स्कूल की परीक्षा में बच्चों से सवाल पूछा गया कि आप कैसे सिध्द करोगे कि भारत विश्व गुरू है। बच्चों ने टीवी, अखबार औस सोशल मीडिया की खबरों के आधार पर भारत को विश्व गुरु सिध्द कर दिया। हर बच्चे ने अपने अलग अलग तर्क से सिध्द करने की कोशिश की कि भारत विश्व गुरू है और रहेगा।
एक बच्चे ने लिखा-
स्टीमर डूबने के बाद पता चलता है कि सवारी ने लाइफ़ जैकेट नहीं पहने थे।
बस जलने के बाद पता चलता है कि उसमें इमर्जेंसी एग्जिट डोर तो था ही नहीं।
ट्रॉली पलटने के बाद पता चलता है कि ट्रॉली में सवारी बैठाना मना है।
ट्रक पलटने के बाद पता चलता है कि वो ओवरलोडेड था।
1000 करोड़ की संपत्ति बना लेके बाद पता चलता है कि ऑफिसर भ्रष्ट था।
मरीजों के मरने के बाद पता चलता है कि हॉस्पिटल के पास लाइसेंस नहीं था।
लोगों के मरने के बाद पता चलता है कि खाना एक्सपायर्ड था।
विश्व गुरू बनने के लिए इससे बेहतर उदाहरण और किस देश में मिलेंगे।
दस्त लगने के बाद पता चलता है कि दूध में यूरिया मिला था।
जिस देश की महिला अपने बच्चे को आधी दवा खिलाती है, ताकि दवा जल्दी खत्म न हो जाए।
एक अन्य बच्चे ने लिखा-
जिस देश में-
1- दलाली करने वालों की सैलरी 15 करोड़ रुपए सालाना है,
2- करोड़ों अरबों नेता लोग घोटाला करते हैं,
3- अरबों रुपए फ्रीबीज में बांटें जाते हैं,
4- करोड़ों रुपए की नेताओं की रैली होती है।
ऐसा देश विश्व गुरू नहीं तो और क्या हो सकता है।
एक अन्य बच्चे ने लिखा-
23 रुपए की दवा पर MRP 104 रुपए में,
28 रुपए की दवा पर MRP 132 रुपए में,
18 रुपए की दवा पर MRP 65 रुपए में,
14.60 रुपए की दवा पर MRP 28 रुपए में,
19 रुपए की दवा पर MRP 157 रुपए में,
42 रुपए की दवा 156 रुपए में बिक रही है।
Paclitaxel जैसी ज़रूरी दवा, जो दुकानदार को करीब ₹600 में पड़ती है, उसकी MRP ₹12,000 तक रखी जाती है। एक मरीज़ को कई बार 20–30 वायल तक चाहिए होती हैं। यानी बीमारी से लड़ने से पहले ही जेब काट दी जाती है।
कैंसर जैसी बीमारी की दवाई में 1900% मुनाफा वसूला जा रहा है।
ऐसे देश को विश्व गुरू नहीं कहा जाएगा तो क्या कहा जाएगा...
सामान्य वर्ग के लिए सरकार के तोहफे..
1. फीस सबसे ज्यादा ली जाती है।
2. पात्रता की उम्र सबसे कम रखी जाती है।
3. सबसे कम रखे जाते हैं।
4. ये दूसरे वर्ग के खाली पद नहीं ले सकते।
5. इनके खाली पद सभी ले सकते हैं।
6. इनका कटऑफ सबसे ज्यादा रखा जाता है।
7. अवसरों की संख्या सबसे कम है।
8. सामान्य वर्ग के लिए कोचिंग उपलब्ध नहीं है, जबकि अन्य सभी वर्गों के लिए है
9. UGC और हाइड्रोसेल एक्ट के माध्यम से दबाव बनाकर रखा जाता है।
10. शून्य लाने वाले उम्मीदवार का चयन हो जाता है जबकि 80-90 प्रतिशत लाने वाले को रिजेक्ट कर दिया जाता है।
ऐसा देश विश्व गुरु क्यों नहीं कहा जा सकता?
