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इंदौर में उर्दू हनुमान चालीसा की मांग अचानक बढ़ी

इन्दौर। देश में चल रहे लाउडस्पीकर विवाद के बाद इंदौर में सुंदर कांड और हनुमान चालीसा की डिमांड काफी बढ़ गई है। इन दोनों ही धार्मिक ग्रंथों की डिमांड आम दिनों के मुकाबले 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ी है। खास बात यह है कि इंदौर में हिंदी ही नहीं उर्दू की हनुमान चालीसा भी खासी डिमांड में है।

महाराष्ट्र में शिवसेना सुप्रीमो ठाकरे परिवार के अधिकारिक निवास मातोश्री के बाहर सांसद नवनीत राणा और उनके पति ने हनुमान चालीसा का पाठ करने के ऐलान किया था। इसके बाद से इंदौर में भी हनुमान भक्ति को लेकर माहौल बढ़ा है। धार्मिक पुस्तक विक्रेता की माने तो पहले एक दिन में 200 से 250 हनुमान चालीसा बिकती थी, लेकिन अब इनकी बिक्री 350 से 400 तक हो रही है।

इंदौर में हनुमान चालीसा मराठी, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगू, अंग्रेजी और उर्दू भाषा में उपलब्ध है।

पहले बहुत मुश्किल से हिंदी के अलावा अन्य भाषा की हनुमान चालीसा की बिक्री होती थी, लेकिन अब लोग उर्दू में लिखी हनुमान चालीसा खरीद रहे हैं। धार्मिक पुस्तकों के विक्रेता त्रिलोचन सिंह ने बताया कि पाकिस्तान से सिंधी और सिख जो भारत आए हैं वे हिंदी से बेहतर उर्दू पढ़ पाते हैं। इसके चलते उर्दू हनुमान चालीसा की बिक्री खूब हो रही है।

सन्नी सहायता बताते हैं कि वह 2008 में पूरे परिवार के साथ पाकिस्तान छोड़ भारत आकर बसे हैं। पाकिस्तान में लूट पाट के कारण डर का माहौल हमेशा बना रहता है। भारत में शांति और अपनापन लगता है। मुझे हिंदी नहीं आती, इसलिए उर्दू में हनुमान चालीसा का पाठ करता हूं। धीरे-धीरे सीख रहा हूं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से शरीर में एक नई ऊर्जा मिलती है।

इंदौर में लगभग 100 साल से भी अधिक पुरानी धार्मिक पुस्तकों की सबसे बड़ी दुकान सरदार सोहन सिंह बुक सेंटर है। दुकान के मालिक लाल बहादुर सिंह ने बताया कि इंदौर में वैसे तो हनुमान चालीसा का पाठ अधिकतर हिंदू परिवारों में ही होता है, लेकिन अब अन्य भाषा के लोग भी इसका पाठ कर रहे हैं। शहर की दुकानों में इन दिनों हिंदी के साथ ही मराठी, कन्नड़, पंजाबी, तेलुगू, इंग्लिश और उर्दू भाषा में भी हनुमान चालीसा मिल रही है।

इंदौर में इस समय 2 रुपए से लेकर 25 रुपए तक की हनुमान चालीसा उपलब्ध है। विक्रेता महेश डलोत्रा ने बताया कि इंदौर की दुकानों पर हनुमान चालीसा कई साइजों में उपलब्ध है। छोटे ताबीज के साइज से लेकर बड़ी पुस्तक की साइज में उपलब्ध है। हिंदी और मराठी की हनुमान चालीसा सबसे ज्यादा बिकती है।

धार्मिक पुस्तकों के विक्रेताओं की माने तो हनुमान चालीसा विवाद के पहले शहर में प्रति दुकान 5 हजार धार्मिक पुस्तकें आती थी, लेकिन अब शहर में 7 हजार 5 सौ धार्मिक पुस्तकें आ रही हैं। शहर में यह धार्मिक पुस्तकें मथुरा, गोरखपुर और प्रयागराज से आती है। जबकि इंदौर से मध्य प्रदेश के साथ ही पूरे देश में जाती है।

साभार –https://www.bhaskar.com/ से

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