Homeभारत गौरवबानू मुश्ताक ने संवेदनशील कहानियोँ से जीता बुकर पुरस्कार

बानू मुश्ताक ने संवेदनशील कहानियोँ से जीता बुकर पुरस्कार

भारतीय लेखिका, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता  बानू मुश्ताक ने अपनी किताब ‘हार्ट लैंप’ के लिए इंटरनेशनल बुकर प्राइज जीता है। हार्ट लैंप कन्नड़ भाषा में लिखी पहली किताब है, जिसे बुकर प्राइज मिला है। दीपा भष्ठी ने इसे अंग्रेजी में ट्रांसलेट किया है।

बुकर प्राइज के लिए हार्ट लैंप को दुनियाभर की छह किताबों में से चुना गया। यह अवॉर्ड पाने वाला पहला लघु कथा संग्रह (शॉर्ट स्टोरी कलेक्शन) है। दीपा भष्ठी इस किताब के लिए अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय ट्रांसलेटर हैं। बानू मुश्ताक और दीपा भष्ठी ने मंगलवार को लंदन के टेट मॉडर्न में हुए कार्यक्रम में 52.95 लाख रुपए की पुरस्कार राशि भी मिली है, जो लेखक और ट्रांसलेटर के बीच बराबर-बराबर बाँट दी जाएगी।

बुकर पुरस्कार विजेता भारती लेखिका  बानू मुश्ताक की पुस्तक  “हार्ट लैंप”   न केवल एक साहित्यिक उपलब्धि है, बल्कि यह भारतीय क्षेत्रीय साहित्य और अनुवाद की शक्ति का प्रतीक है। उनकी कहानियाँ सामाजिक परिवर्तन और महिलाओं की आवाज को वैश्विक मंच पर ले जाने का एक शक्तिशाली माध्यम बनीं।

बानू मुश्ताक का जन्म 1948 में कर्नाटक के हसन में एक बड़े मुस्लिम परिवार में हुआ। उन्होंने उर्दू और कन्नड़ दोनों भाषाओं में शिक्षा प्राप्त की। उनके पिता, एक सरकारी कर्मचारी, ने उन्हें कन्नड़-माध्यम कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ाया, जिसने उनकी साहित्यिक आवाज को आकार दिया।

बानू एक लेखिका, वकील, और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों, दलित आंदोलन, और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर काम किया। उनकी लेखनी आत्मकथात्मक और सामाजिक रूप से प्रासंगिक है, जो कर्नाटक की मुस्लिम और दलित महिलाओं के जीवन को दर्शाती है।
उनकी कहानियाँ कन्नड़ साहित्य में प्रगतिशील विचारों के लिए जानी जाती हैं। उनकी रचनाएँ सामाजिक रूढ़ियों, धर्म, और लैंगिक असमानता जैसे विषयों को संबोधित करती हैं।

पुस्तक “हार्ट लैंप” (Heart Lamp) के बारे में
“हार्ट लैंप” 12 लघु कहानियों का संग्रह है, जो 1990 से 2023 के बीच कन्नड़ भाषा में लिखी गईं। ये कहानियाँ दक्षिण भारत, विशेष रूप से कर्नाटक, में मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों के रोजमर्रा के जीवन, उनकी चुनौतियों, और उनकी लचीलापन को चित्रित करती हैं।  अनुवाद: इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद दीपा भाष्थी ने किया, जिन्होंने कन्नड़, उर्दू, और अरबी शब्दों को बनाए रखकर अनुवाद में “कन्नड़ की गूंज” को जीवित रखा।

यह पहली कन्नड़ भाषा की पुस्तक और पहला लघु कहानी संग्रह है, जिसने 2025 का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार जीता।
यह पुरस्कार 20 मई, 2025 को लंदन में घोषित किया गया, जिसमें लेखिका और अनुवादक ने £50,000 (लगभग $66,000) की पुरस्कार राशि साझा की।
यह दूसरी भारतीय पुस्तक है, जिसने हाल के वर्षों में यह पुरस्कार जीता, पहली थी गीतांजलि श्री की “टॉम्ब ऑफ सैंड” (2022)।

