मुंबई। चित्रनगरी सम्वाद मंच मुम्बई की ओर से रविवार 9 अगस्त 2026 को केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट गोरेगांव के मृणालताई हॉल में आयोजित एक विशिष्ट साहित्यिक आयोजन में पिंगलाचार्य आर.पी. शर्मा 'महर्षि' के अवदान पर आधारित पुस्तक 'हिंदी ग़ज़ल विन्यास' पर चर्चा हुई। पुस्तक के लेखक डॉ. रमाकांत शर्मा ने अपने आत्मकथ्य में अपने पिता महर्षि के जीवन के कई महत्वपूर्ण प्रसंग साझा किए। उन्होंने बताया कि महर्षि ने उर्दू के इल्मे अरूज़ का हिंदीकरण किया तथा बहरों के हिंदी में पूर्णिमा, मिलन यामिनी जैसे रोचक नाम रखे। इसी तरह उन्होंने अरकान का भी नामकरण किया। मसलन 'फ़ऊलुन' को उन्होंने हिंदी में 'तपोवन' नाम दिया।
पुस्तक पर अपना मंतव्य पेश करते हुए बहुभाषी शायर नवीन सी चतुर्वेदी ने स्वीकार किया कि ग़ज़ल की प्रचलित 32 बहरों की कला उन्होंने महर्षि के सान्निध्य में सीखी और सभी बहरों में शेर कहे। हिंदी ग़ज़ल में जब दूर-दूर तक कोई छंदशास्त्री नज़र नहीं आता था उस वक़्त महर्षि जी ने देश के बहुत से ग़ज़लकारों का मार्गदर्शन करके उन्हें सही रास्ता दिखाया। उनके इस बेमिसाल योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
वैचारिक चर्चा की प्रस्तावना पेश करते हुए शायर देवमणि पांडेय ने पुस्तक में शामिल ग़ज़ल की तकनीक, ग़ज़ल लेखन कला, ग़ज़लों के लिए हिंदी छंद, ग़ज़ल की प्रचलित 32 बहरें आदि आलेखों का ज़िक्र करते हुए किताब की सार्थकता पर प्रकाश डाला।
#धरोहर के अंतर्गत कालजयी कवि महर्षि की रचना को अभिनेता सोनू पाहूजा ने असरदार तरन्नुम में पेश किया। दूसरे सत्र में आयोजित #ग़ज़ल_संध्या में चुनिंदा रचनाकारों अपने कलाम पेश किए। इनमें शामिल थे - प्रमोद कुश 'तन्हा', देवमणि पाण्डेय, नवीन जोशी 'नवा', नवीन सी. चतुर्वेदी, रवीन्द्र प्रकाश हंस, आशु शर्मा और अमित सिंह। संचालन लोकप्रिय शायरा प्रतिमा सिन्हा ने किया।
इस अवसर पर प्रतिष्ठित लेखक प्रो राम बक्ष, ग़ज़लकार अनिल गौड़, शायर मोईन अहमद देहलवी, पत्रकार इरफ़ान शामी, कवि विनोदम जी, शायर क़मर हाजीपुरी, शायरा पूनम विश्वकर्मा, कथाकार अनामिका शर्मा, लेखक आर के सिंह तथा हिन्दी मीडिया के सम्पादक चंद्रकांत जोशी मौजूद थे। अगले रविवार को चित्रनगरी संवाद मंच की ओर से #नवसृजन_काव्यसंध्या का आयोजन किया गया है। सुप्रसिद्ध कवयित्री कविता किरण (दिल्ली) विशेष अतिथि के रूप में शिरकत करेंगी। आप आएंगे तो अच्छा लगेगा।





