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आप अपने मित्र बदल सकते हैं, पर दुर्भाग्य से पड़ोसी नहीं

भारत के पडोसी देश पाकिस्तान व चीन कभी अपनी हरकतों से बाज़ नही आ रहे है और न आने वाले है | भारत को अपने इन पड़ोसी मुल्कों की नापाक हरकतों का मुकाबला करने के लिए तो हर वक्त चौकस रहना ही होगा| भूतपूर्व प्रधानमंत्री श्रधेय श्री अटल बिहारी वाजेपयी जी अपने शासन काल में बार-बार कहा करते थे कि ‘आप अपने मित्र बदल सकते हैं, पर दुर्भाग्य से पड़ोसी नहीं|’ बात यहीं पर समाप्त नहीं होती. ये दोनों दुश्मन देश एक-दूसरे के घनिष्ठ मित्र भी हैं | ऐसे में देखना होगा इन नापाक देशों के मुकाबले प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन काल में पाकिस्तान व चीन के मुकाबले भारत कितना शक्तिशाली हुआ है |

यह ख़ुशी की बात है कि फ्रांस से खरीदे गए बेहद आधुनिक और शक्तिशाली 36 राफेल विमानों की पहली खेप भारत आ चुकी है| निश्चित रूप से राफेल लड़ाकू विमानों का भारत में आना हमारे सैन्य इतिहास में नए युग का श्रीगणेश है| इन बहुआयामी विमानों से वायुसेना की क्षमताओं में क्रांतिकारी बदलावआए हैं | राफेल विमान का उड़ान के दौरान प्रदर्शन श्रेष्ठ है| इसमें लगे हथियार, राडार एवं अन्य सेंसर तथा इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताएं लाजवाब माने जाते हैं|कहना न होगा राफेल के आने से भारतीय वायुसेना को बहुत ताकत मिली है| आप इसे यूं समझ सकते हैं कि हमारी रक्षा तैयारियां सही दिशा में है| इसलिए भगवान न करें कि अगर चीन के साथ युद्ध की नौबत आई, तो इस बार चीन के गले को दबा देने के पुख्ता इंतजाम भारतीय सेना के पास हैं. पर सवाल वही है कि क्या तब पाकिस्तान भी युद्ध में कूद पड़ेगा?

अगर हम पीछे मुड़कर देखें तो 1962 में चीन के साथ हुई जंग के समय पकिसतान भी उसके हक में लड़ना चाह रहा था| पर वहां शिखर स्तर पर इस बाबत कोई सर्वानुमति नहीं बनने के कारण वह मैदान में नहीं आया| उधर, पाकिस्तान ने भारत पर 1965, 1971 और फिर कारगिल में हमला बोला तो चीन भी तटस्थ ही रहा |वैसे उसने हमला तो 1948 में भी किया था|पर तब की दुनिया अलग थी| कहते हैं कि 1965 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान और उनके विदेश मंत्री जुल्फिकार भुट्टों को उम्मीद थी कि चीन उनके हक में आएगा, पर यह नहीं हुआ| पाकिस्तान ने कच्छ में अपनी नापाक हरकतें चालू कर दी थीं | पाकिस्तान के अदूरदर्शी सेना प्रमुख मूसा खान ने कच्छ् के बाद कश्मीर में घुसपैठ चालू कर दी| वो भारत को कच्छ और कश्मीर में एक साथ उलझाना चाहता था| लेकिन, भारतीय सेना ने उसकी कमर ही तोड़ दी|

भारतीय सेना के कब्जे से बहुत दूर नहीं था लाहौर. यानी कश्मीर पर कब्जा जमाने की चाहत रखने वाला पाकिस्तान लाहौर को ही खोने वाला था| भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से करीब आठ किलोमीटर दूरी पर स्थित हाजी पीर पास पर अपना कब्जा जमा लिया था| भारत ने 1971 की जंग में पाकिस्तान को तो दो फाड़ ही कर के रख दिया था और कारगिल में भी उसकी कसकर धुनाई की थी| इन दोनों मौकों पर चीन ने अपने मित्र के हक में भारत से पंगा लेने से बचना ही सही माना था| पाकिस्तान को जैसी उम्मीद थी कि भारत ने जब जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किया तो चीन उसके साथ रहा | इसलिए कहा जा रहा है कि अगर अब भारत का चीन से युद्ध हुआ तो पाकिस्तान उसके साथ खुलकर आ जाएगा| इस आशंका के आलोक में भारत को अपनी रक्षा तैयारियों को और चाक-चौबंद रखना होगा|

अशोक भाटिया, A /0 0 1 वेंचर अपार्टमेंट ,वसंत नगरी,वसई पूर्व ( जिला पालघर-401208) फोन- 9221232130

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