चंदन यात्रा को देखने के लिए देश-विदेश के लाखों श्रद्धालु प्रतिवर्ष जगन्नाथ भक्त पुरी धाम आते हैं। सबसे खुशी की बात इस संबंध में यह है कि पूरे एक महीने तक वे भक्त पुरी धाम में ही वास करते हैं,महोदधि स्नान करते हैं,पुरी धर्मकानन का परिभ्रमण करते हैं। भगवान जगन्नाथ के श्रीमंदिर जाने से पूर्व मंदिर की परिक्रमा करते हैं तथा सायंकाल चंदन तालाब के समीप 21 दिनों तक बैठकर चंदनयात्रा का अलौकिक आनंद लेते हैं।चंदन तालाब को पूरी तरह से स्वच्छ तथा शीतल बना दिया जाता है। उसके आसपास की जगह को साफ-सूथरी कर दी जाती है। चंदन तालाब के चारों तरफ बिजलीबत्ती की रोशनी से पूरी तरह से आलोकित कर दिया जाता है।
गौरतलब है कि जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ भोजन प्रिय देव हैं जो प्रतिदिन 56 प्रकार के भोग ग्रहण करते हैं। वे वस्त्र प्रिय कलियुग के एकमात्र पूर्ण दारुब्रह्म देव हैं जो प्रतिदिन अपनी रुचि के अनुसार वस्त्र धारण करते हैं।ठीक उसी प्रकार वे जल प्रिय देव भी हैं और उसी का यह प्रत्यक्ष प्रमाण है उनकी विजय प्रतिमा मदनमोहन आदि देवों की 21दिवसीय बाहरी चंदनयात्रा। जैसाकि हम सभी जानते हैं कि इस धरती पर तीन ही वास्तविक रत्न हैं-जल,अन्न और मधुर वाणी जिसको भगवान जगन्नाथ एक साधारण मानव के रुप में साकार करते हैं। वे साधारण मानव की तरह ही सुख-दुख का अनुभव करते हैं।वे वैशाख-जेठ मास की भीषण गर्मी से परेशान होकर चंदन तालाब में कुल 21 दिनों तक शरीर और मन की शीतलता प्राप्ति हेतु चंदन का लेप लगाकर मलमलकर स्नान करते हैं।नौका विहार करते हैं और कुछ देर तालाब के बीचोंबीच निर्मित अपने चंदन घर में विश्राम करते हैं। वे प्रतिदिन मध्यरात्रि बेला में अपने श्रीमंदिर लौट भी आते हैं।
अक्षय तृतीया के दिन से अर्थात् 30 अप्रैल से श्रीमंदिर पुरी की समस्त रीति-नीति के तहत जातभोग संपन्न कर अपराह्न बेला में भगवान जगन्नाथ की विजय प्रतिमा मदनमोहन,रामकृष्ण,बलराम,पंच पाण्डव, लोकनाथ, मार्कण्डेय, नीलकण्ठ,कपालमोचन,जम्बेश्वर लक्ष्मी, सरस्वती आदि को शोभायात्रा के मध्य पुरी नगर परिक्रमा कराकर चंदन तालाब लाया जाता है। भगवान जगन्नाथ की विजय प्रतिमा मदनमोहन, रामकृष्ण, लक्ष्मी,सरस्वती आदि को स्वतंत्र पालकी में आरुढ कराकर श्रीजगन्नाथ मंदिर की 22 सीढियों पर लाया 21 दिनों तक (अक्षय तृतीया के दिन से आरंभ )जाता है।


