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शब्द संपदा से अभिसिंचित हूँ मैं …

साहित्य,संस्कृति,मीडिया फोरम कोटा द्वारा मई अंक के “अनुनाद ई मासिक बुलेटिन” पर वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार भाई पुरुषोत्तम पंचोली जी की लीक से हट कर व्हाट्सअप पर टिप्पणी आई ” श्रमदानी है आप”। रक्तदान, अंगदान, नेत्रदान, पुस्तक दान, श्रमदान आदि कई दान आंखों के आगे घूम गए। साहित्य क्षेत्र में तो रचनाकार पढ़ते हैं, लिखते हैं, पुस्तकें छपवाते है, पुरस्कार पाते हैं। साहित्य में श्रमदानी ! पहले तो अजीब सा लगा फिर चेतना आई तो लगा शायद उन्होंने मेरे साहित्य और साहित्यकारों को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए श्रमदानी जैसे सुंदर शब्द का प्रयोग किया।
कई वर्षों से ये मेरे सखा है और मेरे प्रति स्नेह भाव रखते हैं। निस्वार्थ भाव से सकारात्मकता के साथ दूसरों के लिए किए गए किए गए मेरे परिश्रम को ही शायद इन्होंने नजदीक से महसूस किया है।

 आज भी विगत तीन वर्षों से साहित्यिक पत्रकारिता में सक्रिय हूं। इस अल्प समय में साहित्य के उन्नयन , सृजनशीलता को बढ़ावा देने , बच्चों को साहित्य से जोड़ने और बाल साहित्य लेखन को बढ़ावा देने के लिए अनेक कार्यक्रम निष्ठा और परिश्रम से कई संस्थाओं के सहयोग से किए गए। इन सब के पीछे किसी प्रकार का स्वार्थ नहीं, वरन केवल कुछ करने का सेवा भाव ही मन में रहा।
 तीन साल का काल खंड कोई बड़ा नहीं होता। हाड़ोती और राजस्थान के लगभग 175 रचनाकारों और अन्य क्षेत्र की प्रतिभाओं को लेकर तीन पुस्तकें ” जियो तो ऐसे जियो ‘, ” नारी चेतना की साहित्यिक उड़ान ” और ” राजस्थान के साहित्य साधक” सामने आई।
 गत वर्ष बाल दिवस पर बच्चों को साहित्य से जोड़ने के उद्देश्य से हाड़ोती की 18 शिक्षण संस्थाओं में ” बाल साहित्य मेले” के आयोजनों में करीब 5000 बच्चें विभिन्न गतिविधियों से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े।  राष्ट्रीय, राज्य और संभागीय स्तर की कई बाल कविता लेखन प्रतियोगिताएं  की गई और रचनाकारों के लिए राष्ट्रीय कहानी प्रतियोगिता चल रही है। बाल साहित्य विषयों पर साक्षात्कार और कई पुस्तकों की विस्तृत समीक्षाएं भी हुई। इसी क्रम में मासिक ई बुलेटिन भी शुरू किया गया, जिसमें कोटा सहित हाड़ोती की साहित्यिक कार्यक्रमों की रिपोर्ट्स को प्रकाशित किया जाता हैं।
नि:स्वार्थ और सेवा भाव से किए गए नवाचारों के प्रति मेरी भावना, निष्ठा और परिश्रम को ही महसूस कर भाई पंचोली जी ने शायद कहा हो ” श्रमदानी हैं आप !”
श्रद्धेय पंचोली जी के प्रति इस सुंदर और अनूठी उपमा के लिए  तहे दिल से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं, जिन्होंने श्रम शक्ति की कद्र की और हौंसला आफजाई किया।
डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा
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