एक बच्चे ने लिखा-
सरकारी अस्पतालों में लंबी कतारें , टूटे बेड , खराब मशीनें और बुनियादी सुविधाओं की कमी। आम आदमी घंटों लाइन में खड़ा रहता है, कभी डॉक्टर नहीं मिलता , कभी दवा नहीं मिलती। फर्क बस इतना है कि पहले अंग्रेजों के दौर में गरीबों की चिकित्सा व्यवस्था कमजोर थी , आज लोकतंत्र के राज में भी वही हाल दिखाई देता है। पैसे वालों की दुनिया बिल्कुल अलग है।
जैसे ब्रिटिश दौर में अंग्रेज और उनके खास लोग बेहतरीन अस्पतालों और सुविधाओं तक पहुंच रखते थे। आज वही कहानी बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल और वीआईपी इलाज के रूप में दिखती है। नेता, अधिकारी और अमीर लोग विदेश तक इलाज के लिए चले जाते हैं, जबकि आम जनता सरकारी अस्पतालों में बुनियादी इलाज के लिए भी जूझती रहती है।
प्राइवेट हॉस्पिटल को जैसे ही पता चलता है कि मरीज के पास हेल्थ इंश्योरेंस है, इलाज से ज़्यादा “बिल बनाने” की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।
नॉर्मल बुखार या हल्की बीमारी में भी 2–4 दिन भर्ती रखकर ₹1–2 लाख का बिल बना देना आम बात है।
अनावश्यक टेस्ट , महंगे इंजेक्शन, ICU ऑब्ज़र्वेशन और अलग-अलग चार्ज जोड़कर बिल को कई गुना बढ़ा दिया जाता है।
जहां एक साधारण इलाज कुछ हज़ार में हो सकता है , वही इंश्योरेंस देखते ही लाखों में पहुंच जाता है।
मरीज को अक्सर असली इलाज की ज़रूरत से ज़्यादा प्रक्रियाएं करा दी जाती हैं।
इंश्योरेंस कंपनियां क्लेम रोकती हैं , हॉस्पिटल मरीज पर दबाव डालता है।
रेगुलेशन और निगरानी लगभग नाममात्र की है।
मरीज का जो प्रीमियम भी भरता है और जरूरत पड़ने पर सिस्टम के बीच फंस भी जाता है।
किसी देश को विश्व गुरु बनने के लिए और क्या प्रमाण चाहिए...?
एक अन्य बच्चे ने लिखा-
बुराड़ी में यह सड़क रातों-रात बन गई, क्योंकि “VIP विज़िट” है।
उसने सुझाव दिया कि देश में एक स्थायी VVIP निरीक्षण पैनल बना देना चाहिए जो 365 दिन अलग-अलग शहरों और गांवों का दौरा करता रहे।
कम से कम तब तो सड़कें, नालियां और सफाई अचानक ही सही… ठीक होने लगेंगी।
जिस देश में रातोंरात सड़क और पुल बन जाते हो उस देश को विश्व गुरु क्यों नहीं कहा जाना चाहिए।
एक अन्य बच्चे ने लिखा-
देश में हजारों लाखों करोड़ की कई योजनाएँ चल रही है, लेकिन यदि कभी ठीक से इनका ऑडिट और ज़मीनी जांच हो जाए, तो स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) और आयुष्मान भारत योजना कागजों पर सरपट दौड़ती नजर आएगी।
कागज़ों पर करोड़ों शौचालय, ट्रेनिंग सेंटर और इलाज दिखा दिए जाते हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर कई जगह बिल्कुल अलग होती है। •
कई जगह शौचालय बने ही नहीं, लेकिन भुगतान पूरा दिखा दिया गया।
ट्रेनिंग सेंटरों में फर्जी उपस्थिति और “कागज़ी स्किल ट्रेनिंग” से करोड़ों का बिल पास। • आयुष्मान भारत में कई अस्पतालों पर फर्जी मरीज और अनावश्यक इलाज के आरोप लगते रहे हैं।
बीमा योजना के नाम पर पैकेज का गलत इस्तेमाल और बिलिंग में भारी गड़बड़ियां सामने आती रहती हैं।
कई राज्यों में जांच में घोस्ट बेनिफिशियरी और फर्जी क्लेम के मामले भी पकड़े गए हैं। सरकारी रिपोर्टों में सब कुछ “सफल योजना” दिखता है, लेकिन हकीकत में सब कागज पर है।
एक बच्चे ने लिखा-
देश मे 1956 के बाद जिस तरह आरक्षण का विस्तार हुआ वो भयावह है। ये मण्डल कौन लाया?
