दिल्ली की नई चुनी हुई सरकार के सामने अपने चुनावी वादे पूरे करने के साथ साथ राष्ट्रीय राजधानी के प्रशासन की मुश्किल चुनौती है
फ़रवरी 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा के चुनावों के ज़रिए राजधानी में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है. दिल्ली के मतदाताओं ने मौजूदा सरकार को जो जनादेश दिया है, वो बिल्कुल स्पष्ट और भारी भरकम है. दिल्ली की सरकार के लिए अच्छी बात ये है कि केंद्र में उसकी दोस्ताना हुकूमत है और इस तरह जैसा कि कहा जाता है, दिल्ली में ‘डबल इंजन’ की सरकार है. यही नहीं, दिल्ली में चुनाव के कुछ दिनों बाद, दिल्ली नगर निगम के तीन पार्षद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए, जिससे एमसीडी में भी बीजेपी को बहुमत हासिल हो गया है. इसका मोटे तौर पर मतलब यही है कि राजनीतिक रूप से दिल्ली में अब ‘ट्रिपल इंजन की सरकार’ है, क्योंकि केंद्र, राज्य और नगर निकाय के स्तर पर एक ही पार्टी सत्ता में है और अब दिल्ली की जनता से किए गए वादे पूरे करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की राह में कोई बाधा नहीं है.
दिल्ली राज्य तीन तरफ़ से हरियाणा और पूरब में उत्तर प्रदेश से घिरा है. इसका भौगोलिक क्षेत्र 1483 वर्ग किलोमीटर है. इसमें से 369.35 वर्ग किलोमीटर इलाक़े को ग्रामीण (24.90 फ़ीसद) क्षेत्र घोषित किया गया है. वहीं, 1113.65 वर्ग किलोमीटर (75.1 प्रतिशत) क्षेत्र शहरी कहा जाता है. 1961 में दिल्ली में जहां 300 गांव थे, वहीं 2001 में इनकी तादाद घटकर 165 और 2011 में और भी कम होकर सिर्फ़ 112 रह गई. ये बात भी महत्वपूर्ण है कि दिल्ली की आबादी बड़ी तेज़ी से बढ़ रही है. 1951 में दिल्ली की आबादी 17.4 लाख थी, जो 2011 में बढ़कर 1.678 करोड़ पहुंच चुकी थी. वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू के मुताबिक़ 2024 में दिल्ली की आबादी 3.380 करोड़ पहुंच चुकी थी, जो सबसे ज़्यादा आबादी वाले दुनिया के शहरों में केवल टोक्यो से कम थी. 2030 तक दिल्ली की जनसंख्या 3.893 करोड़ पहुंचने का अनुमान लगाया गया है, जिससे वो दुनिया का सबसे ज़्यादा आबादी वाला शहर बन जाएगी. ऐसे में दिल्ली सरकार के सामने राष्ट्रीय राजधानी के प्रबंधन की भारी चुनौती है. क्योंकि जब मौजूदा सरकार का कार्यकाल ख़त्म होगा, तब तक दिल्ली दुनिया का सबसे बड़ा शहर बन चुकी होगी.
दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने घोषणापत्र का नाम ‘विकसित दिल्ली संकल्प पत्र 2025’ रखा था, जिसमें दिल्ली की आबादी के अलग अलग तबक़ों के लिए मुफ़्त की योजनाओं का ऐलान किया गया था.
विचित्र बात ये है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपने घोषणापत्र का नाम ‘विकसित दिल्ली संकल्प पत्र 2025’ रखा था, जिसमें दिल्ली की आबादी के अलग अलग तबक़ों के लिए मुफ़्त की योजनाओं का ऐलान किया गया था. हालांकि, बीजेपी के संकल्प पत्र में उन प्रशासनिक लक्ष्यों का अभाव दिखा था, जो शहर की समस्याओं का समाधान करने वाले हों. बीजेपी के घोषणापत्र में जिन 16 वादों का ज़िक्र किया गया है, उनमें पूर्ववर्ती सरकार द्वारा चलाई जा रही 16 योजनाओं को जारी रखने, ग़रीब परिवारों की महिलाओं को 2500 रुपए प्रति महीने देने, हर गर्भवती महिला को 21 हज़ार रुपए की सहायता और छह पोषण किट देने, ग़रीब परिवारों की महिलाओं को 500 रुपए में रसोई गैस का सिलेंडर देने के साथ साथ होली और दिवाली पर मुफ़्त में गैस सिलेंडर देने के वादे किए गए हैं. यही नहीं, आयुष्मान भारत योजना के तहत ग़रीब परिवारों को पांच लाख रुपए की मेडिकल सहायता दी जानी है.
