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“अमेरिका से मुलाकात”: अमेरिका को एक हिंदी भाषी के नजरिये से जानने और समझने की पहल

” सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल
ज़िंदगानी फिर कहा ।
ज़िंदगानी गर रही,
तो ये जवानी फिर कहाँ ।”
 ख़्वाजा मीर दर्द का यह प्रसिद्ध शेर हमें  यात्रा करने और दुनिया का अनुभव करने के लिए प्रेरित करता है। यह शेर हमें बताता है कि जीवन एक बार का है, इसलिए हमें इसका पूरा आनंद लेना चाहिए और दुनिया को देखना चाहिए, क्योंकि जीवन में जवान रहने का मौका दोबारा नहीं मिलेगा।
यह शेर डॉ. विमला भंडारी और उनकी  पर्यटन रुचि पर सटीक बैठता है। (साहित्य यात्रा ) “अमेरिका से मुलाकात” में अपनी बात में  वह कहती हैं , “यात्रा करना हमें नई चीजों को देखने और अनुभव करने का अवसर प्रदान करता है, और यह हमें जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण देता है। इस दृष्टि से यह पुस्तक साहित्य पर्यटन प्रेमियों के लिए जरूरत का दस्तावेज बनें, रुचिकर हो और उपयोगी हो इस दृष्टि से इसकी रचना की गई। साहित्य की तीन विधाओं यथा संस्मरण, रिपोर्ताज और डायरी का यथास्थान प्रयोग कर समय के अंतराल को पाटा गया है ताकि अमेरिका में दो बार किया गया भ्रमण अपनी पूरी सुगंध बिखेर सके। कहती हैं दुनिया एक पाठशाला है। जिसने दुनिया को जितना घूम-फिरकर देखा है, उसने उतना ही अपनी दृष्टि का विस्तार होते पाया है वरना उसकी सोच की परिधि कूपमण्डूक जैसी ही बनी रहती है। भ्रमण नया देखने, नया जानने की जिज्ञासा को पूरा करता है। यह जिज्ञासा भ्रमण के साथ बढ़ती जाती है और भ्रमण के साथ शांत होती जाती है। यह एक ऐसी प्यास है जिसका घूर्णन निरंतर घूमता है, बुझता है और फिर जागृत हो जाता है क्योंकि मनुष्य की प्रकृति ही घुम्मकड़ी की रही है। उसका सौंदर्य-बोध और बेहतर पाने की तलाश उसे घुमन्तू बनाती है। मैंने अपने भ्रमण से अब तक यही जाना और समझा है। पाठकों को इसे पढ़ कर इन स्थानों को देखने की जिज्ञासा जागृत होगी ऐसा मेरा विश्वास है। इस उद्देश्य से पूर्व लिखित यात्रा संस्मरण भी अति उपयोगी साबित हुए हैं।”
पुस्तक का प्रारंभ ” अमेरिका से मुलाकात ” शीर्षक अध्याय से करते हुए अमेरिका घूमने के मंतव्य को स्पष्ट कर लिखती हैं, ”  भारत में आज का युवा नौकरी के लिए पहली पसंद अमेरिका को ही चुनता है। अमेरिका में शिक्षा या नौकरी का अवसर मिल जाने को सभी गर्व की बात मानते हैं। विश्व का यह एक ऐसा देश है जो उच्च शिक्षा और अच्छे पैकेज की नौकरी के लिए युवाओं को आकर्षित करता है। युवाओं में लोकप्रिय होने के और भी कई कारण हैं। वे कारण क्या हैं? जब मैंने इसकी पड़ताल की तब पाती हूं. कुछ उत्तर जो खुद उन्होंने स्वयं दिए हैं या उनके अभिभावकों ने दिए हैं- वहां जाकर युवा अपने सपनों को साकार करने की जमीन पाते हैं। सपने को पूरा करने के लिए वहां की आधारभूत संरचना अच्छी