Homeभारत गौरवऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से धुँआ धुँआ हुआ पाकिस्तान

ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से धुँआ धुँआ हुआ पाकिस्तान

ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ “शून्य सहनशीलता” नीति का एक मजबूत प्रदर्शन था। यह पहलगाम हमले के पीड़ितों को न्याय दिलाने और आतंकवादी संगठनों की रीढ़ तोड़ने में सफल रहा। ऑपरेशन ने भारत की सैन्य क्षमता, खुफिया तंत्र, और निर्णायक नेतृत्व को प्रदर्शित किया। हालांकि, इसने भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव को और बढ़ा दिया, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल उठे।  भारत ने वैश्विक समुदाय को यह संदेश दिया कि वह आतंकवाद के खिलाफ अपनी आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करेगा, लेकिन संयम और जिम्मेदारी के साथ। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम और कूटनीतिक समाधान की अपील की है, और स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा 7 मई 2025 को शुरू किया गया एक सटीक सैन्य अभियान था, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया गया। यह अभियान 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया गया, जिसमें 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक मारे गए थे। इस हमले को लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों से जोड़ा गया था। ऑपरेशन का नाम “सिंदूर” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखा, जो हिंदू परंपरा में सुहाग का प्रतीक है, क्योंकि पहलगाम हमले में कई पुरुषों को निशाना बनाया गया, जिससे कई महिलाएँ विधवा हो गईं।

पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार संगठ नों के ढांचे को नष्ट करना और भविष्य के हमलों को रोकना। हमले को “The Resistance Front (TRF)” ने अंजाम दिया था, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है। पाकिस्तान और PoJK में उन आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाना, जो भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाते और संचालित करते थे। पहलगाम हमले के पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाना। भारतीय सेना ने इसे “न्याय सुनिश्चित” करने का अभियान बताया।

पाकिस्तान को संदेश: भारत ने यह स्पष्ट किया कि वह सीमा-पार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगा और आतंकवादियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करेगा।

ऑपरेशन सिंदूर एक त्रि-सेवा (Tri-Services) अभियान था, जिसमें भारतीय सेना, नौसेना, और वायुसेना ने संयुक्त रूप से भाग लिया। यह 2019 के बालाकोट हवाई हमले के बाद भारत का सबसे व्यापक सीमा-पार अभियान था।

समय और अवधि: ऑपरेशन 7 मई 2025 को सुबह 1:05 से 1:30 बजे के बीच, केवल 25 मिनट की समयावधि में पूरा किया गया।

राफेल लड़ाकू विमान: भारतीय वायुसेना ने राफेल विमानों का उपयोग किया, जो SCALP क्रूज मिसाइलों और HAMMER प्रेसिजन-गाइडेड बमों से लैस थे।
लॉइटरिंग म्यूनिशन्स: लंबी दूरी की सटीक हथियार प्रणालियों का उपयोग किया गया, जो लक्ष्यों को उच्च सटीकता के साथ नष्ट करने में सक्षम थीं।
बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) और स्टैंडऑफ हथियार: इनका उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया गया कि हमले भारतीय क्षेत्र से ही किए जाएँ।

लक्ष्य चयन: लक्ष्यों का चयन विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर किया गया, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े शिविर शामिल थे।
गैर-उत्तेजक दृष्टिकोण: रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले “केंद्रित, मापा हुआ, और गैर-उत्तेजक” थे, और किसी भी पाकिस्तानी सैन्य सुविधा को निशाना नहीं बनाया गया।

ऑपरेशन में कुल नौ आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया, जिनमें से चार पाकिस्तान में और पाँच PoJK में थे। ये स्थान निम्नलिखित थे:

मार्कज सुभान अल्लाह, बहावलपुर (JeM): जैश-ए-मोहम्मद का वैचारिक और परिचालन मुख्यालय। 2019 के पुलवामा हमले के आतंकवादी यहीं प्रशिक्षित हुए थे।
मार्कज तैबा, मुरिदके (LeT): लश्कर-ए-तैयबा का 200 एकड़ में फैला मुख्यालय, जिसे पाकिस्तान का “आतंक का नर्सरी” कहा जाता है। यह प्रशिक्षण, रसद, और योजना का केंद्र था।
मार्कज अब्बास, कोटली (JeM): आत्मघाती हमलावरों के प्रशिक्षण और हथियार वितरण का केंद्र।
सय्यदना बिलाल कैंप, मुजफ्फराबाद (JeM): आतंकवादी प्रशिक्षण के लिए उपयोग किया जाता था।
मार्कज अहले हदीस, बरनाला (LeT): लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा एक रैडिकलाइजेशन केंद्र।
श्वावई नाला कैंप, मुजफ्फराबाद (LeT): आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करता था।
सरजाल, तहरा कलां (JeM): जैश-ए-मोहम्मद का एक और प्रशिक्षण शिविर।
गुलपुर कैंप, कोटली (LeT): राजौरी-पुंछ क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों का प्रशिक्षण केंद्र। 2023 और 2024 के हमलों के आतंकवादी यहीं प्रशिक्षित हुए थे।
महमूना कैंप (अन्य): PoJK में एक अन्य आतंकवादी सुविधा।

ये शिविर आतंकवादी प्रशिक्षण, हथियार वितरण, और रैडिकलाइजेशन के लिए उपयोग किए जाते थे। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इन स्थानों की सटीक जानकारी प्रदान की थी।

ऑपरेशन सिंदूर के परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण प्रभाव देखे गए:

