मुंबई। चित्रनगरी संवाद मंच में 'देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर' इसी परिपाटी पर चलते हुए पुणे से पधारीं चर्चित व्यंग्यकार समीक्षा तैलंग ने जब अपना लघु व्यंग्य लेख 'कॉकरोच: एक अनुरागी सेवक' पेश किया तो श्रोता समुदाय से उसे भरपूर सराहना मिली। समीक्षा ने हँसते मुस्कराते जिस आत्म विश्वास के साथ अपना मनोगत पेश किया उसे भी ख़ूब सराहा गया। समीक्षा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहाँ भी ग़लत हो वहाँ क़लम चलाना ज़रूरी है। उन्होंने कहा - "कोई संस्था हो या व्यवस्था, मैं किसी से नहीं डरती और सबके ऊपर व्यंग्य प्रहार करती हूँ।"
रविवार 19 अप्रैल 2026 को 'चित्रनगरी संवाद मंच, मुंबई' की ओर से 'केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट', गोरेगांव में आयोजित कार्यक्रम में समीक्षा तैलंग के व्यंग्य संग्रह 'बेड़ा ग़र्क है' पर चर्चा हुई। प्रतिष्ठित व्यंग्यकार सूर्यबाला ने अपने संदेश में कहा - "समीक्षा के पास अपनी दृष्टि, भाषा और शैली है, जिसके दम पर उन्होंने एक व्यंग्यकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
'व्यंग्य यात्रा' के संपादक प्रेम जन्मेजय का लिखित वक्तव्य मधुबाला शुक्ला ने पेश किया। प्रेम जनमेजय ने रवीन्द्र नाथ त्यागी की परंपरा में समीक्षा तैलंग को एक समर्थ व्यंग्यकार बताते हुए कहा-" वे अपनी बेबाक भाषा शैली के कारण अपनी व्यंग्य रचनाओं में ही नहीं बल्कि व्यंग्य आलोचना में भी अपनी बात निर्भीकता से कहती हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को चौंकाने की बजाय सहज रचना यात्रा पर ले जाने वाली सहयात्री बनती हैं। समीक्षा की प्रखर सोच परंपरागत विषयों से अलग हटकर है। व्यंग्य के लिए आवश्यक भाषा और कहन उन्हें युवा व्यंग्यकारों की भीड़ में अलग करता है।
#धरोहर के अंतर्गत शायर देवमणि पांडेय ने मज़ाहिया शायरों के कलाम पेश किए। इनमें साग़र ख़य्यामी, दिलावर फ़िगार, ख़ामख़ां हैदराबादी, आफ़ताब लखनवी, इर्तिजा निशात जैसे लोकप्रिय शायर शामिल थे। हमेशा की तरह अभिनेता सोनू पाहुजा ने असरदार अंदाज़ में शरद जोशी का व्यंग्य लेख 'नेतृत्व की ताक़त सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
' अगले जनम मोहे किताब ही कीजो' इस रोचक व्यंग्य लेख के ज़रिए संचालक सुभाष काबरा ने रचना पाठ का शुभारंभ किया। हरि मृदुल ने अपना वह चर्चित व्यंग्य लेख 'अतिथि कब बतियावोगे' सुनाया जिसे हाल ही में केरल के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। दमयंती दीपा ने हास्य गीत, के पी सक्सेना दूसरे ने दोहे और विवेक अग्रवाल ने लघु व्यंग्य कविताओं के पाठ से माहौल को मनोरंजक बना दिया। अपने वृत्त चित्र के लिए लखनऊ में प्रथम पुरस्कार पाने वाले अभिनेता अरुण शेखर को बधाई दी गई। शायर देवमणि पांडेय के ग़ज़ल पाठ से कार्यक्रम का समापन हुआ।
माहौल बहुत जीवंत था। आप कार्यक्रम की गरिमा का अंदाज़ा इसी बात से लगा सकते हैं कि सुप्रसिद्ध अभिनेत्री कथाकार विभा रानी, शायर नरोत्तम शर्मा, प्रोफ़ेसर रामबक्ष, बहुभाषी शायर नवीन सी चतुर्वेदी, शायर गुलशन मदान, शायर क़मर हाजीपुरी, कवि राजीव रोहित और शायर राजेश ऋतुपर्ण हॉल में मौजूद थे।
साभार- https://www.facebook.com/csmanchs से