है। नौकरी के अच्छ पैकेज और काम के बदले पूरा पैसा मिलने के साथ रोजमर्रा के कार्यों में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और अपराध स्तर न्यूनतम हैं। वहां की साफ-सफाई, अच्छे मौसम में धुली शांति और सुकून है। अमेरिका विशाल, विविधतापूर्ण, खूबसूरत और साधन संपन्न देश है। वहां के नागरिक मिलनसार हैं और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को पसंद करते हैं। प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्टाचार और रिश्वत जैसी परेशानियां वहां नहीं हैं। प्रशासन सहयोग करता है और उचित अवसर भी प्रदान करता है बशर्ते आप में काम के प्रति जुनून हो।
आप मेहनतकश हों और समय की पाबंदी के साथ नियमों की पालना करने वाले व्यक्ति हों। बेहतर नौकरी, बेहतर जीवन स्तर, बेहतर शिक्षा, बेहतर सुविधाएं, बेहतर अवसर, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लोग यहां रहना पसंद करते हैं। इन सबके अतिरिक्त राष्ट्रीय उद्यानों, जीवंत शहरों और विभिन्न प्रकार की कला-संस्कृति के माध्यम से मौज-मस्ती करने. अन्वेषण करने और सीखने के रोमांचक अवसरों से भरा हुआ है यह देश। केवल भारत ही नहीं, एशिया ही नहीं, दुनिया के प्रत्येक कोने से लोग यहां आते हैं। उच्च शिक्षा पाते हैं। अच्छे रोजगार के अवसर पाते हैं। अलग-अलग देशों से आए हुए लोग एक ही बस्ती में रहते हैं। विश्वस्तर पर युवाओं के लिए सिरमौर बना हुआ है यह देश। ” आगे लिखती हैं, ”  जीवन के उत्तरार्द्ध में मुझे दो बार अमेरिका जाने का अवसर मिला। इसके साथ ही मेरी दो बार अमेरिका से मुलाकात हुई। पहली मुलाकात ने पग-पग पर अधिक विस्मित किया, जबकि अध्ययन और अनुसंधान ने कम। इस बार मुझे पूर्व में किए गए प्रवास का अनुभव था। मैंने भ्रमण में पर्यटन स्थलों को देखते हुए अमेरिका को जानने की कोशिश की है। मेरी अमेरिका यात्रा में कई पड़ाव ऐसे आए, जब मैं अचंभित हुए बिना नहीं रही। ” ( पृष्ठ 25 – 27 )
विश्व प्रसिद्ध नियाग्रा फॉल को फेरी से अंदर तक देखना जितना चित्ताकर्षक लगा उतना ही आश्चर्य हुआ जब यात्रा शुरू होते ही साथ गए जोना और दिया ने पुस्तक खोल कर पढ़ना शुरू किया। आज जब बच्चें मोबाइल पर आँखें गढ़ाए रहते हैं ऐसे में इन बच्चों का पुस्तक प्रेम देख इनके मन को भा गया। बच्चों ने बताया दोनों भाई बहन 15 दिन में सोलन लाइब्रेरी जा कर किताबें लेकर आते हैं। रास्ते में पढ़ने के लिए सात आठ बुक्स रख ली हैं। नियाग्रा फॉल्स को देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं है जिसके ऊंचाई से तेजी से गिरने की आवाज़ दूर से ही सुनाई पड़ती हैं। दुनिया भर के पर्यटक इसे देखने आते हैं। वीजा नहीं होने से इसके दूसरी तरफ स्थित कनाडा को नहीं देखने का इन्हें मलाल रहा। जब की इसकी झील पर बना एक पुल अमेरिका और कनाडा को जोड़ता है। ( पृष्ठ 39 – 43 )
