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दर्शनी प्रिय
 

  • चलो रे डोली उठाओ कहार

    चलो रे डोली उठाओ कहार

    बदलते वक्त के साथ डोली और कहार दोनो गायब हो गए।इस धंधे से जुड़े लोग जमाने के अनुरूप अपना व्यवसाय भी बदल चुके हैं। जाहिर है मेहनत मशक्कत के इस काम में श्रम ज्यादा और आमदनी कम रह गई थी।सो बदलाव लाजिमी था।

  • कहाँ ठहर गई जनमासे की रीत

    कहाँ ठहर गई जनमासे की रीत

    विडंबना है रीतों के ये बीज उपेक्षा की दंश से अब सूखने लगे है। पूरे मनोयोग से सींची गई इसकी जड़े भौतिकता की मार से ज़मीन छोड़ने लगी है। रवायतों के इन वृक्षों को फिर से सींचना होगा। बेशक बड़े और व्यापक रूप में न सही व्यवहार्य और प्रासंगिक रूप में ही इनका परिवर्धन और संवर्द्धन जरुरी है।

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