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अंबानी, अडानी और पतंजलि नहीं चलेंगे, विदेशी चलेंगे

अंबानी और अडानी जिस भी धंधे में गए उसमें उन्होंने सफलता के कीर्तिमान स्थापित किया लेकिन क्योंकि यह भारतीय हैं सिर्फ इसीलिए इन पर निशाना साधा जाता है

इसके पहले की तमाम विदेशी कंपनियों पर या उन सरकारी लालफीताशाही कंपनियों पर कोई कुछ नहीं कहता जिन्होंने हमें लूटा है और हम से हजारों गुना ज्यादा मुनाफा कमाया है

माना कि बीएसएनल सरकारी कंपनी थी लेकिन क्या हम उस दौर को फिर से वापस लाना चाहेंगे जब एक लैंडलाइन टेलिफोन कनेक्शन के लिए भी 10 साल तक इंतजार करना पड़ता था सिफारिशी लेटर देना पड़ता था और कुछ भी प्रॉब्लम होने पर लाइनमैन को बुलाने के लिए हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था और जब भी लाइनमैन आता था उसे बिना बख्शीस दिए काम नही होता था

क्या बीएसएनल सरकारी कर्मचारी थी तो जनता से मुनाफा नहीं लेती थी ??

जनता से पूरा पैसा वसूलने के बाद भी सरकारी आंकड़ों में यह कंपनियां घाटों में ही रहती थी क्योंकि भ्रष्टाचार का खुला लूट चलता था

क्या उस वक्त टेलीफोन विभाग द्वारा हमें बिल नहीं भेजा जाता था ? दुख यही है कि हमसे जबरदस्त मुनाफा लेने के बावजूद भी हमारे पैसे लालफीताशाही की भेंट चढ़ गए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए

मेरे एक रिश्तेदार उस वक्त टेलीकॉम विभाग में डीडीटी थे यानी डिप्टी डायरेक्टर टेलीकॉम थे जिस वक्त पूरे भारत में सिर्फ सरकारी सरकार की ही मोनोपोली थी कोई भी प्राइवेट टेलीकॉम ऑपरेटर नहीं था उन्होंने अपने गांव में भी तमाम सरकारी कर्मचारियों को अपने खेतों की देखभाल के लिए लगा रखा था उनके बेटी पत्नी या साली को भी अगर बाजार जाना होता था तब सरकारी जीप और ड्राइवर हमेशा हाजिर रहते थे वह जहां भी पोस्टेड रहते थे उनके बंगले के सामने डॉक्टर पुलिस अधिकारी से लेकर बड़े-बड़े उद्योगपति उनसे तमाम गिफ्ट लेकर मिलने आते थे ताकि यह उनके ऑफिस या घर पर लगने वाले टेलीफोन कनेक्शन को जल्दी से जल्दी मंजूरी दे दे

यहां तक की तमाम काम जैसे खंबे लगाना लाइन बिछाना इत्यादि के लिए भी जबरदस्त सेटिंग बाजी चलती थी

दरअसल यह वामपंथी और कांग्रेसी वही दौर फिर से देखना चाहते हैं यह नहीं चाहते कि प्रतिस्पर्धा हो

अभी तक भारत में पेप्सीको फूड कंपनी जो अमेरिका की है यूनीलीवर फ़ूड कारपोरेशन जो ब्रिटेन की है डेल मोंटे नेस्ले तथा मोनसेंटो जैसी तमाम विदेशी कंपनियों का दबदबा था

कांग्रेस राज में 60, 70, 80 और 90 के दशक में पूरे भारत में जगह-जगह इन विदेशी कंपनियों ने अपने गोडाउन बनाएं किसानों से तमाम अनाज आलू सब्जियां टमाटर इत्यादि खरीदने का एग्रीमेंट किया डेलमंटे कंपनी और किसान सॉस (यूनिलीवर) तो किसानों से एक रुपए किलो टमाटर खरीदती थी और उसे प्रोसेस करके उसका सॉस बनाकर एक बोतल में पैक कर कर ₹120 बोतल के रेट से बेचती है

क्या तब आपने कभी इन तमाम वामपंथी कांग्रेसी और दूसरे विपक्षी नेताओं को यह हंगामा मचाते देखा यह विदेशी कंपनियां कितना लूट मचा रही हैं ???

