कोटा / कोटा की साहित्यकार डॉ. कृष्णा कुमारी को आगामी 20 अप्रैल को डेह ( नागौर ) में ” मायड़ भाषा पुरस्कार – 2025″ से सम्मानित किया जायेगा। उन्हें यह पुरस्कार उनकी राजस्थानी भाषा की कृति “अस्यो छै म्हारो गाँव ” के लिए प्रदान किया जाएगा।
इनके द्वारा लिखी पुस्तक’अस्यो छ म्हारो गांव’ पर डॉ. हरिकृष्ण शर्मा कहते हैं, ” बहुत शानदार भावों की पकड़ व भावाभिव्यक्ति सुंदर व्यंजना हृदय को छूते विषय । क्या ही भाषा मुक्तछंद में भी सुंदर लालित्य । ज्वांईसा ,संकर्यात,सख्यो सोमार, धरमकरम,थां ई जांणों सबसे पहले ये कविताएं जब पढ़ी तो राजस्थानी मंचीय कवियों को सुनकर जो मेरी धारणा बनी थी वह बिल्कुल बदल गई। मुझे लगा राजस्थानी में भी बहुत कुछ भावपरक लिखा जा रहा है। शब्द और अर्थ से परे जो ध्वनि आपके काव्य की है वह बहुत कबीले तारीफ है। कविता के विषय आंखों के आगे चित्रित से हो जाते है,आपकी हर कविता जन – मन के भावों की अभिव्यक्ति है। एक श्रेष्ठ कवि की पहचान भी यही है कि जो कोई भी उसके काव्य को पढ़ें तो उसे लगे कि ऐसा तो हम भी लिख सकते है परन्तु लिखने बैठे तो एक कदम भी आगे न बढ़ सके। यहीं सादगी ही आपकी कविताओं का अलंकार है। “

