अंतरिक्ष में हर पल कई हजारों गतिविधियां होती रहती हैं और कई बार हमारे सौरमंडल में होने वाली घटनाएं धरती पर प्रभाव डालती हैं। दुनियाभर में इस वक्त इस बात की चर्चा तेज है कि धरती पर कई सप्ताह के लिए इंटरनेट ठप हो सकता है। इसकी वजह सूरज से आने वाला एक ऐसा तूफान है जो सैटेलाइट्स को निष्क्रिय कर देगा। इस तूफान को सोलर स्ट्रॉम या सोलर मैक्सिमम के नाम से जाना जाता है।
नासा ने चेतावनी जारी की थी कि सूर्य से निकलने वाले अरबों गर्म प्लाज्मा धरती की तरफ बढ़ रहे हैं। ये तूफान पहले भी धरती को प्रभावित कर चुका है लेकिन ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस बार इसका असर सबसे तेज होगा।
सौर तूफान की सटीक भविष्यवाणी करना मुश्किल है, लेकिन वैज्ञानिक सूर्य की गतिविधियों को मॉनिटर करके कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों पहले चेतावनी दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, मई 2024 में एक बड़ा सौर तूफान (G5 स्तर) दर्ज किया गया था, जो कई दशकों में सबसे तीव्र था।
क्या है सोलर स्टॉर्म?
आपको बता दें कि सूरज में हर वक्त कई विस्फोट होते रहते हैं। इन विस्फोटों से तेज गर्मी और रेडिएशन निकलती है। इस दौरान अरबों टन की मात्रा में सोलर प्लाज्मा या सोलर फ्लेयर निकलता है जो अंतरिक्ष में फैल जाता है। ये प्लाज्मा धरती तक भी आता है और यहां ये तूफान का रूप ले लेता है। सोलर प्लाज्मा का तूफान जिसमें हाई लेवल रेडिएशन होते हैं। इस तूफान को सोलर स्टॉर्म (सौर तूफान) कहा जाता है। इसकी रफ्तार 250 किलोमीटर प्रति सेकंड से 3000 किलोमीटर प्रति सेकंड तक हो सकती है। इस तूफान में सूरज से निकलने वाले चार्ज्ड प्रोटोन और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन होते हैं जो धरती के चारों ओर स्थित सैटेलाइट्स को प्रभावित करते हैं। ये रेडिएशन धरती के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं।
ISRO के अनुसार सूरज की साईकल 11 साल की होती है और हर 11 साल में एक बार ये रेडिएशन का तूफान यानी सोलर मैक्सिमम आता है। भारतीय वैज्ञानिकों की चेतावनी के अनुसार के सोलर स्टॉर्म जनवरी 2024 के शुरुआत में ही सकता है।
भारत पर प्रभाव:
औरोरास: भारत जैसे निम्न-अक्षांश वाले क्षेत्रों में औरोरास दिखने की संभावना कम होती है, लेकिन तीव्र सौर तूफान (जैसे मई 2024 का) के दौरान हिमाचल, उत्तराखंड, या लद्दाख जैसे उत्तरी क्षेत्रों में हल्की औरोरास दिख सकती हैं।
तकनीकी प्रभाव: भारत में सैटेलाइट संचार, जीपीएस, रेडियो सिग्नल, और पावर ग्रिड पर असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, मई 2024 के तूफान ने कुछ सैटेलाइट्स और नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित किया था।
अंतरिक्ष मिशन: भारत के आदित्य-एल1 जैसे मिशन सौर गतिविधियों की निगरानी करते हैं, जिससे सौर तूफान की चेतावनी समय पर मिल सकती है।
भविष्य की संभावनाएँ:
सौर चक्र 25 के चरम के दौरान (2025-2026) भारत में और सौर तूफान की घटनाएँ हो सकती हैं। अगले कुछ महीनों में, खासकर अक्टूबर 2025 तक, जब सूर्य की गतिविधियाँ तीव्र रहेंगी, तूफान की संभावना बनी रहेगी।
वैज्ञानिक संगठन जैसे नासा, इसरो, और NOAA सूर्य की गतिविधियों को ट्रैक करते हैं और भारत में संभावित प्रभावों के बारे में चेतावनी दे सकते हैं।
सोलर स्टॉर्म का क्या प्रभाव पड़ेगा?