‘अटल कैंटीन’ में पांच रुपए में खाना मुहैया कराया जाएगा, दिल्ली सरकार के संस्थानों में ग़रीबों के बच्चों को केजी से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की सुविधा मुफ़्त में दी जाएगी. वहीं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों को एक बार में 15 हज़ार रुपए की सहायता देने के वादे भी बीजेपी ने किए हैं. इसी तरह, तकनीकी संस्थानों में तकनीकी और पेशेवर पढ़ाई कर रहे दलित वर्ग के छात्रों को एक हज़ार रुपए महीने स्टाइपेंड दिया जाना है. वहीं, ऑटो रिक्शा चलाने वालों, टैक्सी ड्राइवरों और घरेलू काम-काज करने वालों के लिए कल्याणकारी बोर्ड का गठन करने का वादा भी किया गाय है.
जहां तक बीजेपी के संकल्प पत्र की बात है, तो ये मुफ़्त की राजनीति वाली संस्कृति का ही एक व्यापक विस्तार था. हालांकि, ये भी सही है कि घोषणापत्र में नागरिक सेवाओं, सामाजिक और भौतिक ढांचे का भी ज़िक्र किया गया है. घोषणापत्र में सस्ते इलाज और सबको साफ़ पानी देने का ज़िक्र है. दिल्ली को प्रदूषण मुक्त बनाने का वादा है. सुरक्षा और हिफ़ाज़त के साथ साथ नगर निगम की बुनियादी सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है. घोषणापत्र में दिल्ली के भयंकर प्रदूषण की समस्या को स्वीकार किया गया है और ये भी माना गया है कि दिल्ली में यमुना नदी एक बड़े नाले में तब्दील हो चुकी है.
दिल्ली की नई सरकार के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती होगी वो दिल्ली में वायु प्रदूषण और यमुना नदी को बहाल करने की शक्ल में होगी. दिल्ली ने लगातार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर होने का दर्जा हासिल करने की अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज कराई है
हालांकि, दिल्ली की नई सरकार के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती होगी वो दिल्ली में वायु प्रदूषण और यमुना नदी को बहाल करने की शक्ल में होगी. दिल्ली ने लगातार दुनिया के सबसे प्रदूषित शहर होने का दर्जा हासिल करने की अभूतपूर्व उपलब्धि दर्ज कराई है और सांस और दिल की बीमारियों की वजह से दिल्ली की हवा मौत का एक बड़ा कारण बन चुकी है. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान कुछ उपलब्धियां तो हासिल की गई हैं. लेकिन, 2024 में किए गए एक अध्ययन में एक बार फिर से दिल्ली में वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के ख़तरनाक होने का हवाला देते हुए चेतावनी दी गई थी कि शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से जान का जोखिम बढ़ता जा रहा है. इस स्टडी में इस बात की वकालत की गई थी कि दिल्ली प्रशासन, सर्दियों में जब हवा का प्रदूषण सबसे ख़राब स्तर पर होता है, तब प्रतिक्रिया स्वरूप आपातकालीन उपाय करने के बजाय उसके आगे की सोचे.
यमुना नदी की सफ़ाई का काम तो और भी चुनौती भरा होने वाला है. पिछले कई दशकों से यमुना में सीवेज जाने से यमुना एक नाले में तब्दील हो चुकी है और लगभग मृतप्राय हो गई है. हालांकि, चुनाव के दौरान यमुना की सफ़ाई का वादा, दिल्ली के नागरिकों से किए गए बीजेपी के प्रमुख वादों में से एक था. ख़बरों के मुताबिक़ भारत सरकार ने ‘यमुना मास्टर प्लान’ के तहत यमुना की सफ़ाई के तीन साल के कार्यक्रम की शुरुआत कर दी है. इस योजना के तहत चार चरणों की रणनीति लागू की जानी है. जिसके पहले चरण में नदी से कचरा और तलछट साफ़ करना, प्रमुख नालों की सफ़ाई, सीवेज ट्रीटमेंट के मौजूदा प्लांटों (STPs) का पूरी क्षमता से उपयोग और जो सीवज अभी शोधित नहीं होता, उसके ट्रीटमेंट के लिए नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STPs) का निर्माण करना है.
इन वादों को पूरा करने के लिए लगातार वृहद प्रयास करने होंगे और सही समय पर पर्याप्त मात्रा में फंड उपलब्ध कराने होंगे. निगरानी के लिए प्रशासन की अलग अलग शाखाओं को आपस में नज़दीकी तालमेल से काम करना होगा और शीर्ष स्तर पर हर परियोजना की नियमित रूप से समीक्षा की ज़रूरत होगी. ट्रिपल इंजन की सरकार के सत्ता में होने की वजह से बहानेबाज़ी और छुपने की कोई गुंजाइश नहीं होगी.

