बाड़मेर में एक कलेक्टर ऐसे भी रहे है जिन्होंने पाकिस्तान के छाछरो तक कलेक्ट्री की है और करीब ग्यारह महीने तक। अब उनकी उम्र 79 वर्ष है और सेवानिवृत्ति के बाद गर्व से बताते है कि हम तो पाकिस्तान तक कलेक्ट्री कर आए है, युद्ध लोगों ने सुना है..हमने देखा है। 1971 के बाड़मेर में कलक्टर रहे आईसी श्रीवास्तव विजय दिवस पर प अनुभव साझा करते हुए में बोले- 8000 वगज़् किमी तक पहुंच गया था बाड़मेर।
युद्ध में हम जमीन जीते थे लेकिन जिम्मेदारी कम नहीं थी। गडरारोड पर अतिरिक्त जिला कलक्टर गणेश शंकर व्यास और डिप्टी पुलिस छुगसिंह को नियुक्त किया गया था, जो पाकिस्तान तक का प्रभार संभाले हुए थे। गडरारोड़ से लेकर (परबतअली)न्यूछोर तक दवा और राशन पहुंचाया जाता था। शरणार्थियों की मदद करते थे। जो लोग भारत आ गए थे, उनको मकान का सामान लाने की इजाजत देते थे।
शिमला समझौता होने के बाद यह जमीन वापिस पाकिस्तान को चली गई। अक्टूबर 1972 में कलक्टर बाड़मेर पुन: हो गया। करीब ग्यारह महीने तक यह बाड़मेर की पाकिस्तान तक की कलेक्ट्री थी, 79 की उम्र में भी याद करता हूं ,तो रोमांचित हो जाता है। उस समय हम कई बार पाकिस्तान गए। पहली बार मुख्यमंत्री बरकतुल्लाह खां के साथ पहुंचकर न्यूछोर के परबतअली तक की यात्रा की थी।
2003 में सेवानिवृत्त हो गया। 79 की उम्र में अभी जयपुर के जवाहरनगर में हूं। मैं और पत्नी अचज़्ना श्रीवास्तव आज भी उन पलों को यद करते है तो आसमां की तरह देखकर लगता है…उत्तरलाई में विमानों की जंग अभी हमारे सामने है। समय बीत गया, लेकिन जीवन में यह सदैव याद रहेगा।