यात्रा के दौरान लेखिका 29 जून 2023 को अपने पोते जीना के साथ पहुंचती हैं सोलन के स्कूल में। यह स्कूल जंगल जैसी प्रकृति के बीच अत्यंत लुभावना आधुनिक स्कूल है। स्कूल के दायीं छोर के बड़े ग्राउंड के बाहर लंबे-लंबे पेड़ों से भरा जंगल है। अगर नीचे से ऊपर देखो तो पेड़ों की घनी डालियां नजर आती हैं जिनके बीच थोड़ा-सा आसमान झांकता दिखाई देता है। इस जंगल में रंग-बिरंगी कई तरह की चिड़िया, गिलहरी, खरगोश और कभी-कभी हिरन भी घूमते हैं। बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ – साथ सभी प्रकार के खेल के मैदान हैं। स्कूल अवलोकन के दौरान जोना की बाल सुलभ अठखेलियां कभी साइकिल चलाना तो कभी पैरों की ठोकर से फुटबॉल से खेलना आदि को रोचक तरीके से प्रस्तुत किया है। स्कूल में दी जाने वाली शिक्षा के महत्व का पर इसी बात से चलता है कि जोना  जान गया है कि पृथ्वी और प्रकृति कितनी मायने रखता है। जीवन के लिए पर्यावरण कितना अनमोल है। अच्छे पर्यावरण के लिए पेड़-पौधे, जीव-जंतु कितने आवश्यक हैं। वह कभी कचरा इधर-उधर नहीं फेंकता, उसे डस्टबिन में डालता है। चलते हुए रास्ते में आने वाले पौधों के फूल और पत्तियों भी नहीं तोड़ता। इस स्कूल पर फोकस कर अमरीका के स्कूलों के बारे में जानकारियां पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया। ( पेज 44 – 48 )
शिकागो के मिलेनियम पार्क का नज़ारा में लेखिका ने शुरुआत स्वामी विवेकानंद के प्रथम विश्व संसद के भाषण से करते हुए खुशी जताई है कि जिसे किताबों में पढ़ा था आज 30 जून 2023
को देखने का सपना सच्च होगा। पार्क में सफेद सीगल पक्षी लुभाता है पर ये मानव पर अटैक करते है इस लिए इस से बचने के लिए वहां समुद्र के किनारे लोग हेलमेट या अन्य की सुरक्षा कवच लगाते हुए दिखाई देते हैं। अमरीका के इस खूबसूरत शहर की तमाम खूबियों से परिचय कराते हुए मिलेनियम झील के अद्भुत सौंदर्य का वर्णन किया है जिसे पढ़ कर हर किसी के दिल में इसे देखने की इच्छा जागृत होती है।  द बीन, क्राउन फाउंटेन, एवं रिवर वे मुख्य आकर्षण हैं। एक खंभे पर ” हॉनरेरी स्वामी विवेकानंद” लिखा देख कर भान हुआ कि विदेश में घूमते हुए भी स्वदेश पीछा नहीं छोड़ता । भारत माँ कहीं ना कहीं मन में बस्ती हैं। मिशिगन ग्रांट पार्क में दुनिया का महान संग्रहालय ” कला संस्थान” देख कर लगा यहां कि इसमें विश्व भर की रचनात्मक कृतियां हैं।
प्रसिद्ध चित्रकारों के पेंटिंग्स और दुर्लभ मूर्तियों का बड़ा खजाना है।( पृष्ठ 49 – 54 ) आगे शिकागो का विस्तृत वर्णन करते हुए लिखती हैं, ” अमेरिका में वास्तुशिल्प, कला, संगीत,चित्रकारी,विज्ञान, तकनीक, पर्यटन, होटल, रेस्टोरेंट, झील,नदी, प्रकृति और संस्कृति हर दृष्टि से शिकागो   इलिनॉयस एक संपन्न और धनाढ्य शहर है।( पेज 58)
