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कुंड़ली में राहु की दशा हो तो क्या करें

राहु ध्यान को खींचने को वाला एक ग्रह है। राहु के पास सिर है, आंखे हैं, दिमाग है परन्तु राहु के पास दिल नहीं है। राहु के पास खुद की दृष्टि नहीं है। राहु पर जिसकी दृष्टि पड़ती है या युति होती है तो उसे उस ग्रह की दृष्टि मिल जाती है। गले के नीचे को भाग न होने की वजह से कुछ नहीं है, भूख नहीं है।

राहु के पास सुविधा है। राहु उस ग्रह का रूप धारण कर लेता है जिसकी दृष्टि उसको मिलती है। राहु का अपना कोई अस्तित्व नहीं है इसलिए जिस भाव में स्थित होता है उसी प्रकार के फल देता है। जब भी राहु महादशा में आता है या या अंतर्दशा में तो हमेशा ही नकारात्मक ऊर्जा देता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु ग्रह को नवग्रह में एक स्थान दिया गया है। दिन में राहुकाल नामक मुहूर्त (24 मिनट) की अवधि होती है जो अशुभ मानी जाती है।

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राहु की दशा से मुक्ति के उपायः
अपने आप सफेद चंदन अवश्य रखें। सफेद चंदन की माला भी धारण कर सकते हैं। प्रतिदिन सुबह चंदन का टीका भी लगाना चाहिए। नहाने के पानी में चंदन का इत्र डालकर नहाएं। अपने पास ठोस चांदी की गोली रखें। हर बुधवार को चार सौ ग्राम धनिया पानी में में प्रवाहित करें।
किसी जरूरतमंद को चावल का भोजन कराएंष किसी भी ग्रहों के उपाय करने से पहले अपनी कुंडली किसी अच्छे से ज्योतिषाचार्य से परामर्श करने के बाद ही उपाय किया जाये तो उसका परिणाम ज्यादा प्रभावित होते हैं।

तीन ग्रहों की युति फल – कुंडली में तीन ग्रहो की युति का फल*

सूर्य-चंद्र-मंगल
सूर्य, चंद्र एवं बुध की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक तेजस्वी, विद्वान, शास्त्रप्रेमी, राजमान्य, भाग्यशाली एवं नीतिविशारद होता है।

सूर्य-चंद्र-शुक्र

सूर्य, चंद्र एवं शुक्र की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक हीनवीर्य, व्यापारी, सुखी, निसंतान या अल्पसंतान, लोभी एवं साधारण धनी होता है।

सूर्य-चंद्र-शनि
सूर्य, चंद्र एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक अज्ञानी, धूर्त, वाचाल पाखंडी, अविवेकी, चंचल एवं अविश्वासी होता है।

सूर्य-मंगल-गुरू
सूर्य, मंगल एवं गुरू की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक राजमान्य, सत्यवादी, तेजस्वी, धनिक, प्रभावशाली एवं ईमानदार होता है।

सूर्य-मंगल-शुक्र
सूर्य, मंगल एवं शुक्र की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक कुलीन, कठोर, वैभवशाली, नेत्ररोगी एवं प्रवीण होता है।

सूर्य-मंगल-शनि
सूर्य, मंगल एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक धन-जनहीन, दुखी, लोभी एवं अपमानित होने वाला होता है।

सूर्य-बुध-गुरू

सूर्य, बुध एवं गुरू की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक विद्वान, चतुर, शिल्पी, लेखक, कवि, शास्त्र रचियता, वात्तरोगी एवं ऐश्वर्यवान् होता है।

सूर्य-बुध-शुक्र
सूर्य, बुध एवं शुक्र की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक दुखी, वाचाल, भ्रमणशील, द्वेषी एवं घृणित कार्य करने वाला होता है।

