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कामयाबी की कहानी: बिड़ला परिवार की चार पीढ़ियों के साथ काम करने वाले बीएल शाह

बिड़ला समूह देश का प्रतिष्ठित और जाना माना उद्योग घराना है। बिहारी लाल शाह का नाम इस घराने में सम्मान के साथ लिया जाता है। वे इकलौते ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्होंने घनश्यामदास बिड़ला, बसंत कुमार बिड़ला और आदित्य विक्रम बिड़ला के साथ काम किया है। इस समय शाह, कुमार मंगलम बिड़ला के साथ काम कर रहे हैं। बिड़ला उद्योग समूह में वैचारिक समस्या पैदा होने पर उसका समाधान बीएल शाह की निकालते हैं।

सादा-सरल जीवन और कार्य के प्रति निष्ठा बिहारी लाल शाह के जीवन का मूल मंत्र रहा है। राजस्थान में झुंझुनू जिले के खेतड़ी निवासी शाह का जन्म 31 मार्च 1921 को महाराष्ट्र में अकोला जिले के दानापुर में हुआ। चौथी कक्षा की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए वे खेतड़ी चले आए। यहां अंग्रेजी माध्यम में उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई की। फिर बिड़ला कॉलेज पिलानी से इंटरमीडिएट। केके बिड़ला जब लोकसभा चुनाव के लिए खड़े हुए तब बिहारी लाल ने उनके लिए कई गांवों में प्रचार किया था।

चचेरे भाई हरि प्रसाद की वजह से वे अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर पाए। पिलानी के बिड़ला कॉलेज से 1942 में स्नातक करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए वे इलाहाबाद चले गए। यहां उन्होंने एमकॉम में दाखिला लिया। मगर अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे के बीच बिहारी लाल को अपने घर लौटना पड़ा। 21 वर्ष की आयु में उनका विवाह शांतिदेवी शाह से हो गया।

बिहारी लाल नौकरी के लिए दिल्ली चले आए। नौकरी के छह महीने बाद ही उनकी तनख्वाह 150 रुपये हो गई। उनको बिड़ला समूह की इंश्योरेंस फर्म रूबी इंश्योरेंस में नौकरी मिली थी। इसके बाद उनको गुजरमल मोदी उद्योग में नौकरी मिली। यहां उनकी तनख्वाह 500 रुपये हो गई। गुजरमल मोदी कोलकाता में ऑफिस खोलना चाहते थे और इसकी जिम्मेदारी बिहारी लाल को मिली थी।

उन्होंने लगभग चार वर्षों तक गुजरमल मोदी के साथ काम किया। एक जुलाई 1947 को वे दोबारा बिड़ला ग्रुप की कंपनी से जुड़ गए। 1947 में देश के विभाजन के वक्त पूर्वोत्तर में सड़कें नहीं थीं। ऐसे में उन्हें भारत एविएशन के जरिए फ्रेट और यात्रियों की बुकिंग का काम मिला। बाद में उन्हें इसी कंपनी में राजस्व अधिकारी बना दिया गया।

बसंत कुमार बिड़ला ने मुंबई के कल्याण में सेंचुरी रेयॉन नाम से फिलामेंट यार्न बनाने वाली एक फैक्टरी शुरू की। बिहारी लाल सेंचुरी रेयॉन से जुड़ गए। उनके कार्यकाल के दौरान सेंचुरी रेयॉन को कई बार विस्तारित किया गया। 13 अगस्त 1964 को बिहारी लाल ने सेंचुरी रेयॉन को अलविदा कह दिया। इसके बाद खंडेलवाल फेरो एलॉयज लिमिटेड में महाप्रबंधक के पद पर काम शुरू कर दिया। यहां डेढ़ साल काम करने के बाद बिहारी लाल जेके सिंघानिया समूह से जुड़े। उन्होंने लगभग 15 महीने तक रेयॉन प्लांट के मुखिया के तौर पर काम किया। कानपुर के उस बेहद खराब स्थिति वाले प्लांट के उत्पाद, गुणवत्ता और विपणन को सुधारने का काम किया और मजदूरों को 20 फीसदी बोनस दिलाया।

आदित्य विक्रम बिड़ला अमेरिका में अपनी पढ़ाई कर स्वदेश लौटे और अपने पिता के व्यवसाय से जुड़ गए। उन्हें बिहारी लाल की याद आई। बिहारी लाल की एक ही शर्त थी कि उनकी नौकरी को खंडित न मानकर सतत् माना जाए, जिसे बसंत कुमार बिड़ला ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इसी बीच बिड़ला ग्रुप ने वेरावल (गुजरात) में एक रेयॉन प्लांट लिया। हड़ताल के समय मजदूरों ने इसमें आग लगा दी थी।

बिहारी लाल को प्लांट का इंचार्ज बनाया गया और उन्होंने मात्र तीन हफ्ते में प्लांट को फिर से शुरू कर इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाई। इसके साथ ही उन्हें नागदा में एक केमिकल प्लांट शुरू करने की जिम्मेदारी दी गई जिसे उन्होंने बखूबी पूरा किया। इसके बाद उन्हें राजश्री सीमेंट नाम से सीमेंट फैक्टरी शुरू करने की जिम्मेदारी दी गई। बिहारी लाल अब तक कंपनी के निदेशकों की सूची में शामिल हो चुके थे।

80 साल की उम्र में उन्होंने कुमार मंगलम बिड़ला से सेवानिवृत्ति की अपनी इच्छा व्यक्त की। इस पर कुमार मंगलम बिड़ला ने कहा कि आपको सेवानिवृत्त नहीं होना चाहिए। कुमार मंगलम ने कहा कि वे बिड़ला समूह के धर्मार्थ कार्यों से जुड़े रहें। बिहारी लाल आज भी बिड़ला समूह से जुड़े हैं। वे धर्मार्थ ट्रस्ट से जुड़कर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

बिहारी लाल आदित्य बिड़ला हेल्थ सर्विसेज, जीडी बिड़ला मेडिकल रिसर्च एंड एजुकेशन फाउंडेशन, तृप्ति ट्रेडिंग एंड इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और वैभव मेडिकल एंड एजुकेशन फाउंडेशन के ट्रस्टी हैं। बिहारी लाल एक पुत्री और तीन पुत्रों के पिता हैं। अपने परिवार की चार पीढ़ियों को वे अपने सामने खुशहाल देख रहे हैं। समाज के गरीब, वंचित और शोषित लोगों की सेवा को वे ईश्वर की सेवा मानते हैं।

लगभग तीन साल पहले बिहारी लाल के भांजे श्री सुरेश भगेरिया ने ‘एसोसिएशन विद जनरेशंस ऑफ बिड़लाज’ नामक पुस्तक प्रकाशित की है। शाह ने बिड़ला समूह में 77 वर्षों तक अपनी सेवा प्रदान की।

साभार – https://www.amarujala.com/ से

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