 धुएं की गंध भरा लंच इनका एक यादगार लम्हा है । हमें याद दिलाता हैं  भोजन पकाने की परम्परागत विधि का जब रोज ही खाना चूल्हे और कोयलों पर बनता था धुएं की सुगंध के साथ। उसको छोड़कर आगे बढ़ते हुए गैस के चूल्हे को खुशी-खुशी अपना लिया। गैस और कुकर में पका खाना जीवन का हिस्सा बन गया। चूल्हा और अंगीठी कब रसोई से विदा हुए पता ही नहीं चला। छोटी उम्र तक अंगीठी पर खाना बनाया था तब न जाने हाथों के काले होने या सिगड़ी से राख फैलने, कोयल के चटकने से कई बार चिंगारी उछलने से जल जाना परंतु इसकी कोई परवाह नहीं होती थी। आज कोयले की अंगीठी रसोई में वर्जित हो गई है क्योंकि वह धुआं करती है और उसकी राख उड़‌ती है। अब कौन कोयले से हाथ गंदे करे। नए फैशन में हाथों में कपड़े के दस्ताने पहन लिए गए हैं भोजन सेकने के लिए। पुरानी भोजन पकाने की विधि को अमेरिका में नया नाम ” बारबेक्यू” रख दिया, और जब इस पर पका भोजन किया तो धुएं की गंध से भरा लंच पुरानी यादों में ले गया, जिसे बड़े ही स्वाद से हमने किया। (  पृष्ठ 169 – 170 )
     पुस्तक में लेखिका द्वारा की गई दो बार की अमेरिका यात्रा को तीन भागों में पाठकों के सामने लाया गया है। प्रथम भाग : अमेरिका प्रवास (14 जून से 27 जुलाई 2023) और दूसरा भाग अमेरिका प्रवास (14 जून से 28 अगस्त 2016) । उपरोक्त कतिपय वृतांत के साथ – साथ डब्ल्यूसीएच आर टिकट यात्रा सोलन में प्रवास, हिंदी प्रेम का पहला दिन, जंगल में मंगल की बयार,  स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या, सनातन की सुगंध का रविवार  ऐरी लेक झील की सुहानी शाम, हॉकिंग हिल्स स्टेट पार्क का भ्रमण, कोलंबस स्टैचू से मिलना,  सैन डिएगो यात्रा का लुफ्त, अमेरिका की माया नगरी, मिड-वे ब्रास्टो सिटी, मरुस्थल में नखलिस्तान, हूवर डेम की अद्भुत रचना और  बाल्बोआ पार्क की दुनिया प्रथम भाग के आकर्षण हैं।
       दूसरे भाग मेंअमेरिका का आदर्श परमा, वायु सेवा का राष्ट्रीय संग्रहालय, अमेरिका का दिल,  नासा का रोमांचक भ्रमण, कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र, यूनिवर्सल स्टूडियो की सैर, कोकोआ बीच का आनंद, न्यूयॉर्क की रौनक, स्टैचू ऑफ लिबर्टी, कूयाहोगा वैली नेशनल पार्क एवं हरी-भरी गोद में द्वीप के माध्यम से पाठक को अमेरिका घूमने का मौका मिलता है।
    तीसरे भाग में संजोई हैं छोटी – छोटी स्मृतियों की क्षणिकाएं जिन्हें उन्होंने वहां जिया, महसूस किया और वे यादों के साथ भारत आ गई । इस भाग में  वेलकम माँ-पापा, मिड-बेब्रास्टो सिटी मन हुआ धुआं-धुआ,मरुस्थल में नखलिस्तान ,हूवर डेम की अद्भुत रचना, बाल्बोआ पार्क की दुनिया, कैसे बचेगी खीर, शॉपिंग मॉल की आधुनिकता, टिया का जन्मदिन, लिव-इन रिलेशनशिप,कुत्ते पालने का शौक,अमेरिका में कड़े नियमों का प्रावधान, ट्रेलर पार्क के सुख-दुःख, अमेरिका का आदर्श परमा,सब समयका खेल , वायु सेवा का राष्ट्रीय संग्रहालय और खुशियों भरे पल प्रमुख शीर्षक हैं।
