कोलकाता से एक शुभ समाचार आ रहा है. सड़कों पर नमाज़ पढ़ने को रोक दिया है. कुछ साल पहले हरियाणा के गुड़गांव में सड़कों और पार्को में नमाज पढ़ने वालों की भीड़ जुटने लगी थी. स्थानीय निवासियों ने बहुत कठिनाई से इसे बन्द करवाया.
कुछ साल पहले सूचना आई कि दक्षिण भारत में 1500 साल पुराने मन्दिर को ही वक्फ की सम्पत्ति घोषित कर दिया गया। सत्य यह है कि 1500 साल पहले इस्लाम था ही नहीं।
पुरे भारत में अनेक मस्जिद पीर की मजार, दरगाह और ईदगाह मिल जाएंगी जो रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड या मुख्य सड़क की जगह को घेर कर पिछले 75 साल मे बनाई गई हैं। यदि भारत के कानून का धर्म या मजहब से कुछ लेना देना नहीं है तो फिर इस तरह के मन्दिर मस्जिद हटाने चाहिएं.मजारों और मस्जिदों के लिए नियम बदल दिए जाते हैं. यह एक तरफा सेक्युलरिज्म बेहद खतरनाक है.
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सऊदी अरब जैसे देश में सड़कें इत्यादि बनवाने के लिए खुलेआम मस्जिद तुड़वाया जाता है। एक बार सऊदी अरब के सुल्तान को अपना महल बनाना था उसके लिए उसे जगह चाहिए थी तो उसने कहा कि .... बिलाल.मस्जिद को तोड़ डालो, महल बनाने के लिए..।
इस मस्जिद में पैगम्बर मुहम्मद नमाज पढ़ते थे ..!
जब सऊदी अरब में ""पैगम्बर मुहम्मद के मस्जिद"" को तोड़कर दूसरी जगह बनवाया जा सकता है तो भारत मे क्यों सेक्युलरिज़्म के नाम पर कब्जे हो रहे हैं?
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मुज़फ़्फ़रपुर रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म न.4पर बनी जीन्नात(जीन्न) मस्जिद है। कहतें है ये मस्जिद रातों रात बना मिला था। प्लेटफार्म न. 4 पर L शेप मे ट्रेक बना है और ट्रेन घुम कर स्टेशन पंहुचती है? मुस्लिम आबादी यहां से कम से कम 1.5 कि.मी दुर है।इस मस्जिद के आसपास कोई बस्ती/मोहल्ला नही है जहां के लोग सदा यहां नमाज पढ़ते हो।पर सुबह 4 बजे तक के भी नमाज मे मस्जिद भड़ी रहती है।
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फरवरी 2018 मे मुजफ्फरनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनी मस्जिद हटाई गई। इसके लिए एक फ्लाई ओवर का का निर्माण 10 साल से रुका हुआ था। उसके कारण सड़क एक्सीडेंट मे लगभग 80 मौते हो चुकी थी। इस मस्जिद की वजह से हाईवे पर रेलवे लाइन के ऊपर बना फ्लाईओवर अधर में था। इसके लिए सरकार को 35 लाख रुपए मुआवजा देना पड़ा था।
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इन्दिरा गांधी हवाई अड्डा -हवाई अड्डे के टी-2 रनवे नं 10 व 28 पर बनी पीर रोशन खान व काले खान की मजार का रख-रखाव ही नहीं मुस्लिम श्रद्धालुओं को वहां दर्शन कराने के लिए जी.एम.आर. कंपनी अपने वाहन व अन्य सुविधाएं देती है मजारों के कारण रनवे को 'शिफ्ट' किया गया। इसी के विपरीत यहाँ बने हिन्दू पूजा स्थल जो इन गाँवों के निवासियों के पूर्वजों के स्मृतिस्थल थे उनके आने जाने के रास्ते बन्द कर दिए गए।




