सेवा में,

माननीय सचिव,

राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय,

भारत सरकार, नई दिल्ली।

विषय: ई-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/) से हिन्दी का विकल्प समाप्त करने व भाषाई भेदभाव के विरुद्ध शिकायत।

महोदय,

मैं इस शिकायत के माध्यम से आपका ध्यान आयकर विभाग, भारत सरकार के मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म यानी एकीकृत ई-फाइलिंग पोर्टल (https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/) पर राजभाषा हिन्दी के साथ किए जा रहे अत्यंत आपत्तिजनक, विधिविरुद्ध व्यवहार की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ।

करदाता सेवाओं को सुगम बनाने के नाम पर संचालित इस केंद्रीय पोर्टल से अब हिन्दी भाषा के विकल्प (हिन्दी संस्करण) को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है। यह देश के करोड़ों गैर-अंग्रेजी भाषी करदाताओं, अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और कम्पनी सचिवों के विधिक अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है। इस संबंध में मुख्य विधिक एवं व्यावहारिक बिंदु निम्नलिखित हैं:

१. राजभाषा अधिनियम, १९६३ की धारा ३(३) का खुला उल्लंघन

आयकर विभाग का ई-फाइलिंग पोर्टल केवल एक सूचनात्मक वेबसाइट नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से विभिन्न वैधानिक आदेश, परिपत्र, सार्वजनिक सूचनाएं, निविदाएं, और कर-निर्धारण से जुड़े महत्वपूर्ण नीतिगत दस्तावेज जारी किए जाते हैं। राजभाषा अधिनियम, १९६३ की धारा ३(३) के अंतर्गत इस प्रकार के सभी दस्तावेजों और विनियामक सूचनाओं को अनिवार्य रूप से द्विभाषी (हिन्दी और अंग्रेजी) रूप में जारी किया जाना विधिक रूप से बाध्यकारी है। पोर्टल से हिन्दी संस्करण को हटाकर विभाग इस धारा का लगातार और प्रत्यक्ष उल्लंघन कर रहा है।

२. राजभाषा नियम, १९७६ के नियम ११ की पूर्ण अवहेलना

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अंतर्गत आने वाले इस पोर्टल पर विभिन्न प्रकार के वैधानिक फॉर्म (जैसे आयकर रिटर्न - आईटीआर फॉर्म, टीडीएस फॉर्म, अपील फॉर्म आदि) ऑनलाइन भरे जाते हैं। राजभाषा नियम, १९७६ का नियम ११ स्पष्ट रूप से यह अधिदेश देता है कि केंद्र सरकार के किसी भी कार्यालय द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी प्रपत्र, फॉर्म, प्रक्रियात्मक दस्तावेज और ऑनलाइन आवेदन प्रारूप अनिवार्य रूप से द्विभाषी होने चाहिए। पोर्टल को पूरी तरह 'केवल अंग्रेजी' (English Only) में तब्दील कर देना इस नियम का घोर उल्लंघन और राजभाषा नीति का खुला मखौल है।

३. आम नागरिकों व पेशेवरों के साथ भाषाई भेदभाव

भारत सरकार डिजिटल इंडिया और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' का प्रचार-प्रसार कर रही है, परंतु प्रत्यक्ष कर जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय के आधिकारिक पोर्टल से देश की राजभाषा को ही गायब कर दिया गया है। यह अंग्रेजी न जानने वाले नागरिकों के साथ एक घृणित भाषाई भेदभाव है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह कदम जानबूझकर उठाया गया है ताकि करदाताओं को विवश होकर अंग्रेजी का ही उपयोग करना पड़े और विभाग को हिन्दी में कार्य करने या हिन्दी में उत्तर देने के विधिक दायित्वों से मुक्ति मिल सके।

आयकर विभाग अपने सभी नोटिस व आदेश भी केवल अंग्रेजी में जारी करता है जो कि भारत के नागरिकों के अधिकारों पर सीधा हमला है। राजभाषा अधि. की धारा 3(3) के अनुसार आयकर विभाग को अपने सभी नोटिस व आदेश द्विभाषी (हिन्दी-अंग्रेजी में एकसाथ) जारी करना अनिवार्य है। 

४. डिजिटल समावेशन (Digital Inclusion) के सिद्धांतों के विपरीत

आयकर का दायरा अब देश के छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका है, जहाँ व्यापारी, किसान और मध्यमवर्गीय करदाता अपनी भाषा में काम करना सुगम पाते हैं। ऐसे समय में जब देश के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पोर्टल बहुभाषी हो रहे हैं, देश के सबसे बड़े राजस्व संग्रहकर्ता विभाग (आयकर विभाग) द्वारा अपने मुख्य पोर्टल से हिन्दी को पूरी तरह हटा देना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, संकीर्ण और राजभाषा के नाम पर केवल ढोंग को प्रदर्शित करता है।

आयकर विभाग जैसी शीर्ष संस्था द्वारा राजभाषा नियमों की इस प्रकार अनदेखी करना और आधिकारिक पोर्टल से हिन्दी संस्करण को पूरी तरह गायब कर देना केंद्र सरकार की अपनी ही नीतियों और संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। अतः आपसे विनम्र प्रार्थना है कि:


  1. इस विषय की गंभीरता को देखते हुए केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (केप्रकबो) और आयकर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  2. आयकर विभाग को कड़े निर्देश जारी किए जाएं कि वे ई-फाइलिंग पोर्टल पर तत्काल प्रभाव से पूर्णतः प्रामाणिक और त्रुटिहीन हिन्दी संस्करण को बहाल करें।
  3. पोर्टल पर उपलब्ध सभी विधिक फॉर्म, सूचनाएं, परिपत्र और सहायता सामग्री,मैनुअल, पीडीएफ फाइलें अनिवार्य रूप से द्विभाषी रूप में उपलब्ध कराई जाएं।
  4. पोर्टल के लैंडिंग पेज पर भाषा चयन का विकल्प दिया जाए और हिन्दी का नाम ड्रॉप डाउन सूची में सबसे ऊपर हो।
राजभाषा विभाग द्वारा इस दिशा में की गई त्वरित विधिक कार्रवाई से मुझे भी अवगत कराने की कृपा करें।

धन्यवाद।

भवदीय,

बृजेश कुमार तिवारी

ग्राम - पिपरी,

ग्राम - पंचायत घुघुरी,

डाकघर - देवतालाब,

तहसील - मऊगंज,

जिला मऊगंज (मध्य प्रदेश)

पिनकोड - 486341

प्रतिलिपि :

१. माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार
२. सचिव, राजभाषा विभाग, भारत सरकार
३. सचिव, संसदीय राजभाषा समिति
४. अध्यक्ष, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, नई दिल्ली।