आरक्षण-
प्रमोशन में कौन लाया? बैकलॉग में कौन लाया? पेट्रोल पंप आवंटन में कौन लाया? योग्यता हटाना, शून्य माइनस भी चलेगा कौन लाया? मिलिटरी स्कूल में कौन लाया? पंचायत में कौन लाया? मानरेगा में कौन लाया? ठेकों मे में कौन लाया? बैंक लोन में कौन लाया? प्राइवेट शिक्षा संस्थान में कौन लाया? PG मेडिकल में कौन लाया? नीट मेडिकल में कौन लाया? SC-ST ऐक्ट को पैसे का धंधा कौन बनाया? सरकार की ढेरों एसी योजनाए है जिसमे से सामान्यवर्ग बाहर है। जबकि अफसरों और नेताओं की तीसरी पीढ़ी जो नौकरी, भ्रष्टाचार और दलाली से करोड़ों कमा रही है वो आरक्षण का मजा ले रहे हैं और एक सामान्य गरीब आदमी जो मुश्किल से अपना घर चला पाता है वह इनके बच्चों की फीस माफी और आरक्षण की कीमत चुका रहा है।
ऐसे देश को विश्व गुरु नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?
एक बच्चे ने लिखा-
जिस देश में नेताओं को 7BHK फ्लैट फ्री मिलते हैं और गरीबों को 5 किलो राशन का थैला। नेताओं का 5 स्टार हॉस्पिटल में इलाज होता है और गरीबों को स्ट्रेचर तक नहीं मिलती। नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ाई करते हैं और गरीब का बच्चा जर्जर स्कूलों में। अमीरों के लिए अलग कानून और गरीबों के लिए अलग। अब संविधान में अमीर और गरीब के अलग अलग कानून बना ही देने चाहिए क्योंकि यही हकीकत है!
बिना हेलमेट... जुर्माना 1000/- नो पार्किंग में पार्किंग करना... जुर्माना 3000/- मोटरसाइकिल का बीमा नही ... जुर्माना 1000/- शराब पी कर वाहन चलाना... जुर्माना 10000/- नो एंट्री में वाहन चलाना... जुर्माना 5000/- मोबाईल फोन पे बात करना... जुर्माना 2000/- प्रदूषण सर्टिफिकेट नहीं... जुर्माना 1100/- ट्रिपल सीट ड्राइविंग... जुर्माना 2000/- खराब सिग्नल... कोई जिम्मेदार नहीं है! पार्किंग की व्यवस्था नहीं... कोई जिम्मेदारी नहीं है! सड़क पर गड्ढ़े... कोई जिम्मेदार नहीं है!
ऐसा देश ही विश्व गुरु होने का दावा कर सकता है।
एक अन्य बच्चे ने लिखा-
किसी एक नेता का नाम बताइए जिसका बेटा या बेटी बेरोजगार हो? किसी एक नेता का नाम बताइए जिसके परिवार के किसी भी सदस्य की मृत्यु अस्पताल में इलाज न मिलने से हुई हो? किसी एक नेता का नाम बताइए जिसके बच्चे को अच्छी शिक्षा न मिली हो? किसी एक नेता का नाम बताइए जिसके बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हों? किसी एक नेता का नाम बताइए जिसकी बेटी का रेप हुआ हो? किसी एक नेता का नाम बताइए जिसको न्याय मिलने में देर हुई हो? किसी एक नेता का नाम बताइए जिसके बच्चों को कभी पुलिस वाले ने थप्पड़ मारा हो?
ऐसी सुविधा और खूबियों वाला देश ही तो विश्व गुरु कहलाने लायक है।




