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पर्यटकों का रुख अब कोटा की ओर……..

कोटा को यहां के हेरिटेज सम्पदा के बल पर देश – विदेश के पर्यटकों को लुभाने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटकों के मर्म को समझा गया है। खास कर विदेशी पर्यटकों भारत में देश की हेरिटेज देखने में विशेष रुचि लेते हैं। कोटा विगत से रियासत कालीन ऐतिहासिक शहर है जो खूबसूरत चम्बल नदी के किनारे कई विशेषताओं की वजह से देश की शान है। आज तक पर्यटकों से दूर रहा कोटा अब आने वाले समय में किए जा रहे भागीरथी प्रयासों से पर्यटकों की चहल – कदमी से आबाद होगा ऐसा विश्वास किया जा रहा है।

नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल जी जिस प्रकार विभिन्न पर्यटन विकास और सम्बन्धित कार्यों से कोटा को पर्यटन मानचित्र पर चमकाने में पूरी शक्ति और सक्रियता से लगे हैं और जो कुछ अपने पूर्व कार्यकाल में किया था वह सब मिलकर पर्यटकों को आकर्षित करने का प्रबल माध्यम बनेंगे इसमें कोई संदेह नहीं है।

किशोर सागर के किनारे सेवन वंडर पार्क के बाद सबसे बड़ा आकर्षण होगा चंबल रिवर फ्रंट। कोटा के परकोटे के प्राचीन विशाल दरवाजों सहित तालाब के बीच जग मन्दिर महल, संग्रहालय , कोटा कॉलेज जैसे अन्य भवनों का लौटता प्राचीन वैभव, बाजारों , चौराहों, फ्लाई ओवर और अंडर पास व अन्य मार्गो को मिलता हेरिटेज लुक, उद्यानों को मिलता ऑक्सिजोन पार्क का स्वरूप जैसी अनेक परिकल्पनाएं और रात्रि में विद्युत आलोक की सतरंगी छटा लिए चौराहे पर्यटन विकास में मील का पत्थर बनेंगी।

शहर में निर्बाध यातायात के लिए सिग्नल फ्री रोड, पशु मुक्त शहर, बहु मंजिली पार्किंग, लंबे – लंबे फ्लाई ओवर भी शहर के आधारभूत ढांचे को पर्यटन विकास के अनुकूल बना रहे हैं। कोटा में चंबल नदी होने से हमेशा पर्यटन विशेषज्ञ कहते थे कोटा में चम्बल ही पर्यटन विकास का मुख्य आधार बनेगी। करोड़ों की लागत से कुछ ही महीनों में पूर्ण होने वाला चंबल रिवर फ्रंट इसी विचार की सबसे सबल क्रियान्विति के रूप में सामने आएगा। धारीवाल के इस प्रयास से पर्यटन प्रेमियों का सपना भी साकार रूप लगा। इसे देश का सबसे बड़े और आकर्षक रिवर फ्रंट का रूप दिया जा रहा है। जब यह पूर्ण हो जाएगा और पर्यटक यहां आएंगे तो उनके लिए यह अद्भुत, विस्मयकारी, चमत्कृत करने वाला देश का महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल होगा।

पर्यटन के प्रति धारीवाल जी की गहरी रुचि का अहसास उस समय हुआ जब वे पिछले मंत्रित्व काल में कुछ समय के लिए कला, संस्कृति और पर्यटन विभाग के मंत्री बने थे और कोटा में आरएसी कार्यालय के पीछे चम्बल नदी पर यादगार चंबल उत्सव का आयोजन करवाया था। चुनाव की आचार्य संहिता लगने से उन्होंने भी आम दर्शक की तरह ही इसका लुत्फ लिया था। उस भव्य आयोजन की चर्चा उस समय पूरे राज्य में रही।

उस समय मैंने महसूस किया था कि अगर इन्हें पर्यटन विभाग का चार्ज मिल जाए तो पता नहीं कोटा यह कितना कुछ करें। परन्तु उस समय जो अहसास मुझे हुआ वह आज ये नगरीय विकास मंत्री के रूप में पूरा कर रहे हैं और जिस प्रकार जी जान से जुटे हैं किसी से छुपा नहीं हैं।

शहरवासियों ही नहीं कोटा आने वालों की जुबान पर भी है कोटा के विकास कार्य। कुछ कार्यों से तो शहरवासी लाभ उठाने लगे हैं और वह दिन अब दूर नहीं जब इन सब कार्यों का लाभ नागरिकों को मिलेगा और कोटा में पर्यटकों का आगमन होने से यहां पर्यटन सम्बन्धी गतिविधियां नजर आएंगी और कई लोगों के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।

(लेखक कोटा में रहते हैं व पर्यटन से लेकर सामाजिक व ऐतिहासिक विषयों पर निरंतर लिखते रहते हैं)

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