Homeव्यंग्यभारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली चीत है 'कसम'

भारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली चीत है ‘कसम’

भारत में कसम एक ऐसा “खाद्य पदार्थ” है, जो हर दिल और जुबान पर चढ़ा हुआ है। राम धई, राम कसम, अल्ला कसम, रब दी सौं, तेरी कसम, मां कसम, पापा कसम—ये सभी कसमें भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। ये न केवल सुपाच्य हैं, बल्कि इनके सेवन से मानव प्रजाति को कई लाभ भी मिलते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि चिकित्सा जगत में भी इस “खाद्य पदार्थ” पर कोई पाबंदी नहीं है। न डॉक्टर, न वैद्य, न हकीम, और न ही फुटपाथ पर जवानी बचाने की दवा बेचने वालों ने कभी इसके सेवन पर आपत्ति जताई।

कसम का चिकित्सकीय महत्व भी कम नहीं है। चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से कसम पूरी तरह सुरक्षित है। यह न तो कब्ज पैदा करती है, न ही अत्यधिक सेवन से कोई बीमारी। इतना ही नहीं, चिकित्सा विशेषज्ञ इस पर शोध भी कर रहे हैं। यह एक ऐसा खाद्य पदार्थ है, जो आयुर्वेदिक दवाओं की तरह बिना किसी साइड इफेक्ट वाला  होता है। इतना ही नहीं इसे हर उम्र के लोग खा सकते हैं। बच्चे को घुट्टी में पिलाइए या बुढ़ापे में खाइए कोई साइड इफेक्ट्स नहीं होगा।
कसम का महत्व केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है। कानूनी दृष्टिकोण से, फिल्मी अदालतों में गवाहों को कसम खिलाई जाती है। फिल्मों में तो भरपेट खाई खिलाई जाती हैं कसमें ।
बॉलीवुड में तो फिल्में और गीत भरे पड़े हैं इन कदमों से फिल्म और संगीत उद्योग भी कसम के दीवाने हैं। *तीसरी कसम*, *कसम सौगंध*, *सौगंध गंगा मैया के* जैसी फिल्में और असंख्य गीतों में कसम शब्द का खूब इस्तेमाल हुआ है। गीतकारों ने इसे भावनाओं को व्यक्त करने का एक अनोखा जरिया बनाया है।
नौकरीपेशा  सेवा पुस्तिका में हस्ताक्षर कर के कसम खाते हैं , काम करने की या न करने की ये तो वे ही जाने पर मक्कारी की कसम खाए  नज़र आते हैं।
परसाई जी ने बताया कि  पेंशन बाबू ने फाइल दबा दी पर अड़ियल भोलाराम ने फाइल चलवा ही ली थी।
संसद, विधानसभा, मंत्रिपद और अन्य सभी महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति से पहले कसम खाना अनिवार्य है।  फिर क्या क्या कमाल करते हैं ये अख्खा इंडिया जानता है।
दुनिया भर मे खाद्यान्न की कमी देते हुए वैज्ञानिक कसम के उत्पादन पर विशेष ध्यान देने लगे हैं। वह दिन दूर नहीं जब
कल्पना कीजिए,  वैज्ञानिक उन्नत किस्म के कसम के बीज विकसित कर लेंगे और खेतों में कसम उगने लगेगी ।
सरकार को  “कसम-कल्याण विभाग” की स्थापना करना ही होगा।
इस विभाग में भी कसम-मंत्रियों की नियुक्ति होगी, और संसद में इसके लिए विधेयक लाया जाएगा। वैसे विधेयक का समर्थन और विरोध भी होगा।
लोग धरना प्रदर्शन देंगे और नारा होगा –
“कसम हमारा जन्मसिद्ध अधिकार  !
क्यों कूदी इसमें सरकार ।।
इस विधेयक के आने से बहुत लोगों को धंधा मिलेगा। नेता गिरी का। गली कूचे में प्रदर्शन होंगे। सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखट बजने लगेंगे ।
खेत होगा तो देखा जाएगा फिलहाल कसमों की किस्मों को जान लीजिए  …
सच्ची कसमें: ये अब दुर्लभ हो चुकी हैं और कहते हैं कि ये “लापतागंज” चली गईं। लापतागंज कहां है, यह किसी को नहीं पता,
2. *झूठी कसमें*: ये हर जगह उपलब्ध हैं। इन्हें खाकर लोग जनता को पटाते हैं और आम से खास बन जाते हैं।
राजकपूर की *श्री 420* में मंजन बेचने की शैली इसका उदाहरण है।
आजकल व्यापारिक कंपनियां, नेता, अफसर और मीडिया भी इसी कसम का सहारा लेते हैं।
3. *सेक्यूलर कसमें*: इस पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं, वरना लोग कहेंगे, “बोलता है!” फिर भी बोल देता हूं , यह विशुद्ध राजनीतिक कसम है ।
4. *दाम्पत्य कसमें*: पति-पत्नी के बीच खाई जाने वाली कसमें, जो शादी की सात कसमों से अलग होती हैं। पति को  ज्यादा खानी और निभानी पड़ती हैं। पत्नी के लिए कोई बंधन नहीं वह चाहे तो नीली टंकी सीमेंट के जरिए कसम तोड़ सकती है, पाकिस्तान से भारत आकर लप्पू से सचिन की बीवी बन सकती है। या फिर संभावित दामाद के साथ भी नए सिरे से कसम खा सकती है।
5. *इन लव कसमें*: ये प्रेमी-प्रेमिकाओं के बीच खाई जाती हैं। आजकल तो बच्चे भी ऐसी कसमें खाने लगे हैं। इसके अलावा लिवइन कसमें  भी होती हैं। और तो और बॉयफ्रेंड को लूटने की कसम खाकर डंकी की चोट पर धांसू खर्च में किसी भी अमित की औलाद को डाल सकती है ऐसी कसमें।
6. *सियासी कसमें* इनके बारे में बोलने का मन नहीं करता, क्योंकि सियासी लोग सरक गए तो मुश्किल हो सकती है।
उपरोक्त 6 के प्रकार की कसमें हमारी परंपराओं का हिस्सा हैं।
सोचो सरकार का इसमें क्या लेना देना फिर भी सरकार अगर कसम मंत्रालय का गठन करती है तो तब की तब से देखी जाएगी

Disclaimer: This article is for entertainment purposes only. If it has any connection to anyone, it would be a mere coincidence.
गिरीश बिल्लौरे मुकुल
girishbillore@gmail.comगिरीश बिल्लोरे

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