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घंटेवाला अब इतिहास की किताब में बंद हो गया

घंटेवाला…। इस नाम को दिल्ली के बाहर रहने वाले शायद कुछ ही लोग जानते हों, लेकिन अगर आप दिल्ली में रहते हैं और इस नाम से अनजान हैं, तो ये खबर आपके लिए है। चांदनी चौक के घंटेवाला की घी का सोन हलवा दिल्ली के लोगा खूब पहचानते होंगे, लेकिन अब अगली बार वहां जाने पर आपको यह दुकान बंद मिलेगी।

दरअसल, 225 साल पुरानी ये मिठाई की दुकान बुधवार को बंद हो गई और इसी के साथ राजधानी के एक इतिहास का भी अंत हो गया। दुकान के मालिक सुशांत जैन ने कहा कि यह एक मुश्किल फैसला था। हम आठ पुश्तों से इस दुकान को चलाते आ रहे हैं, लेकिन इसकी घटती बिक्री के चलते ये फैसला लेना पड़ा।

इस दुकान पर राजीव गांधी से लेकर मोहम्मद रफी तक आ चुके हैं। मोरारजी देसाई तो यहां जलेबी खाने आते थे और पैक भी करवाकर ले जाते थे। यही नहीं, पर्यटकों के लिए ये एक देखने की जगह थी। पर्यटक तो यहां आकर दुकान के सामने सेल्फी भी लेते थे। आसपास के लिए व्यापारियों के लिए ये एक लैंडमार्क बन गया था।

दिवाली के दौरान इस मिठाई की दुकान में इतनी भीड़ हुआ करती थी कि दुकान के मालिक पुलिस को व्यवस्था बनाए रखने के लिए बुलाते थे। इतिहासकार घंटेवाला मिठाई की दुकान को बंद होना पुरानी दिल्ली की परंपरा का नुकसान मानते हैं। इतिहासकारों का कहना है कि ये दुकान शाहजहानाबाद की विरासत थी। इस दुकान का जिक्र महमूद फारुकी की किताब 'बिसीज्ड' में भी था।

साभार- दैनिक  हिन्दुस्तान से 

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