ये रेडिएशन धरती के ऊपरी सतह को ज्यादा प्रभावित करती है।
इसका असर धरती की आबादी पर तो नहीं पड़ता है लेकिन धरती के कक्ष में चक्कर लगा रहे सैटेलाइट्स पर पड़ता है।
उल्ट्रावॉयलेट रेज की वजह से धरती की ऊपरी सतह का तापमान तेजी से बढ़ता है और गर्मी काफी बढ़ जाती है।
गर्मी बढ़ने से सैटेलाइट्सप्रभावित होते हैं और उनकी उम्र कम हो जाती है।
जो सैटेलाइट धरती की ऑर्बिट से जितनी ज्यादा दूरी पर होती है उस पर इस तूफान का उतना ज्यादा असर पड़ता है।
इसके प्रभाव से टेलीकम्यूनिकेशन पर असर पड़ता है और इस तरह इंटरनेट, टेलीविजन, नेट बैंकिंग यानी कुल मिलाकर वो सारे काम जो सैटेलाइट्स की मदद से मुमकिन हैं हफ्तों के लिए प्रभावित हो सकते हैं।
संचार व्यवस्था पर प्रभाव: रेडियो सिग्नल, सैटेलाइट संचार, और जीपीएस सिस्टम बाधित हो सकते हैं। हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो और विमान संचार प्रभावित हो सकता है।
बिजली ग्रिड पर असर: तीव्र सौर तूफान से पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में गड़बड़ी (Geomagnetic Storm) होती है, जिससे पावर ग्रिड में करंट प्रवाह बढ़ सकता है और ट्रांसफॉर्मर खराब हो सकते हैं।
अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरा: अंतरिक्ष में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों को उच्च ऊर्जा वाले कणों से विकिरण का खतरा बढ़ जाता है।
जलवायु पर प्रभाव: दीर्घकालिक रूप से, सौर गतिविधियाँ पृथ्वी की जलवायु को प्रभावित कर सकती हैं, हालाँकि इसका असर सीमित और जटिल है।उदाहरण और हाल की घटनाएँ:
मई 2024 का सौर तूफान: NOAA और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों ने बताया कि मई 2024 में एक G5 स्तर का सौर तूफान आया, जिसने उत्तरी अमेरिका और यूरोप में शानदार औरोरास उत्पन्न किए, लेकिन कुछ सैटेलाइट और पावर ग्रिड में गड़बड़ी भी हुई।
वैज्ञानिक उपकरण जैसे SOHO (Solar and Heliospheric Observatory) और SDO (Solar Dynamics Observatory) सूर्य की गतिविधियों को ट्रैक करते हैं ताकि सौर तूफान की चेतावनी दी जा सके।
सूर्य का 11-वर्षीय चक्र:
सौर तूफान सूर्य के 11-वर्षीय चक्र (Solar Cycle) के दौरान अधिक बार और तीव्रता के साथ आते हैं, खासकर सौर चरम (Solar Maximum) के समय। वर्तमान में (मई 2025), हम सौर चक्र 25 के चरम के आसपास हैं, जो 2024-2026 के बीच माना जाता है। इस दौरान सौर तूफान की संभावना अधिक रहती है।
मई 2024 में एक बड़ा सौर तूफान (G5 स्तर) दर्ज किया गया, जो कई दशकों में सबसे तीव्र था। इसने भारत सहित कई क्षेत्रों में औरोरास (Auroras) और तकनीकी गड़बड़ियाँ पैदा की थीं।
12 मई 2024 को सूर्य पर हुए बड़े विस्फोट (X-Class सौर लहर) को इसरो के आदित्य-एल1 अंतरिक्ष यान ने कैप्चर किया था, जिसका असर भारत में संचार और नेविगेशन सिस्टम पर पड़ सकता था।
सौर तूफान की घटनाएँ अनिश्चित होती हैं, लेकिन सौर चरम के दौरान (2025-2026) भारत में सौर तूफान की संभावना अधिक है। वैज्ञानिक सूर्य की गतिविधियों को मॉनिटर करते हैं और आमतौर पर कुछ घंटों से लेकर 2-3 दिन पहले चेतावनी जारी कर सकते हैं।
सौर तूफान का समय सूर्य पर होने वाले विस्फोटों (जैसे CME) पर निर्भर करता है, जो कुछ घंटों में पृथ्वी तक पहुँच सकते हैं।