इनकी  कहानियाँ धर्म, जाति, लिंग असमानता, और सामाजिक उत्पीड़न जैसे विषयों को उजागर करती हैं, साथ ही महिलाओं की सहनशक्ति और छोटे-छोटे विद्रोहों को दर्शाती हैं।

जजों ने इसे “अंग्रेजी पाठकों के लिए वास्तव में नया” और “जीवंत, उत्साहवर्धक” बताया। कहानियों में “ठोस कहानी कहने, अविस्मरणीय पात्र, और जीवंत संवाद” की प्रशंसा की गई।
प्रकाशन: मूल रूप से 1990-2023 के बीच लिखी गईं, ये कहानियाँ अंग्रेजी में “And Other Stories” प्रकाशन द्वारा 2024 में प्रकाशित हुईं।

बानू मुश्ताक पहली कन्नड़ लेखिका हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला, जिसने भारतीय क्षेत्रीय साहित्य को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई।
उन्हें पहले कर्नाटक साहित्य अकादमी पुरस्कार और दाना चिंतामणि अट्टिमब्बे पुरस्कार जैसे सम्मान प्राप्त हुए।
उनकी कहानियाँ उपेक्षित समुदायों, विशेष रूप से मुस्लिम और दलित महिलाओं की आवाज को बढ़ावा देती हैं। उनकी स्वीकृति भाषण में उन्होंने कहा, “यह मेरी जीत नहीं, बल्कि उन अनसुनी आवाजों का सम्मान है।”
बानू ने रूढ़िवादी समाज में कई चुनौतियों का सामना किया। मिडिल स्कूल में लेखन शुरू करने पर उनके रिश्तेदारों ने उनके पिता को चेतावनी दी कि वह “परिवार की बदनामी” करेगी। लेकिन उनके पिता ने उनका समर्थन किया।  उन्हें आत्महत्या और हत्या की कोशिशों जैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने लेखन और सामाजिक कार्य जारी रखा।
बुकर और पुलित्जर पुरस्कार में अंतर 

कर पुरस्कार और पुलित्जर पुरस्कार साहित्य के क्षेत्र में दो प्रतिष्ठित पुरस्कार हैं, लेकिन इनके उद्देश्य, पात्रता, और संरचना में महत्वपूर्ण अंतर हैं। नीचे इनके बीच प्रमुख अंतर हिंदी में संक्षेप में दिए गए हैं:

मैन बुकर पुरस्कार: यह पुरस्कार हर साल अंग्रेजी में लिखे गए और यूनाइटेड किंगडम या आयरलैंड में प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ उपन्यास को दिया जाता है।

अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार: यह किसी भी भाषा में लिखे गए उपन्यास या लघु कहानी संग्रह को दिया जाता है, जो अंग्रेजी में अनुवादित हो और यूके या आयरलैंड में प्रकाशित हो। इसका फोकस अनुवादित साहित्य को बढ़ावा देना है।

फोकस: समकालीन कथा साहित्य (उपन्यास या कहानियाँ)।

  • पुलित्जर पुरस्कार:
    • यह अमेरिकी पत्रकारिता, साहित्य, और संगीत रचना के लिए दिया जाता है। साहित्य में यह उपन्यास, कविता, नाटक, गैर-कथा, जीवनी, और इतिहास जैसे कई क्षेत्रों को कवर करता है।
    • फोकस: साहित्य के साथ-साथ पत्रकारिता और संगीत, विशेष रूप से अमेरिकी संदर्भ में उत्कृष्टता।
  • बुकर पुरस्कार:
    • मैन बुकर: लेखक को राष्ट्रमंडल देशों, आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, या जिम्बाब्वे का नागरिक होना चाहिए (2014 से नियम बदलकर सभी अंग्रेजी लेखकों के लिए खुला)।
    • अंतरराष्ट्रीय बुकर: किसी भी देश का लेखक पात्र है, बशर्ते उनकी रचना अंग्रेजी में अनुवादित हो और यूके/आयरलैंड में प्रकाशित हो।
    • केवल जीवित लेखकों को पुरस्कार मिलता है।
  • पुलित्जर पुरस्कार:
    • मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों या अमेरिका में रहने वाले लेखकों/पत्रकारों के लिए, जिनकी रचनाएँ अमेरिकी संदर्भ से संबंधित हों।
    • कुछ श्रेणियों में गैर-अमेरिकी भी पात्र हो सकते हैं, लेकिन रचना का अमेरिकी प्रकाशन और संदर्भ जरूरी है।
    • मरणोपरांत पुरस्कार संभव नहीं है (कुछ अपवादों को छोड़कर)।
  • बुकर पुरस्कार:
    • केवल कथा साहित्य (उपन्यास या लघु कहानी संग्रह)।
    • मैन बुकर: एकल उपन्यास।
    • अंतरराष्ट्रीय बुकर: अनुवादित उपन्यास या कहानी संग्रह।
  • पुलित्जर पुरस्कार:
    • साहित्य में कई श्रेणियाँ: कथा, गैर-कथा, कविता, नाटक, जीवनी/आत्मकथा, और इतिहास।
    • पत्रकारिता में कई श्रेणियाँ (जैसे खोजी पत्रकारिता, राष्ट्रीय समाचार) और संगीत में भी पुरस्कार।

4. भौगोलिक दायरा

  • बुकर पुरस्कार:
    • वैश्विक, विशेष रूप से ब्रिटिश राष्ट्रमंडल और अनुवादित साहित्य पर जोर।
    • अंतरराष्ट्रीय बुकर विश्व की किसी भी भाषा को शामिल करता है।
  • पुलित्जर पुरस्कार:
    • मुख्य रूप से अमेरिकी केंद्रित, रचनाएँ अमेरिकी जीवन, संस्कृति, या मुद्दों से संबंधित होनी चाहिए।

5. पुरस्कार राशि

  • बुकर पुरस्कार:
    • मैन बुकर: £50,000 (लगभग ₹52 लाख) विजेता को।
    • अंतरराष्ट्रीय बुकर: £50,000, जो लेखक और अनुवादक के बीच बराबर बाँटा जाता है।
  • पुलित्जर पुरस्कार:
    • अधिकांश श्रेणियों में $15,000 (लगभग ₹12.5 लाख), लेकिन सार्वजनिक सेवा पत्रकारिता में स्वर्ण पदक दिया जाता है।
    • राशि बुकर की तुलना में कम, लेकिन प्रतिष्ठा बहुत ऊँची।

  • बुकर पुरस्कार:
    • बुकर प्राइज फाउंडेशन द्वारा संचालित, जो यूके में आधारित है।
    • जजों का पैनल हर साल बदलता है, जिसमें साहित्यिक विशेषज्ञ, लेखक, और आलोचक शामिल होते हैं।
  • पुलित्जर पुरस्कार:
    • कोलंबिया यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क द्वारा प्रशासित।
    • विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग-अलग जूरी, जिसमें विशेषज्ञ और पूर्व विजेता शामिल हो सकते हैं।

उदाहरण

  • बुकर पुरस्कार:
    • मैन बुकर: सलमान रुश्दी की “मिडनाइट्स चिल्ड्रन” (1984), अरुंधति रॉय की “द गॉड ऑफ स्मॉल थिंग्स” (1997)।
    • अंतरराष्ट्रीय बुकर: बानू मुश्ताक की “हार्ट लैंप” (2025), गीतांजलि श्री की “टॉम्ब ऑफ सैंड” (2022)।
  • पुलित्जर पुरस्कार:
    • कथा: टोनी मॉरिसन की “बिलव्ड” (1988), कोलसन व्हाइटहेड की “द अंडरग्राउंड रेलरोड” (2017)।
    • पत्रकारिता: न्यूयॉर्क टाइम्स की खोजी रिपोर्टिंग।
  • बुकर पुरस्कार कथा साहित्य (उपन्यास और अनुवादित कार्य) पर केंद्रित है, वैश्विक दृष्टिकोण के साथ, और मुख्य रूप से यूके से जुड़ा है।
  • पुलित्जर पुरस्कार साहित्य, पत्रकारिता, और संगीत में व्यापक श्रेणियों को कवर करता है, लेकिन इसका फोकस अमेरिकी संदर्भ पर है।
  • दोनों पुरस्कार साहित्य में उत्कृष्टता का प्रतीक हैं, लेकिन बुकर का दायरा वैश्विक और कथा-केंद्रित है, जबकि पुलित्जर अमेरिका-केंद्रित और विविध क्षेत्रों को शामिल करता है।
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