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90 ट्रक मैगी बनी सीमेंट

जबलपुर. 2 मिनट में पकने वाली मैगी जहां बच्चों से लेकर बड़ों तक को पंसद आती थी, यही मैगी 2 मिनट में जलकर सीमेंट में तब्दील कर दी गई। इसकी वजह इसमें हानिकारक कैमिकल लेड की मात्रा सहित अन्य मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्व शामिल होना हैं। एक दिन पहले रात में कैमोर के एसीसी सीमेंट फैक्ट्री के प्लांट में पहुंची मैगी की बड़ी खेप को जलाकर सीमेंट बना दिया गया।

जो मैगी यहां पहुंची, उसकी मात्रा 1 ट्रेन और तकरीबन 90 ट्रक की खेप थी। यह खेप मैगी के विनष्टीकरण के लिये यहां लाई गई थी। अब चूंकि प्रदेश में भी मैगी प्रतिबंधित हो गई है, इसलिए इसे जगह-जगह से एकत्र किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि पूरे देश में मैगी का विनष्टीकरण किया जा रहा है, ताकि यह लोगों के संपर्क में न आ सके। यही वजह है कि विनष्टीकरण का सबसे सही तरीका मैगी को जलाकर खाक कर देना है। अब चूंकि मैगी में लेड है, इसलिए जलने के बाद इसकी राख भी हानिकारक ही होगी। यही वजह है कि हानिकारक मैगी की राख तक का उपयेाग भी लोग न कर पाएं, इसका ध्यान शासन रख रही है। इसलिए मैगी को सीधे-सीधे इस तरह जलाने की येाजना बनाई गई, ताकि उसकी राख का भी अता-पता न चले। इसके लिये सबसे बेहतर उपाय उसके जरिये सीमेंट बनाना ही है। सीमेंट बनने की प्रक्रिया के दौरान भट्टे में मैगी के जाने के बाद उसकी कोई राख नहीं निकलती और वह सीधे-सीधे सीमेंट में तब्दील हो जाती है।
ऐसे जलाई गई मैगी
सीमेंट बनाने में चूने के पत्थर और मिट्टी को एक साथ मिलाया जाता है। उसे बारीक कर घूमने वाले भट्टे में डाला जाता है। यह भट्टा दाे सौ मीटर लंबा और 6 मीटर व्यास का होता है। सीमेंट बनाते समय इसका तापमान 14 सौ से 16 सौ डिग्री सेल्सियस होता है। सीमेंट फैक्ट्री में इसी चूने और मिट्टी के चूर्ण के साथ ट्रेन और ट्रकों से आई मैगी को पैकेट सहित डाल दिया गया।
सीमेंट बनाने वाला भट्टा इस तरह का होता है कि इसका अंतिम छोर सीमेेंट को ठंडा करने वाला होता है। यहीं से सीमेंट बनी मैगी को गुजारा गया। उसके बाद मैगी सीमेंट के 1 एमएम से लेकर 25 एमएम के बीच के गोलाकर शेप में बदल गई। उसे सीमेंट मिल में डालकर जिप्सम के साथ पीस दिया गया और बोरियाें में पैक कर दिया गया। इस प्रक्रिया में मैगी की कोई राख नहीं निकली और हानिकारक मैगी जलकर सीमेंट बन गई।
हर सीमेंट फैक्ट्री में भेजी गई
विनष्टीकरण के लिये आने वाली खेप यूपी, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र आदि स्थानों से यहां भेजी जा रही है। इसके अलावा जहां-जहां सीमेंट बनाने की भट्टियां लगी हैं, वहां भी पूरे देश से मैगी की खेप भेजी जा रही है, ताकि जल्द से जल्द मैगी विनष्ट हो जाए और लोेगों की पहुंच से दूर। मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कैमाेर के क्षेत्रीय अधिकारी हेमंत तिवारी अब भी इस पूरे मामले से अज्ञान हैं।
यह हानिकारक तत्व भी मौजूद
>मैगी में कोटेड वैक्स होता है, जो गर्म पानी डालते ही उतराने लगता है। 
>हानिकारक मोनेासोडियम ग्लूमेट्स होता है, जो कई बीमारियां पैदा करता है। 
>मैगी में मौजूद तत्वों के कारण लोग घर के बने खाने से भागने लगते हैं। 
>अधिकाधिक मात्रा में सोडियम होता है, जो हाईपरटेंशन और िकडनी खराब करता है।

साभार- दैनिक भास्कर से 

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