वेव्स 2025 में भारत पैवेलियन ने भारत की कहानी कहने की परंपराओं और नवाचारों का बहु-संवेदी उत्सव पेश किया। इसने विरासत में निहित और भविष्य की ओर देखने वाले एक रचनात्मक शक्ति के रूप में भारत की पहचान की पुष्टि की।
भारत मंडप ने भारत की आत्मा को प्रस्तुत किया, जिसमें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को तकनीकी प्रगति के नए प्रयोगों के साथ संतुलित किया गया। वेव्स 2025 के उद्घाटन के दिन, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मंडप का दौरा किया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, विदेश मंत्री श्री एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव और कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मंडप का दौरा किया और भारत की गाथा का वर्णन करने में इसकी भूमिका की सराहना की। बड़ी संख्या में लोग मंडप में पहुंचे और देश के कई समृद्ध खजानों के बारे में जानकर विस्मय और आश्चर्य में पड़ गए।
भारत की रचनात्मक यात्रा का जश्न मनाते हुए, भारत मंडप केवल विषय-वस्तु की प्रदर्शनी न होकर एक रचनाकार के रूप में भारत की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति थी। इसने भारत की सांस्कृतिक गहराई, कलात्मक उत्कृष्टता और वैश्विक कहानी कहने में उभरते प्रभाव को दर्शाया। मंडप को चार विषयगत क्षेत्रों में बांटा गया था, जिनमें से प्रत्येक भारत की रचनात्मक विरासत के एक अलग आयाम को दर्शाता है:
श्रुति – मौखिक परंपराओं पर आधारित: भारत की प्राचीन मौखिक कथा विरासत का सम्मान करते हुए, इस क्षेत्र ने पता लगाया कि कैसे लय और माधुर्य सामूहिक स्मृति को संरक्षित करते हैं।
मुख्य हाइलाइट्स:
● गुरु-शिष्य परम्परा: मौखिक ज्ञान प्रणालियों को श्रद्धांजलि।
● रहस्यमय फुसफुसाहट: वैदिक मंत्र और आध्यात्मिक परंपराएँ।
● धुन : धुनों का संग्रहालय: शास्त्रीय भारतीय वाद्ययंत्रों का प्रदर्शन।
● लोक प्रति ध्वनियाँ: लोक संगीत की मनमोहक ध्वनियाँ।
● संगीत स्वर लहरें बनाना: गौहर जान से लेकर वैश्विक उस्तादों तक।
● स्पॉटिफाई स्टेज: अमान अली बंगश, अयान अली बंगश और परिवार के छोटे सदस्यों द्वारा सजीव शास्त्रीय प्रदर्शन।
● इंडिया ऑन एयर: आकाशवाणी की विरासत।
● प्लेबैक नेशन: प्रतिष्ठित पार्श्व गायन के 100 साल।
● कैसेट टू क्लाउड: संगीत प्रारूपों का विकास।
● पॉडकास्ट सेंट्रल: बोले गए शब्द ऑडियो का विकास।
● विस्पर्स ऑफ़ विजडम: भारत में ऑडियोबुक का विकास।
कृति –
शिलालेख और लिखित परंपरा: इस क्षेत्र ने भारत की सभ्यतागत स्मृति को संरक्षित करने में लिखित शब्द की भूमिका को प्रदर्शित किया।
मुख्य आकर्षण:
● प्रथम संकेत: प्रारंभिक गुफा चित्र और संचार।
● सिंधु की छाप: संवादात्मक सिंधु घाटी का अनुभव।
● सभ्यताओं के पार रामायण: एशिया के माध्यम से महाकाव्य की यात्रा।
● भारत के शिलालेख: अशोक के शिलालेख।
● संरक्षित ज्ञान: प्राचीन पुस्तकालयों से पांडुलिपियाँ।
● धातु के संस्मरण: ताम्रपत्र प्रलेखन।
● प्रिंट की शक्ति: भारतीय पत्रकारिता का उदय।
● भारतीय शेल्फ: प्रतिष्ठित पुस्तकों की संवादात्मक डिजिटल लाइब्रेरी।
● कवर स्टोरी: भारतीय पत्रिकाओं का जश्न।
● कॉमिक्स कॉर्नर: क्लासिक कॉमिक्स से लेकर ग्राफिक उपन्यासों तक।
दृष्टि – दृश्य परंपराएँ
दृश्य कथावाचन पर केंद्रित इस क्षेत्र ने गुफा कला से लेकर आधुनिक सिनेमा के विकास को दर्शाया।
मुख्य आकर्षण:
● कला यात्रा: एलईडी सुरंग के माध्यम से भारत की दृश्य कला के विकास का प्रदर्शन।
● अनन्त लय: हड़प्पा की नृत्यांगना का होलोग्राफिक प्रदर्शन।
● भावना का सार: नवरस का इंटरैक्टिव अन्वेषण।
● नटराज प्रदर्शन: ब्रह्मांडीय नर्तक के रूप में शिव को दृश्य श्रद्धांजलि।
● लोक इतिहास: लोक नृत्य, कठपुतली और आदिवासी भाव।
● अतीत के फ्रेम: फिल्म विकास स्क्रीनिंग।
● वॉल ऑफ फेम: भारतीय सिनेमा के आदर्श का जश्न।
● लाइट्स कैमरा परंपरा: फिल्म निर्माताओं और तकनीशियनों को श्रद्धांजलि।
● टेलीविजन का क्रमिक विकास: दूरदर्शन से लेकर स्ट्रीमिंग युग तक का प्रदर्शन।
क्रिएटर की छलांग
इस क्षेत्र ने भविष्य की कहानी कहने वाली तकनीकों में भारत के नवाचार को प्रदर्शित किया।
मुख्य आकर्षण:
● एआई, एक्सआर, गेमिंग, मेटावर्स और एनिमेशन में भारतीय प्रगति का प्रदर्शन।
● उभरते भारतीय बौद्धिक गुणों का प्रदर्शन।
● कहानी कहने के भविष्य को दर्शाते इंटरैक्टिव डेमो।

