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रेमडेसिविर का खेल : एक दिलचस्प तथ्य जो शायद सभी को जानना आवश्यक है

कोरोना एक ऐसी बीमारी है, जिसकी दवा अभी तक नहीं बनी, पर उसमें सबसे ज्यादा बिकने वाली दवा रेमेडिसिवर सिप्ला कंपनी बनाती है जो की साल्ट नेम है ब्रांड नहीं, कमाल की बात है इस बार साल्ट ने ब्रांड को मात दी, इस सुनियोजित खेला में साल्ट इतना महंगा मिल रहा है और ब्रांडेड सस्ता।

दवाओं की जानकारी रखने वाले सभी जानते हैं, की किसी भी दवा में मौजूद दवाई का नाम उसका साल्ट नेम कहा जाता है, केमिस्ट्री के हिसाब से, और उसका बिकने वाला नाम ब्रांड नेम कहते हैं।

जैसे नमक किसी भी कंपनी का हो पर उसके ब्रांड के हिसाब से हम खरीदते हैं, जैसे टाटा नमक या अन्नपूर्णा नमक, शक्तिभोग नमक, पतंजलि नमक या फिर वागभट नमक।

तो इसी रेमेडिसिवर सॉल्ट का एक ब्रांड है रेमडेक जो की कैडिला कंपनी (Zydus Cadilla) बनाती है जिसके मालिक एक गुजराती हिन्दू हैं, जिनका नाम है रमनभाई बी पटेल..

अभी हमारे और आपके सोचने वाली बात ये है की जब रेमडेक और रेमिडिसिवर का सॉल्ट एक ही है, तो डॉक्टर केवल रेमिडिसिवर क्यों लिख रहे हैं, वो भी धड़ल्ले से जैसे ये कोरोना का इलाज हो?

और डॉक्टर रेमडेक क्यों नहीं लिख रहे, जब वो जानते हैं की ये केवल 2800/- रुपए की है, और रेमिडिसिवर एक एक इंजेक्शन 50000 से एक लाख में बिक रहा है, फिर मार्केट में इसकी इतनी डिमांड क्यों और कैसे बनाई गई की नकली बिकने लगे और कौन सा इंजेक्शन 50000 से 1 लाख रुपए में आता है, इसको बेचने वाले को पकड़वाया क्यों नहीं गया, मतलब साफ है, ये बहुत घटिया खेला खेला जा रहा है

कैरियर की शुरुआत में दवा कंपनियों में काम करने का अनुभव, और दवाओं को प्रेस्क्राइब करने के पीछे डॉक्टर, दवा कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर का नेक्सस पहले से पता होने के बाद जब इसकी तह में जाना शुरू किया तो पता चला की आखिर रेमडेक क्यों नहीं लिख रहे, जबकि इसकी उपलब्धता भी है, और कैडिला की दवा मार्केट में अपनी बड़ी साख है।

आप भी सोचिए की आखिर क्यों अस्पताल व अन्य चिकित्सीय कमेटियों में बैठे हुए विशेष लोगों ने सिप्ला की रेमिडिसिवर को प्रमोट किया जिसकी शुरुआत ही ये कह कर की गई थी की ये सस्ती जेनेरिक दवाएं बनाएगी ताकि गरीबों का इलाज हो सके, और पश्चिमी ब्रांडेड कंपनियों का नेक्सस तोड़ सके, आज ये खरबों रुपए की कंपनित है और अभी जबकि इसकी दवा रेमडेसिवर को कोरोना के इलाज के लिए कोई अप्रूवल तक नहीं मिला फिर भी डॉक्टर सिर्फ इसी को लाने की जिद पर अड़ता है… मतलब कोई तो है जो डॉक्टर का कट उस तक पहुंचा रहा है?

आखिर कैसे सरकार की नाक के नीचे ये एक ऐसा घटिया खेल शुरू हुआ है जिसने हजारों नहीं लाखों लोगों की जान ली होगी…?

सरकार को ध्यान देना चाहिए बड़ी कहानी है, बड़ा खेल है, बस इसकी कड़ी नहीं मिल रही, क्योंकि हमारे पास सरकार जितने संसाधन नहीं हैं, की हर मामले की कड़ी ढूंढी जा सके, पर मीडिया तो कर सकता है, अनुभव भी है, और आंख, नाक, कान, खुले भी हैं।”

*जागरूक बनें, स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें..

प्रवीण शर्मा के फेसबुक वाल से

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