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हिंदू आस्था के खिलाफ वामपंथी मकड़जाल

कुछ वर्ष पूर्व (2018 में) केरल में पैदा हुए और कर्नाटक में रहने वाले ‘करण आचार्य’ ने “क्रोधित हनुमान” की एक पेंटिंग बनाई थी, अचानक यह पेंटिंग देश भर में सुर्खियों में आ गया था।
OLA-UBER समेत निजी वाहन वाले हनुमान जी की इस तस्वीर को अपने-अपने कारों के ऊपर लगाने लग गये।

इन बातों से हिन्दू द्वेषी मीडिया व अन्य जमात वालों के सीने पर सांस लोटने लगे। “द वायर” आदि जमातों ने बजरंगबली को निशाने पर लेते हुए कई लेख लिखें। अगर आप पढ़ने-लिखने में रुचि रखते हैं तो आपको यह भी याद होगा कि काफी पहले ‘हंस’ पत्रिका के संपादक ‘राजेन्द्र यादव’ में यही हरकत की थी और हनुमान जी को “मानव-सभ्यता का पहला आतंकवादी” बताया था।
सुनेत्रा चौधरी नाम की एक वामपंथी महिला ने कुछ साल पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर स्थापित पाञ्चजन्य शंख के स्टेचू पर अभद्र शब्दों में ट्वीट किया कि ये शँख कारपेट से भी घिनौना लग रहा है प्लीज इसे हटाइए… कुछ ही देर में स्वाति चतुर्वेदी नाम की दूसरी वामपन्थी महिला आकर सुनेत्रा के ट्वीट का समर्थन करती है…

2 नवम्बर 2014 को केरल के मरीन ड्राइव तट पर एक वामपन्थी एक्टिविस्ट कपल ने किस ऑफ लव का आयोजन किया था… ये आयोज़न शिवसेना बजरंग दल जैसे दलों के सार्वजनिक स्थानों पर अश्लीलता रोकने के विरोध में हुआ था… इस आयोजन में केरल के कई बड़े कॉलेजों के छात्र छत्राओं ने भी भाग लिया था… इस आयोजन का आव्हान एक फेसबुक पेज ‘किस ऑफ लव’ बनाकर उसके माध्यम से किया गया था जिसके ऑर्गेनाइज़र थे दो वामपन्थी एक्टिविस्ट रेशमी नैयर और उसका पार्टनर राहुल पाशुपलन… केरला में किस ऑफ लव के पूरे आयोजन का प्रचार और हिंदी भाषी प्रदेशों में इसका लाइव टेलीकास्ट किया था एक बड़े मीडिया प्लेटफार्म NDTV नें… इसके बाद रश्मि नैयर का इंटव्यू NDTV में आया और ये वामपन्थी एक्टिविस्ट राष्ट्रीय हस्ती बन गई…

खैर, इस आयोजन के छः महीने बाद केरल पुलिस के एक तेज़ तर्रार अधिकारी एस श्रीजीत की अगुवाई में एक अंडकवर ऑपरेशन बिग डैडी शुरू हुआ… ये स्पेशल ऑपरेशन ऑनलाईन देह व्यापार और मानव तस्करी के अपराधियों को पकड़ने के लिए शुरू किया था… थोड़े समय बाद ही केरल पुलिस की इस स्पेशल टीम के हाथ एक बड़ी कामयाबी लगी जब उन्होंने अकबर नाम के एक व्यक्ति को एक छः वर्षीय बच्ची के साथ गिरफ्तार कर लिया… उसकी निशानदेही पर बंगलोर की एक महिला लिनीस मैथ्यू को एक 9 साल की बच्ची के साथ गिरफ्तार कर लिया गया… दोनों ही बच्चियाँ मुस्लिम समुदाय से थी, उनसे ज़बरन देह व्यापार कराया जा रहा था ।