सूर्य-बुध-शनि
सूर्य, बुध एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक कलाद्वेषी, कुटिल, धन नाशक, छोटी अवस्था में सुंदर पर 36 वर्ष की अवस्था में विकृतदेही एवं नीच कर्मरत होता है।

सूर्य-गुरू-शुक्र
सूर्य, गुरू एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक परोपकारी, सज्जन, राजमान्य, नेत्रविकार, लब्धप्रतिष्ठित एवं सफल कार्य संचालक होता है।

सूर्य-गुरू-शनि
सूर्य, गुरू एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक चरित्रहीन, दुखी, शत्रुपीड़ित, उद्विग्न, कुष्ठरोगी एवं नीच संगितप्रिय होता है।

सूर्य-शुक्र-शनि
सूर्य, शुक्र एवं शनि एवं की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक दुश्चरित्र, नीचकार्यरक, घृणित रोग से पीड़ित एवं लोकतिरस्कृत होता है।

चंद्र-मंगल-बुध
चंद्र, मंगल एवं बुध की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक कठोर, पापी, धूर्त, क्रुर एवं स्वभाव वाला होता है।

चंद्र-बुध-गुरू
चंद्र, बुध एवं गुरू की युति पत्रिका में हो तो जातक धनी, सुखी, प्रसन्नचित्त, तेजस्वी, वाक्पुट एवं कार्यकुशल होता है।

चंद्र-बुध-शुक्र
चंद्र, बुध एवं शुक्र की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक धन-लोभी, ईर्ष्यालु, आचारहीन, दंभी, मायावी और धूर्त होता है।

चंद्र-बुध-शनि
चद्र, बुध एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक अशांत, प्राज्ञ, वचनपुट, राजमान्य एवं कर्त्तव्यपरायन होता है।

चंद्र-गुरू-शुक्र
चंद्र, गुरू एवं शुक्र की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक सुखी, सदाचारी, धनी, ऐश्वर्यवान्, नेता, कर्त्तव्यशील एवं कुशाग्रबुद्धि होता है।

चंद्र-गुरू-शनि
चंद्र, गुरू एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक नीतिवान, नेता, सुबुद्धि, शास्त्रज्ञ, व्यवसायी, अध्यापक एवं वकील होता है।

चंद्र-शुक्र-शनि
चंद्र, शुक्र एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक लेखक, शिक्षक, सुकर्मरत, ज्योतिषी, सम्पादक, व्यवसायी एवं परिश्रमी होता है।

मंगल-बुध-गुरू
मंगल, बुध एवं गुरू की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक कवि, श्रेष्ठ पुरूष, गायन-निपुण, स्त्री-सुख से युक्त, परोपकारी, उन्नतिशील, महत्वाकांक्षी एवं जीवन में बड़े बड़े कार्य करने वाला होता है।

मंगल-बुध-शुक्र
मंगल, बुध एवं शुक्र की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक कुलहीन, विकलांगी, चपल, परोपकारी एवं जल्दबाज होता है।

मंगल-बुध-शनि
मंगल, बुध एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक व्यसनी, प्रवासी, मुखरोगी एवं कर्त्तव्यच्युत होता है।

मंगल-गुरू-शुक्र
मंगल, गुरू एवं शुक्र की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक राजमित्र, विलासी, सुपुत्रवान्, ऐश्वर्यवान्, सुखी एवं व्यवसायी होता है।

मंगल-गुरू-शनि
मंगल, गुरू एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक पूर्ण ऐश्वर्यवान, सम्पन्न, सदाचारी, सुखी एवं महान् कार्य करने वाला होता है।

गुरू-शुक्र-शनि
गुरू, शुक्र एवं शनि की युति जन्म पत्रिका में हो तो जातक शीलवान्, कुलदीपक, शासक, उच्चपदाधिकारी, नवीन कार्य संस्थापक एवं आश्रयदाता होता है।

(लेखक जाने माने ज्योतिषि एवँ भागवताचार्य हैं)

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