कोटा / बच्चे अब तेजी से रुचि पूर्वक कविता, कहानी, दोहे, हाइकु लिखने लगे हैं। यह असर हुआ है हाड़ोती अंचल में चलाए गए बाल साहित्य मेलों की श्रृंखला का। यह बात रविवार को विनोबा भावे नगर में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में झालावाड़ से पहुंची साहित्यकार रेखा सक्सेना ने बताई। कहने लगी जब से आपने बाल साहित्य मेलों का आयोजन किया और बच्चों को पुरस्कृत किया गया तब से उनमें लेखन के प्रति ज्यादा उत्साह भर गया है। वे रंगीतिका संस्था द्वारा आयोजित की जा रही प्रतियोगिता के लिए झांसी की रानी और महाराणा प्रताप पर कविता लिखने में लगे हैं। उन्होंने मुझे झालावाड़ स्थित अपने स्कूल पल्लवन में आ कर बच्चों से मिलने का आग्रह किया। मैंने भी खुशी जाहिर की कि हमारा प्रयास रंग लाने लगा है।
उन्होंने मुझे अपना काव्य संग्रह ” अवध के वीर ” भेंट किया और मैंने उन्हें ” राजस्थान के साहित्य साधाक” पुस्तक भेंट की। साथ ही राजस्थान दिवस की प्रतियोगिता में दिए गए सहयोग के लिए प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया।
इन्हीं की तरह आगे आ कर रंगीतिका और आर्यन लेखिका मंच ने भी कुछ नए साहित्यिक कार्यक्रम करने की योजना बनाई है। लेखक राम मोहन कौशिक के साथ कुछ अन्य साहित्यकारों ने मिल कर बच्चों के लिए कहानी लेखन प्रतियोगिता का आयोजन कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों में अन्य साहित्यकार और साहित्यिक संस्थाएं पहल कर आगे आए तो बच्चों को साहित्य से जोड़ने की दिशा में कुछ ठोस काम हो सकेगा।

