नई दिल्ली। प्रवासी भारतीय साहित्यकार एवं संपादक शालिनी वर्मा के काव्य संग्रह ‘धीरे-धीरे उजाला’ का भव्य लोकार्पण 12 अगस्त 2026 को प्रवासी भवन, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली में हुआ। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद (ARSP) एवं वैश्विक हिंदी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस साहित्यिक समारोह में देश-विदेश के साहित्यकारों, शिक्षाविदों और हिंदीसेवियों ने सहभागिता की।
उत्तर प्रदेश के अतरौली (अलीगढ़) की मूल निवासी शालिनी वर्मा पिछले 24 वर्षों से दोहा, कतर में रहकर हिंदी भाषा, साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। उन्हें कतर की प्रथम हिंदी अंतर्जाल पत्रिका ‘नवचेतना अंतरराष्ट्रीय पत्रिका’ के आरंभ का गौरव प्राप्त है। विदेश में रहते हुए उन्होंने हिंदी को भारतीय संस्कृति की संवाहक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के लिए निरंतर साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
समारोह की अध्यक्षता पूर्व राजनयिक एवं भाषाविद् डॉ. विमलेश कांति वर्मा ने की।

विशिष्ट अतिथि डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. सत्यकेतु सांकृत ने पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शालिनी वर्मा की कविताएँ कम शब्दों में गहरी संवेदनाओं और व्यापक जीवनानुभवों को अभिव्यक्त करती हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैश्विक हिंदी परिवार के मानद निदेशक श्री विनयशील चतुर्वेदी के आत्मीय स्वागत उद्बोधन से हुआ। मंच का संचालन लोकसभा सचिवालय के संयुक्त निदेशक श्री रणविजय राव ने किया।
समारोह में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय के कुलसचिव एवं प्रख्यात कवि प्रो. जितेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव डॉ. संतोष पटेल, हिंदी अकादमी के पूर्व उपसचिव श्री ऋषि कुमार शर्मा, डॉ राजेश माँझी , दिल्ली विश्वविद्यालय की अतिथि प्राध्यापक डॉ. दीप्ति अग्रवाल, वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जोशी तथा अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के मानद निदेशक श्री नारायण कुमार सहित अनेक साहित्यकार एवं विद्वान उपस्थित रहे।
विदेशों से भी हिंदी के विद्वानों ने ऑनलाइन माध्यम से समारोह में सहभागिता की। चीन से डॉ. विवेक मणि त्रिपाठी, सिंगापुर से श्रीमती आराधना झा श्रीवास्तव तथा नीदरलैंड्स से डॉ. ऋतु शर्मा नंदन पांडे ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के निदेशक श्री सुनील कुमार सिंह, डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली के प्राध्यापक डॉ. महेंद्र प्रजापति, टेक्निया इंस्टीट्यूट (TIAS) की प्राध्यापक डॉ. नूपुर जैन, बड़ौत जैन कॉलेज की प्राध्यापक डॉ. नमिता जैन, आकाशवाणी दिल्ली के पूर्व प्रोग्राम ऑफिसर अरुण पासवान, रेलवे बोर्ड के पूर्व निदेशक (राजभाषा) डॉ. वरुण कुमार, प्रवासी संसार के संपादक डॉ. राकेश पाण्डेय, ईआईएल के पदाधिकारी शिवलखन मांझी, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुवाद अधिकारी सिद्धार्थ साहू, भारतीय जीवन बीमा निगम के सत्येन्द्र मांझी, लेखिका आशमा कौल, कवि एवं शिक्षक मनोज श्रीवास्तव ‘अनाम’, चित्रकार हर्षवर्धन आर्य, पत्रकार एवं कवि डॉ. जनार्दन यादव, डॉ. मनीष कुमार, प्रखर शर्मा, अमित पटेल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

शालिनी वर्मा का यह काव्य संग्रह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि प्रवासी जीवन के अनुभवों, संवेदनाओं, स्मृतियों और उम्मीदों की साहित्यिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। विदेश की धरती पर रहते हुए भारतीय भाषा और संस्कृति से अपने गहरे जुड़ाव को उन्होंने अपनी रचनात्मकता के माध्यम से निरंतर जीवित रखा है। संग्रह का शीर्षक ‘धीरे-धीरे उजाला’ स्वयं आशा, संवेदना और जीवन के प्रति सकारात्मक आस्था का संकेत देता है।
पुस्तक विवरण
शीर्षक: धीरे-धीरे उजाला
लेखिका: शालिनी वर्मा
प्रकाशक: आइसेक्ट प्रकाशन