भारत में जब पेप्सीको ने आलू चिप्स में उतरने का फैसला किया तब यही कांग्रेसी और वामपंथी नेता कहते थे कि इससे देश में क्रांति आएगी.. हमको किसी को इन नेताओं ने यह नहीं बताया कि यह अमेरिका की पेप्सीको कंपनी ₹2 के आलू को चिप्स में बदलकर हमें ₹10 में क्यों बेच रही है

लेकिन आज जब गुजरात के राजकोट का एक ऐसा व्यक्ति जो मात्र एक दशक पहले सिनेमा हॉल में चिप्स के पैकेट बेचा करता था उसने जब बालाजी वेफर्स लिमिटेड नामक बड़ा एंपायर खड़ा कर दिया तब इन कांग्रेसी कुत्तों के पेट में मरोड़ उठने लगा कि आखिर यह भारतीय लोग इन विदेशी कंपनियों को क्यों चैलेंज कर रहे हैं ? क्यों अंबानी और अडानी अपने गोदाम बना रहे हैं?

यानी जब तक पेप्सीको डेलमंटे युनिलीवर नेस्ले जैसी कंपनियां इस धंधे में थी तब इन्हें पीड़ा नहीं हुई लेकिन इन्हें पीड़ा यह हो रही है कि राजकोट के एक मजदूर का बेटा जो बालाजी वेफर का मालिक है या फिर अंबानी जो कभी भजिया बेचता था या अडानी जो कभी हीरे की दुकान पर नौकरी करता था यह लोग क्यों इतना आगे बढ़ रहे हैं

अभी 6 साल पहले की केरल की एक है थम्सअप कंपनी ने केरल के एक ऐसे एरिया में अपना बॉटलिंग प्लांट लगाया था जिस पूरे एरिया में पहले से ही पानी की कमी थी। थम्सअप कंपनी ने वहां पर जमीन में सैकड़ो मीटर गहराई पर बेहद शक्तिशाली सबमर्सिबल पंप लगाए और पानी का इतना दोहन किया आसपास की पूरी जमीन बंजर होने लगी और आसपास की तमाम जमीनों खेती के लिए नहीं रही उस पूरे इलाके के किसानों ने आंदोलन किया तब किसी केरल की वामपंथी सरकार ने गोलीबारी किया था जिसमें 4 किसानों की मौत हुई थी

बाद में जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट गया तब सुप्रीम कोर्ट खुद चौक गया और सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा की जनता के फायदे का वायदा करके सत्ता में आने वाली पार्टियां आखिर इतना निष्ठुर कैसे हो सकती हैं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कोका कोला कंपनी के उस बॉटलिंग प्लांट को बंद करवाया गया

उस वक्त केरल में बारी बारी से कभी कांग्रेस तो कभी लिफ्ट सत्ता में थी और दोनों ने थम्सअप कंपनी के तरफ से 6 साल तक मुकदमा लड़ा

तब कांग्रेसी कुत्तों ने यह सवाल नहीं उठाया कि हमारा ही पानी बोतल में पैक करके यह कंपनियां हमें ₹15 में बेच रही हैं ???

अंत में संक्षेप में आप सच्चाई यह समझ लीजिए अब हम भारतीय जिसका सरनेम यह तो अंबानी है अडानी है या कोई राजकोट का एक मजदूर जो दिलीप भाई है या फिर कई छोटे-छोटे भारतीयों की सहकारी समितियां जब बिजनेस में उतरने लगी तब इन विदेशी कंपनियों को बहुत तकलीफ हो रही है और इन विदेशी कंपनियों ने अपने एजेंटों और दल्लो को सक्रिय कर दिया है

गुजरात में जब त्रिभुवन भाई पटेल के नेतृत्व में किसानों ने अपना खुद का मिल्क यूनियन बनाकर दूध का व्यापार करने का सोचा था तब उन्हें भी खत्म करने के लिए कई विदेशी कंपनियों ने पूरी ताकत लगा दी थी। यहां तक की सरकार भी त्रिभुवन भाई को रोकने की कोशिश करने लगी थी लेकिन सरदार वल्लभभाई पटेल की वजह से कांग्रेस अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाई और आज अमूल नामक एक ब्रांड बना जो पूरी दुनिया में एक ताकतवर ब्रांड है

