर,2016 तक भेज दें। इस हेतु हम आपके आभारी होगें।

संपर्क
संजय द्विवेदी
कार्यकारी संपादकः मीडिया विमर्श
फोनः09893598888
ई-मेलः [email protected]

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