भारतवासियों, एक बात गांठ बांध लो कि गजवा ए हिंद के नारे का उद्भव तुर्की से हुआ था। कोई इतिहासकार आपको यह नहीं बताएगा। कोई यह भी नहीं बताएगा कि अपने आपको इस्लाम का गाजी कहने वाले वो सिपाही जिनका उदेश्य काफिरों को कत्ल करना, उनका धर्म परिवर्तन करवाना, उन्हें गुलाम बनाना और उनके धर्म स्थलों को तोड़ना है , ये तुर्की से ही पैदा हुए थे। यहीं से इन्होंने यूरोप की ओर कूच किया था और यहीं से हिंदुस्तान की तरफ भी बढे थे। मीर कासिम, मुहम्मद गजनवी और मोहम्मद गोरी तुर्की की ही पैदाइश थे। इससे शर्म की बात नहीं हो सकती कि भारत के इतिहासकार मोहम्मद हबीब, निजामी, इरफान हबीब, अलीगढ़ का इतिहास विभाग और हिंदुस्तान में फैले इनके शैक्षिक दलाल इन्हें मात्र लुटेरा बता कर इनके उद्देश्यों और क्रूरताओं पर लगातार पर्दा डालते रहे हैं और आगे भी डालते रहेंगे।
इसमें साम्यवादी इतिहासकारों ने भी बढ़ चढ़ कर इनका साथ दिया है। बेशर्मी की हद तो इस कदर सारी सीमाएं लांघ चुकी है कि चीन के इशारों पर साम्यवादियों ने अभी कल ही कलकत्ता में भारतीय सेना की विरुद्ध चिल्ला-चिल्ला कर प्रदर्शन किया कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में निर्दोष बच्चों और नागरिकों को भारतीय सेना ने मारा है| वास्तव में इन लोगों ने हमेशा हमारे वीर योद्धाओं का अपमान किया हैं और उन्हें इतिहास से लगातार मिटाने का प्रयास किया है|
आज तुर्की में सत्ता की हवस से पागल एक ऐसा कट्टरवादी बैठा है जो एक बार फिर खलीफा बनना चाहता है| आज दुनिया भर में जितने भी इस्लामिक आतंकी संगठन हैं, चाहे वो हमास हो, हूति हो, हिजबुल्लाह हो, अल कायदा हो, जैश-ए-मोहम्मद हो, लश्कर-ए-तैयबा या दुनिया भर के देशों में फैला कोई और ऐसा संगठन, मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ की ये सब अलग-अलग नाम एक बहकावा मात्र है| इनका कमांड सेंटर तुर्की है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की जिस तरीके से इन इस्लामिक आतंकियों को बचाने के लिए सामने आया, जी हां आतंकियों को पाकिस्तान को नहीं, यह इस बात का जीता जागता सबूत हैं| आज भी पाकिस्तानी तुर्की को ही अपना खलीफा मानते हैं| धर्म परिवर्तन कर के उन्हें हिंदुस्तान में मुसलमान बनाया गया था लेकिन ये अपने को तुर्क और अरब की औलादे मानते हैं| यह अलग बात है कि लगभग सभी इस्लामिक देश इनको भिखारी मानते हैं और अब वीजा देना तो छोड़ो इन्हें वापस पाकिस्तान पैक कर भेज देते हैं|
एक और महत्वपूर्ण बात पर ध्यान दीजिये कि इस्लाम की दुहाई देने वाला तुर्की उस समय कहा गायब था जब सन 70-71 में बंगाली मुस्लिम औरतों का पाकिस्तानी सैनिक बलात्कार कर रहे थे और आज भी बलोचों पर, सिंधियों पर और पाक अधिकृत कश्मीर में जो अत्याचार मुसलमानों के साथ ही पाकिस्तानी कर रहे है ,जब जॉर्डन में पाकिस्तानी जनरल जिअ ने २०००० हमास वाले मारे थे ? उस पर तुर्की की जबान नही खुलेगी|
असल में ये उस खून की पैदाइश है कि खलीफा बनने के लिए, सल्तनत हासिल करने के लिए या बादशाह बनने के लिए चाहे भाइयों के सर धड़ से अलग करों या बाप को जेल में रखो, तो फिर आम मुसलमान इनके लिए क्या मायने रखता है| उसको तो इनके कट्टर मुल्ले सिर्फ हूरों के पास जाने का रास्ता बताते है| अब इन्हें कौन बताएं की भैया हूरों का भी अकाल पड़ गया हैं इतने ऊपर भेजे हैं, की सेवानिवृत हूरों को भी वापस सेवा में लाने के बाद, हूरों की छुट्टियाँ ख़तम कर देने के बावजूद भी वहाँ हूरों का अकाल पड़ गया हैं और अब तो खबर ये हैं की हूरों की भी राशनिंग कर दी गयी है| अब पता नही 72 की जगह 7 बट रही है या 2 या कोई 7+2 कर के 9 हूरों का फार्मूला बना दिया गया है|
तुर्की अपने ड्रोन बेच कर अच्छे खासे पैसे कमा रहा था और आज हमारे ऑपरेशन सिंदूर ने उसका ड्रोन का बाज़ार भी ख़तम कर दिया| ऐसे तोड़ा हैं उनको कि पाकिस्तान से लेकर तुर्की तक हाय तौबा मची हुई है| तो अब देखते है की तुर्की इनको और क्या बेचता है क्योंकि आज भी तुर्की वही 11वीं शताब्दी का अपना गजवा-ए-हिन्द का सपना पूरा करना चाहता है| तो तुर्की के खलीफा हिम्मत है तो खुल के सामने आ क्योंकि अब अगली बारी उन्हें ठोकने की है जो पाकिस्तान का साथ दे रहे हैं|
एक बात मैं और यहाँ पर स्पष्ट कर दूँ कि जब पाकिस्तानी ये दावे करता है कि उनके यहाँ कोई आतंकी नहीं हैं और न ही कोई आतंक की फैक्ट्री हैं और न ही वो आतंक को शरण देते हैं तो वो बिलकुल सही कह रहे है क्योंकि जिन्हें दुनिया आतंकी कहती है वो इनके लिए इस्लाम में गाजी हैं और इनका हर मदरसा इन गाजियों को पैदा करने में लगा हुआ है ताकि अब केवल गजवा-ए-हिन्द ही नहीं बल्कि ये गजवा-ए-यूरोप, गजवा-ए-इंग्लैंड, गजवा-ए-अफ्रीका और गजवा-ए-कनाडा को भी अंजाम दे सकें| यहीं कारण है की इनके द्वारा छेड़ी गयी जिहाद केवल तलवार और बंदूक से की गई जिहाद नहीं हैं बल्कि इस जिहाद के लिए नए-नए तरीके इजाद किये गये है और किये जा रहे हैं| अंत में मैं ये कहूँगा की आज मनुष्य जाति को, मानवता को और विभिन्न संस्कृतियों को नष्ट होने का जितना खतरा एटम बम से नहीं है उससे अधिक खतरा कट्टरवादी तुर्की और पाकिस्तान के इस्लामिक जिहादियों से है| इन कठ मुल्लाओं के फतवों और खुलेआम दी जा रही इन धमकियों से कि इस्लाम सारी दुनिया पर राज करेगा, कब तक दुनिया खुद को अँधा, गूंगा और बहरा बनाए रखेगी?
(लेखक जाने माने इतिहासकार व राजनतीिक विश्लेषक हैं)
साभार- htt ps://x.com/ProfKapilKumar/ status/ से