दरअसल विदेशी कंपनियों को यही डर सता रहा है कि यदि भारत में दो चार चिप्स बनाने वाले खड़े हो गए टोमेटो सॉस बनाने वाले खड़े हो गए तो उनकी लूट खत्म हो जाएगी उनकी मोनोपोली खत्म हो जाएगी इसलिए यह जो किसान बैठे हैं यह किसान नहीं है यह दलाल है

यह असली किसान तब होते यदि इन्होंने पंजाब में उस वक्त आंदोलन किया होता जब कांग्रेस सरकार ने पंजाब में पेप्सीको युनिलीवर नेस्ले और डेलमोंटे को गोदाम बनाने का आदेश दिया था लेकिन तब यह दोगले चुप थे

अभी कल ही मैं एक किसान नेता का भाषण सुन रहा था वह पतंजलि के आटे का पैकेट दिखाकर भोले-भाले किसानों से कह रहा था यह देखो यह कनिया बाबा हमसे ₹10 किलो गेहूं खरीदा है और उसे पैक करके ₹40 किलो बेचता है

इन दोगलो को कभी यह तकलीफ नहीं हुई यूनीलीवर तो पहले से ही आटा पैक करके बेच रही है क्या वह मुफत में बेच रही है ? लेकिन इनके पेट में यही दर्द हो रहा है कि एक किसान परिवार का बेटा जो एक पिछड़ी जाति यानी यादव में पैदा हुआ उसने अपना बिजनेस एंपायर कैसे खड़ा कर लिया उसने कोलगेट और नेस्ले को कैसे चुनौती दे दिया

आपको याद होगा कुछ समय पहले वामपंथी नेता वृंदा करात ने पतंजलि के तमाम प्रोडक्ट को एक लैब में टेस्ट के लिए भेजा था और यह कह कर हंगामा मचा दिया कि इसमें हड्डियों के चूरे मिले हैं जबकि सच्चाई यह थी कि उसमें किसी भी हड्डी का चूरा नहीं था

आज तक नेस्ले कॉलगेट पामोलिव हिंदुस्तान युनिलीवर प्रोक्टर एंड गैंबल किस रेट में बेच रही है क्या बेच रही है क्या मिलाकर बेच रही है इसकी जांच कभी इन वामपंथी कुत्तों ने कभी क्यो नहीं करवाई ?

बस तकलीफ यही है कि कोई अंबानी कोई अदानी कोई त्रिभुवनदास पटेल कोई दिलीप भाई कोई रामदेव यादव अपना बिजनेस एंपायर क्यों खड़ा कर रहा है

राफेल का झूठ फेल हो गया नागरिकता कानून का झूठ फेल हो गया तो अब एक नया झूठ को पैक करके दलालों के माध्यम से हमारे सामने परोसा जा रहा है

और एक महत्वपूर्ण जानकारी में आपको दे रहा हूं अब तक जब हम बीमार होते थे तब जो ग्लूकोस पिया करते थे उस ग्लूकोस में अमेरिका की एक ही कंपनी हाइंज की पूरी दुनिया में मोनोपोली थी छोटा सा पैकेट ₹50 में बिकता था किसी भी कांग्रेसी कुत्ते ने यह सवाल नहीं उठाया कि आखिर इस छोटे से डिब्बे में ऐसा क्या इस अमेरिकी कंपनी हाइंज ने भरा हुआ है यह हमें ₹50 में बेच रही है

उसके बाद 90 के दशक में अहमदाबाद के ही दो गुज्जूभाई एक ने अनिल स्टार्च लिमिटेड नामक कंपनी बनाई और दूसरे ने मेज प्रोडक्ट इंडिया लिमिटेड नामक कंपनी बनाई और जब वह इस धंधे में उतरे तब उन्होंने पूरी दुनिया से ग्लूकोज और स्टार्च के बिजनेस में हाइन्ज और नेस्ले को बहुत पीछे ढकेल दिया आज हाइंज कंपनी इनके सामने कुछ नहीं है जबकि हाइंज कंपनी एक जमाने में क्या थी वह आप गूगल पर सर्च करिए

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