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संघ के मंच पर आएँगे अजीम प्रेमजी और सुभाष घई

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने पिछले दिनों अपने बयान में मदर टरेसा के सेवा कार्यों को धर्मांतरण से जोड़ने की कोशिश की थी। इस बयान से इतर अपने सेवा कार्यों को समाज के सामने रखने के लिए संघ का आज से तीन दिनों का राष्ट्रीय सेवा संगम शुरू हो रहा है। दिल्ली के बाहरी इलाके में हो रहे इस कार्यक्रम में 800 से ज्यादा एनजीओ शामिल हो रहें हैं। इनमें से ज्यादातर संघ से जुड़े हुए हैं। खास बात यह है कि इसके उद्घाटन सत्र में देश के दिग्गज उद्योगपति अजीम प्रेमजी और जीएम राव के अलावा फिल्म निर्माता सुभाष घई के भी मुख्य अतिथि के तौर पर आने की संभावना है। 

इस कार्यक्रम के जरिए संघ अपना और हिन्दू संगठनों के सेवा कार्यों को समाज के सामने रखते हुए यह जताने की कोशिश करेगा कि भारत में सामाजिक कार्य विदेशी मिशनरियों की देन नहीं है बल्कि दूसरे संगठन भी इस क्षेत्र में बिना किसी लोभ के काफी अच्छा काम कर रहे हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता आध्यात्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी और संघ प्रमुख मोहन भागवत करेंगे। संघ इस तरह का आयोजन चार साल बाद कर रहा है और इस बार यह कितने बड़े स्तर पर किया जा रहा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 836 संगठनों से जुड़े चार हजार प्रतिनिधि इसमें भाग ले रहे हैं। 

संघ के सह-सेवा प्रमुख अजीत प्रसाद महापात्रा ने कहा, 'यह कार्यक्रम यह संदेश देने के लिए किया जा रहा है कि समाज के लिए सेवा की भावना इस देश में शुरू से है। मिशनरियां क्या कर रही हैं, उससे हमें मतलब नहीं है। हम सेवा का काम हर भारतीय को स्वाभिमान के साथ आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर रहे हैं।' तीन दिनों के इस आयोजन में संघ अपने स्वयंसेवक द्वारा स्वच्छ भारत, कश्मीर बाढ़ में किए राहत कार्यों और गायों के संरक्षण के लिए किए गए कामों को पेश कर सकता है। महापात्रा ने कहा कि सेवा का काम हम कर्तव्य मानकर करते हैं न कि किसी के प्रति दया का भाव रखकर। 

संघ गायों के संरक्षण पर बहुत जोर दे रहा है और इस कार्यक्रम के जरिए भी यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी। महापात्रा ने कहा, 'हम अपने स्वयंसेवकों से अपील करेंगे कि किसानों और ग्रामीण के पास जाएं और उन्हें समझाएं कि अपनी बूढ़ी गायों को न बेचें। गाय जब दूध देना बंद कर देती है तो उसका इस्तेमाल यूरिन और गोबर के लिए किया जा सकता है, जिनकी अच्छी कीमत मिलती हैं। लोग यह बात नहीं जानते हैं और कसाइयों के चक्कर में फंस जाते हैं।' शनिवार को संघ के नेता प्रतिनिधियों को एकजुट होकर समाज का काम करने के महत्व के बारे में बताएंगे। 

संघ के संगठन सेवा भारती के उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड क्षेत्र के प्रमुख सतीश अग्रवाल इसे समझाते हुए बताते हैं, 'हजार से भी ज्यादा संगठन गायों को बचाने के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन, क्या सब जानते हैं कि हमें देशी नस्ल की गायों को बचाने पर जोर देना है? हम एक-दूसरे के अनुभवों से सीखते हैं और इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि मिलकर काम करें।' अग्रवाल कहते हैं कि लोग मिशनरियों के किए गए कामों का जिक्र बहुत उत्साह से करते हैं, संघ दशकों से सेवा कार्य कर रहा है लेकिन कभी इसका प्रचार नहीं किया। उन्होंने कहा कि संघ बिना हल्ला मचाए समाज के सबसे निचले तबके के लिए काम करने में विश्वास रखता है। 

राष्ट्रीय सेवा संगम में हॉस्पिटल, स्कूल, सांस्कृतिक केंद्र, वृद्धाश्रम, ब्लड बैंक, योग केंद्र, अनाथ आश्रम और कुष्ठ रोगियों के लिए केंद्र चलाने वाले एनजीओ भाग ले रहे हैं। संघ के सूत्रों ने बताया कि अपनी ताकत दिखाने के लिए संगठन अपने से जुड़े एनजीओ की नेटवर्किंग पर भी काम शुरू कर दिया है। उसके 400 में से 96 एनजीओ को एक-दूसरे से लिंक किया जा चुका है। 

साभार- इकॉनामिक टाईम्स से 

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