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सुरेश प्रभु और अमिताभ बच्चन, संस्कार और विनम्रता की अनूठी मिसाल

राजनीति और फिल्म की दुनिया में जो लोग हैं उनकी मूर्खताओं और उटपटांग बयानों के किस्से तोआए दिन मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं, लेकिन भारतीय राजनीति में सुरेश प्रभु और फिल्मी दुनिया में अमिताभ बच्चन जैसे लोग हैं, जिनकी वजह से राजनीति और फिल्मी दुनिया में संस्कारों की सुहास बनी हुई है।

श्री सुरेश प्रभु और अमिताभ बच्चन ने एक ऐसी मिसाल कायम की है जिससे राजनीतिऔर फिल्मी दुनियाके हर शख़्स को सीख लेना चाहिए।
रेल बजट के दौरान रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु बिग बी के पिता कवि हरिवंश राय बच्चन की एक कविता की कुछ पंक्तियां कोट करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन को फोन कर बजट भाषण से पहले इजाजत मांगी। इतना ही नहीं, बजट भाषण खत्म होने के बाद फिर उन्होंने अमिताभ बच्चन को फोन कर पूछा कि कहीं उन्होंने कविता की पंक्तियाँ पढ़ते वक्त कोई गलती तो नहीं की? ये बात अमिताभ बच्चन और श्री सुरेश प्रभु के बीच ही रह जाती अगर अमिताभ बच्चन रेल मंत्री सुरेश प्रभु की इस विनम्रता का उल्लेख अपने फेसबुक पेज पर नहीें करते।

अमिताभ बच्चन ने पूरे घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए लिखा, ‘आज के दौर ऐसा कोई नहीं करता।’ इस सौजन्यता के लिए अमिताभ ने सुरेश प्रभु की तारीफ भी की।
ये थी पंक्तियां
रेल बजट भाषण के दौरान रेलवे को बेहतर बनाने के संकल्प व्यक्त करते हुए श्री सुरेश प्रभु ने हरिवंशराय बच्चन की कविता की पंक्तियां ‘नव उमंग, नव तरंग, जीवन का नव प्रसंग, नवल चाह, नवल राह, जीवन का नव प्रवाह’ सुनाकर आंकड़ों से भरे रेल बजट में एक अलग ही सुहास पैदा कर दी थी।

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