भारतीय सूत्रों के अनुसार, 80 से 90 आतंकवादी मारे गए, जिनमें बहावलपुर और मुरिदके में 25-30 आतंकवादी शामिल थे।
जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर की बड़ी बहन, उनके पति, भतीजे, और भतीजे की पत्नी सहित उनके परिवार के 10 सदस्य और चार करीबी सहयोगी मारे गए।
60 से अधिक आतंकवादी घायल हुए, जिससे इन संगठनों की परिचालन क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचा।
आतंकवादी ढांचे का विनाश: सभी नौ लक्षित शिविर पूरी तरह नष्ट हो गए। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में नारंगी आग के गोले और घने धुएँ के बादल दिखाई दिए, जो हमलों की तीव्रता को दर्शाते हैं।

पाकिस्तान ने दावा किया कि भारतीय हमलों में 26 नागरिक मारे गए और 46 घायल हुए, जिसमें मुजफ्फराबाद में एक मस्जिद पर हमला शामिल था।
पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भारी गोलाबारी शुरू की, जिसमें तीन भारतीय नागरिक मारे गए।
पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने पाँच भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराया, लेकिन भारत ने इस दावे का खंडन किया और इसे सत्यापित नहीं किया गया।

भारत ने कहा कि कोई भी नागरिक, आर्थिक, या सैन्य लक्ष्य निशाना नहीं बनाया गया, और केवल आतंकवादी शिविरों को नष्ट किया गया।
भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई में कुपवाड़ा और राजौरी-पुंछ क्षेत्रों में पाकिस्तानी सेना के कई चौकियों को नष्ट किया।

सुरक्षा उपाय:
जम्मू, सांबा, कठुआ, राजौरी, और पुंछ के सीमावर्ती जिलों में सभी शैक्षणिक संस्थान बंद कर दिए गए।
श्रीनगर हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया, और उत्तरी भारत में वाणिज्यिक उड़ानें निलंबित कर दी गईं।
244 जिलों में नागरिक सुरक्षा के लिए मॉक ड्रिल आयोजित किए गए।
उत्तर प्रदेश में रेड अलर्ट जारी किया गया, और LoC के पास के गाँवों से नागरिकों को बंकरों में स्थानांतरित किया गया।

ऑपरेशन सिंदूर ने वैश्विक समुदाय का ध्यान आकर्षित किया, और विभिन्न देशों और संगठनों ने प्रतिक्रिया दी:

संयुक्त राज्य अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि यह जल्दी खत्म हो जाएगा।” भारतीय एनएसए अजीत डोवल ने अमेरिकी एनएसए और विदेश मंत्री मार्को रुबियो को ऑपरेशन की जानकारी दी। रुबियो ने दोनों देशों से संयम और संवाद की अपील की।

संयुक्त राष्ट्र: महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से “अधिकतम सैन्य संयम” बरतने का आह्वान किया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बंद कमरे में चर्चा की, लेकिन कोई बयान जारी नहीं किया।
फ्रांस: विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने भारत के आतंकवाद से आत्मरक्षा के अधिकार को स्वीकार किया, लेकिन संयम की अपील की।

चीन: भारत के सैन्य अभियान को “खेदजनक” बताया और दोनों देशों से संयम बरतने को कहा।
कतर: दोनों देशों से कूटनीतिक समाधान की अपील की।
इज़रायल: भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने हमलों को “युद्ध की कार्रवाई” बताया और जवाबी कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखा।
रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर भारत और हमले बंद करे तो पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई से बचेगा।
पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक क्षेत्रों, जैसे मस्जिदों, को निशाना बनाया, जिसे भारत ने खारिज किया।

ऑपरेशन की पृष्ठभूमि

पहलगाम हमला: 22 अप्रैल 2025 को, पहलगाम के बैसारन में आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। हमलावरों ने पुरुषों को उनके परिवारों के सामने गोली मारी, जिससे यह हमला विशेष रूप से क्रूर माना गया।
पाकिस्तान का लिंक: भारतीय जांच में पाया गया कि हमला पाकिस्तान-आधारित आतंकवादियों ने किया था, और TRF ने इसकी जिम्मेदारी ली। भारत ने कहा कि पाकिस्तान ने हमले के बाद आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय इनकार किया और “झूठे झंडे” के आरोप लगाए।
प्रधानमंत्री का वचन: नरेंद्र मोदी ने हमले के बाद कहा था कि जिम्मेदार लोगों को “पृथ्वी के छोर तक” दंडित किया जाएगा। उन्होंने सशस्त्र बलों को पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता दी थी।

सटीकता: हमले अत्यधिक सटीक थे, और नागरिक क्षेत्रों को नुकसान से बचाने के लिए सावधानी बरती गई।
खुफिया जानकारी: लक्ष्यों का चयन खुफिया एजेंसियों द्वारा प्रदान की गई विश्वसनीय जानकारी पर आधारित था।
संयम: भारत ने सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाने से परहेज किया, जिसे गैर-उत्तेजक दृष्टिकोण के रूप में देखा गया।
प्रतीकात्मक नाम: “सिंदूर” नाम पहलगाम हमले में विधवा हुई महिलाओं के दर्द को दर्शाता है, जिसने ऑपरेशन को भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व दिया।

पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई: पाकिस्तान ने LoC पर भारी गोलाबारी शुरू की, जिससे तनाव बढ़ गया।
नागरिक हताहतों का दावा: पाकिस्तान ने दावा किया कि भारत ने नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया, जिससे अंतरराष्ट्रीय दबाव की आशंका थी।
युद्ध का जोखिम: दोनों देशों के परमाणु हथियारों से लैस होने के कारण, विश्लेषकों ने व्यापक युद्ध की संभावना पर चिंता जताई।
सूचना युद्ध: पाकिस्तान से गलत सूचनाओं की बाढ़ आई, जिसमें भारतीय विमानों को मार गिराने का दावा शामिल था।

spot_img
RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार