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भारत का कानून मंत्रालय अभी महारानी एलिजाबेथ के लिए काम कर रहा है!

विषय: कानून मंत्रालय ही कर रहा कानून का निरंतर उल्लंघन  
 
महोदय,
५ अप्रैल २०१५ को कानून एवं न्याय मंत्रालय के अधीन न्याय विभाग ने जो सम्मेलन आयोजित हुआ, उसकी तारीख को लेकर विवाद हुआ पर उसी कार्यक्रम में राजभाषा कानून की धज्जियाँ उड़ाई गईं। इस कार्यक्रम के सभी बैनर/पोस्टर, आगंतुकों के बिल्ले, आमंत्रण-पत्र, ईमेल आमंत्रण-पत्र एवं अतिथि न्यायाधीशों,मुख्यमंत्रियों के नामपट आदि केवल अंग्रेजी में बनाए गए थे।  ऐसा लग रहा था यह कार्यक्रम रानी एलिजाबेथ के लन्दन शहर में हो रहा हो। 
 
एक बात स्पष्ट है विधि एवं न्याय मंत्रालय सड़सठ साल बाद भी अंग्रेजों के लिए काम कर रहा।  न्याय व्यवस्था आज भी अंग्रेजी की गुलाम है भारत के नागरिकों के लिए कानून फिरंगी भाषा में बनाए जाते हैं और उनके अनुवाद भी उपलब्ध नहीं करवाए जाते। केवल अंग्रेजी के कारण देश में करोड़ों मामले अटके पड़े हैं। कटघरे में खड़े आरोपी को पता ही नहीं चलता है कि उच्च एवं उच्चतम न्यायालय में उसके केस पर क्या बहस चल रही है?   
 
मेरी पिछले शिकायतों की कड़ी में एक शिकायत और भेज रहा हूँ।  मैं इस सम्बन्ध में पहले भी कई शिकायतें कर चुका हूँ। विधि एवं न्याय मंत्रालय की मुख्य वेबसाइट एवं अधीनस्थ विभागों में से एक भी वेबसाइट राजभाषा हिंदी में नहीं बनाई गई है और मंत्रालय ने पिछले सोलह सालों में इसके लिए कोई भी कदम नहीं उठाया। ये कैसा कानून मंत्रालय है जो स्वयं कानून का पालन नहीं करता।
 
जब मंत्रालय में साधारण से रबर की मुहरें, पत्र-शीर्ष, लिफाफे, कार्यक्रमों /बैठकों/सम्मेलन आदि के बैनर/पोस्टर एवं अतिथि नामपट आदि हिंदी में बनाए जाने के क़ानूनी प्रावधान का भी पालन नहीं किया जा रहा है तो हिंदी के नाम पर "पुरस्कार" क्यों बांटे जा रहे हैं?
 
मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रमों /बैठकों/सम्मेलन आदि में बैनर/पोस्टर/आमंत्रण पत्र एवं अतिथि नामपट हमेशा से केवल अंग्रेजी वाले ही बनाए जाते हैं यह बात एकदम स्पष्ट है पर राजभाषा क्या देखता है मेरी समझ से परे  है? इस विषय पर पिछले तीन साल में यह चौथा शिकायती पत्र है।  राजभाषा विभाग राजभाषा कानून के अनिवार्य और छोटे-२ प्रावधानों का पालन करवाने के प्रति भी विफल है। हर दिन दिल्ली में भारत सरकार के कई सम्मेलन/समारोह और बैठकें होती हैं पर 90 % आयोजनों में  बैनर/पोस्टर, आगंतुकों के बिल्ले, आमंत्रण-पत्र, ईमेल आमंत्रण-पत्र एवं अतिथि नामपट आदि केवल अंग्रेजी में बनाए जाते हैं और हर साल सैकड़ों हिंदी प्रेमी शिकायतें कर रहे हैं पर भारत सरकार के अधिकारियों के कानों पर जूँ भी नहीं रेंगती। बार-२ वही शिकायतें पर कोई सुधार की उम्मीद नहीं दिखती है.  
 
आपके द्वारा शीघ्र कारगर कार्यवाही की अपेक्षा है.
 
भवदीय,
सीएस. प्रवीण कुमार जैन, 
ए-१०३ आदीश्वर सोसाइटी, जैन मंदिर के पीछे, 
सेक्टर ९ ए, वाशी नवी मुंबई – ४००७०३ 

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