जब मैं दूरदर्शन पर न्यूज़ देखता हूँ तो मुझे ये लगता है कि...
- मेरे देश में शांति और सद्भाव है
- देश धीरे धीरे विकास भी कर रहा है
- सभी कुछ सामान्य सा ही है।
इससे घबरा कर जब में बचने के लिए घर से बहार निकलता हूँ तो पाता हूँ की बाज़ार में तो सामान्य सी हलचल है। कहीं मुस्लिम वर्ग पथ संचलन पर पुष्प वर्षा कर रहा है तो कहीं गणपति के पांडाल में नमाज़ पढ़ी जा रही है। कही मंदिर के अंदर मुस्लिम महिला की डिलीवरी हिन्दू महिलाएं करवा रही है।
पता लगा की सारी साम्प्रदायिकता और अशांति इन तीन न्यूज़ चैनलों के स्टूडियो में और न्यूज़ एंकर के दिमाग में ही थी, जो की ब्रीफ़केस में भरे हुए कागज़ की शक्ल में स्टूडियो में पहुंचाई जा रही थी।