पुस्तक में साहित्यकार व इंजीनिथर दिनेश कुमार माली कनिहा क्षेत्र,महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड, तालचेर, ओड़िशा के महाप्रबंधक (खनन) अपने मत में  लिखते हैं, ” अमेरिका से मुलाकात’ यात्रा-संस्मरण की खासियत यह है कि विमला दीदी अपने अमेरिका प्रवासी बेटे निखिल के घर सात साल के अंतराल में दो बार यात्राएँ की और इस पुस्तक में न केवल उन दोनों यात्राओं का तुलनात्मक वर्णन किया है, बल्कि दूसरी यात्रा के दौरान अन्य कई नई जगहों की यात्राओं के संस्मरणों को भी जोड़ा है। वे लिखती है कि उनकी पोती टिया वहाँ चीनी भाषा पढ़ती है, मगर हिंदी नहीं। तब लेखिका उन्हें हिन्दी भाषा पढ़ने हेतु प्रेरित करने के लिए साइंस फिक्शन और रहस्यमयी फंतासी कलम के जादूगर जीशान जैदी के बाल उपन्यास ‘मायावी गिनतियां’ के पांच भाग देती हैं और अपने सानिध्य में रखकर हिन्दी भाषा पढ़ना सीखाती है। 15 दिन के भीतर वे बच्चे टूटी-फूटी हिंदी बोलना शुरू कर देते हैं तो लेखिका उसे अपनी फर्ज अदायगी की सफलता मानती हैं। अवश्य, अगर हमारे अग्रज बच्चों पर ध्यान दें तो हमारी संस्कृति, हमारी भाषा हमारा खान-पान कुछ हद तक अक्षुण्ण रखा जा सकता है। “
 किशनगढ़ राजस्थान के शिक्षाविद् और साहित्यकार डॉ. सतीश कुमार लिखते हैं, “पुस्तक के तीनों भाग वैसे तथ अलग-अलग है, परन्तु वे हकीकत में तो एक दूसरे से गूंधे हुए हैं। एक भाग के बिना दूसरा भाग अधूरा-सा लगता है। इस पुस्तक के निर्माण में लेखिका में अवश्य ही अथाह प्रयास किया है। यह उनके अनुभव और शोध का परिणाम है। उन्होंने अमेरिकी संस्कृति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को भी जगह-जगह उकेरा है। इसे पढ़ते वक्त अमेरिका के स्थल आंखों के सामने तैरने लग जाते हैं, क्योंकि भाषा में प्रारम्भ से लेकर अंत तक प्रवाह है। पुस्तक का शीर्षक और आवरण यात्रा अनुकूल है। आशा है, यह पुस्तक यात्रा साहित्य जगत में अमेरिका के संदर्भ में उपयोगी साबित होगी और उपयोगी उपस्थिति दर्ज कराएगी।”
व्हाट्सअप और पाठक से प्राप्त फीडबैक भी सम्मिलित किए गए हैं। जगह-जगह पर अमेरिका यात्रा के श्वेत श्याम चित्र पुस्तक का महत्व बढ़ाते हैं। अंत में लेखिका का परिचय उनके सृजन यात्रा को दर्शाता है। कवर पेज विषय के अनुरूप  सफेद रंग की जमीन पर अत्यंत आकर्षक बना है, इसके चित्र स्वयं अमेरिका से मुलाकात कराते प्रतीत होते हैं।
  पुस्तक की खासियत है सरल भाषा में दृष्टांतों का प्रस्तुतीकरण। हर दृष्टांत को मन की भावनाओं के साथ इस प्रकार लिखना की पाठक को लगता है जैसे वह इनके साथ – साथ स्वयं भी यात्रा कर रहा है और पाठक में मन अमेरिका देखने की उत्सुकता जगाती है, यही लेखिका के लेखन की सफलता की कुंजी है। कृति बच्चों और बड़ों के लिए समान रूप से उपयोगी है, जिसका पाठक भरपूर स्वागत करेंगे।
पुस्तक : अमेरिका से मुलाकात ( यात्रा साहित्य)
लेखक : डॉ. विमला भंडारी, सलूंबर, राजस्थान
प्रकाशन : अद्विक पब्लिकेशन, पटपड़गंज, दिल्ली
प्रकाशन वर्ष : 2025
पृष्ठ : 184
पेपर बैंक
मूल्य : 280 ₹
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