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शनि ग्रह को लेकर काल्पनिक भय

शनि ग्रह को इतना विकृत, इतना डरावना, इतना क्रूर बता दिया जाता है कि आमजन शनि की ढैय्या, शनि की साढ़ेसाती, शनि की दशा/अन्तरदशा जैसे शब्दों को सुनकर ही भयग्रस्त हो जाते हैं।
लेकिन जरा विचार करें! क्या सिर्फ यही है शनि ग्रह का स्वरूप.?? क्या दूसरे ग्रह कोई काम नहीं करते.? क्या आपके कर्म निरर्थक हैं..?? क्या शनि ही मारक है..? क्या दूसरे ग्रह मारक नहीं हो सकते..??
हमें इन प्रश्नों पर तर्कसंगत तरीके से चिंतन करना चाहिए तभी हम शनि ग्रह का वास्तविक मूल्यांकन कर पाएंगे।
शनि ग्रह अत्यंत धीमी गति से चलने वाला ग्रह है इसीलिए इसे शनिश्चर ( शनै:-शनै: का हिन्दी अर्थ – धीरे-धीरे) कहा जाता है। यह सूर्य की एक परिक्रमा करने में लगभग साढ़े 29 वर्ष का समय ले लेता है। यह पृथ्वी तल से नीले रंग का दिखाई देता है, इसीलिए इसके पर्यायवाची शब्द ‘नील’ (नीला) और ‘मन्द’ (धीमा)  भी है।
शनि आकार में बृहस्पति से थोड़ा छोटा है, इसका व्यास लगभग 1426000000 किलोमीटर है। इसका द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में 95 गुना ज्यादा है।
उपर्युक्त सभी प्रमाणिक तथ्यों को हमारे पूर्वजों ने हजारों साल पहले ही रिसर्च करके सिद्ध कर दिया था। हमारे लिए खुशी की बात यह है कि आधुनिक विज्ञान भी अपने परीक्षणों में इसे नहीं नकार पाया है।
एक बात तो स्पष्ट है कि शनि ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी की तुलना में 95 गुना अधिक है इसलिए इसका गुरुत्वाकर्षण बल भी पृथ्वी से ज्यादा होगा। इसकी चुम्बकीय तरंगों का प्रभाव भी पृथ्वी पर तीव्रता के साथ पड़ेगा। इन तरंगों का प्रभाव मन मस्तिष्क शरीर पर अवश्य पड़ता है और हमारे जीवन के अच्छे बुरे परिणाम भी प्रभावित होते हैं। लेकिन हमें यह बात भली-भांति समझ लेना चाहिए कि ग्रहों के सकारात्मक/ नकारात्मक परिणाम हमारी कुंडली की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। इसलिए शनि अमंगलकारी नहीं, मंगलकारी भी हो सकता है। यह दुःखकारक नहीं, सुखकारक भी हो सकता है। यह अशांति कारक नहीं, शान्ति कारक भी हो सकता है। यह बाधाकारक नहीं, बाधानाशक भी हो सकता है। बस यह इस बात पर निर्भर करेगा कि हमारी कुंडली में शनि की स्थिति क्या है। आपकी कुंडली कुछ और नहीं बल्कि जब आप पैदा हुए थे उस समय की ब्रह्मांड की स्थिति है। जब आप पृथ्वी के वायुमंडल के सम्पर्क में आए तो समस्त ग्रहों की तरंगों का प्रभाव आप पर पहुंच गया और आपकी कुंडली की प्रकृति तैयार हो गई। समस्त ग्रहों की ऊर्जाएं आपको उसी आधार पर प्रभावित करेंगी।
इसलिए हमारा तो यही सुझाव है कि ज्योतिष को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास करें। इससे आप किसी भी प्रकार के भय या भ्रांति से बचे रहेंगे। ज्योतिष आपके कर्म-क्षेत्र में सच्चा पथ प्रदर्शक सिद्ध हो सकता जो आपके उज्जवल भाग्य का निर्माण करेगा।सौरभ दुबे (Astro Consultant)
काशी/बनारस/वाराणसी

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