सरगना की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने जाल बिछाया और दो पुलिस अधिकारियों ने अकबर के माध्यम से व्यापारी बन कर देह व्यापार के इस अंतरराज्यीय गिरोह से सम्पर्क किया और लड़कियों की डिमांड की… सरगना ने उन्हें अड्डे पर बुलाया और स्पेशल टीम ने वहां से पांच लड़कियों के साथ सरगना को धर दबोचा… पांचों लड़कियों झांसा देकर तस्करी के जरिए देह व्यापार के लिए लाई गई थी जिन्हें पुलिस ने उन दोनों बच्चियों सहित काउंसलिंग के बाद उनके घर भेज दिया… मानव तस्करी, देह व्यापार और नाबालिग बच्चियों की सप्लाई करने वाले इस अंतरराज्यीय गिरोह की सरगना थी किस ऑफ लव एक्टिविस्ट रेशमी नैयर… रेशमी नैयर खुद भी अपना जिस्म बेचती थी जिसके बदले वो ग्राहक से एक रात के 60000 रूपए तक वसूलती थी…
नवम्बर 2015 में रेशमी नैयर सहित 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया… आरोपियों में 6 लोग एक सीक्रेट फेसबुक ग्रुप ‘कोचुसुन्दरिकल’ के एक्टिव मेम्बर थे… इसी ग्रुप के माध्यम से कॉलेज की स्टूडेंट्स लड़कियों को पहले वामपन्थी विचारधारा से किरन्तिकारी बनाया जाता था फिर आज़ादी और फेक फेमिनिज़्म की घुट्टी पिलाकर मॉडलिंग या बोलीवुड में कैरियर बनाने के नाम पर फंसाया जाता था… ये सीक्रेट ग्रुप फेसबुक पेज ‘किस ऑफ लव’ से सम्बध्द था।

आपने कभी सोचा है कि बजरंगबली से इन जमातों के चिढ़ने की वजह क्या है? क्यों बजरंग बली की उस मनभावन पेंटिंग को ये ‘ब्रेकिंग इंडिया फोर्सेस’ “मिलिटेंट हनुमान” कहने लगें?
आख़िर हनुमान जी से इनके चिढ़ने की वजह क्या है? वजह है कि :-
“बजरंग बली” के उज्ज्वल चरित्र और कृतित्व से सम्पूर्ण भारतवर्ष न जाने कितने सदियों से प्रेरणा लेता आया है।
हनुमान प्रतीक हैं उस स्वाभिमान” के जिन्होंने ‘बाली’ जैसे महापराक्रमी परंतु अधम शासक के साथ रहने की बजाए ‘बाली’ के अनाचार से संतप्त ‘सुग्रीव’ के साथ रहना स्वीकार किया था ताकि दुनिया के सामने यह आदर्श स्थापित हो कि सत्य और न्याय के साथ खड़ा होना ही धर्म है।
हनुमान प्रतीक हैं उस “स्वामी-भक्ति” और “राज-भक्ति” के जिन्हें उस समय के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य के प्रतिनिधि प्रभु श्रीराम का सानिध्य प्राप्त था परंतु उन्होंने अपने स्वामी सुग्रीव का साथ नहीं छोड़ा और उनके प्रति उनकी राजभक्ति असंदिग्ध रही।
हनुमान प्रतीक हैं उस “अनुशासन और प्रोटोकॉल” के जिसका अनुपालन उन्होंने अपने जीवन में हर क्षण किया जबकि ‘हनुमान’ विरोधियों को अनुशासनहीन समाज पसंद है।
हनुमान प्रतीक हैं उस पौरुष के जिसका स्वामी ‘बाली’ जब अधम होकर एक स्त्री पर कुदृष्टि डालने लगा तो उन्होंने उसे सहन नहीं किया और बाली का साथ छोड़ने में एक पल भी नहीं लगाया।
हनुमान प्रतीक हैं स्त्री रक्षण के प्रति उस कर्तव्य के जो किसी और की स्त्री के सम्मान की रक्षा के लिए भी निडर-बेखौफ होकर उस समय के सबसे शक्तिशाली शासक को चुनौती देने उसके राज्य में घुस जाते हैं।
हनुमान प्रतीक हैं उस ‘चातुर्य और निडरता’ के जिनकी वाणी के ओज ने श्री राम को भी मंत्रमुग्ध कर दिया था।

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