गंगा, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण नदी माना जाता है, न केवल भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर का अहम हिस्सा है, बल्कि यह समूचे भारतीय समाज के जीवन का अभिन्न अंग भी है।
महाकुंभ एक ऐसा अवसर है जब लाखों तीर्थयात्री गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रयाग आते है. यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की विविधता और एकता का भी प्रतीक है। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाला महाकुंभ दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मेला है, जिसमें इस वर्ष लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है।
इस विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं के आवागमन को सुचारु और सुविधाजनक रखने के लिए भारतीय रेल ने पिछले तीन साल से अथक प्रयास किया है. पांच हज़ार करोड़ रुपयों की लागत से कुम्भ क्षेत्र की परियोजनाओं को संपन्न किया गया है जिसमे गंगा पर एक नए ब्रिज का निर्माण भी सम्मिलित है.
साथ ही, भारतीय रेल ने यात्रा को सहज और सुरक्षित बनाने के लिए कई नए कदम उठाये है –
भारतीय रेल की डिजिटल पहल
रेल यात्रा को बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेल ने कुंभ रेल सेवा वेबसाइट और एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। ये प्लेटफॉर्म तीर्थयात्रियों को ट्रेन समय सारिणी, टिकट की उपलब्धता, स्टेशन सुविधाएँ और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करता है। इससे श्रद्धालु अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं, टिकट बुक कर सकते हैं, और यात्रा से जुड़ी सभी जानकारी एक ही स्थान से प्राप्त कर सकते हैं।
देश की भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए स्टशनों पर 12 प्रमुख भारतीय भाषाओं में घोषणाएं की जा रही हैं। भारतीय रेल की सुविधा पुस्तिका 22 भाषाओं में उपलब्ध है और टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर भी हिंदी, अंग्रेजी और विभिन्न भारतीय भाषाओं में जानकारी प्रदान कर रहा है. भारतीय रेल का ये प्रयास हर तीर्थयात्री के लिए सूचना प्राप्त करना आसान बना रहा है, चाहे वो किसी भी भारतीय प्रान्त का हो, या विदेशी हो.
भारतीय रेल ने यात्रा को और भी आसान बनाने के लिए लगभग 2,000 स्टेशनों पर एकीकृत डिजिटल डिस्प्ले नेटवर्क स्थापित किया है, जिससे यात्रियों को वास्तविक समय में अपडेट मिलते हैं। इन डिस्प्ले के माध्यम से स्टेशन की सभी जरूरी जानकारी आसानी से उपलब्ध होती है। साथ ही, प्रमुख टर्मिनलों पर *टच-स्क्रीन कियोस्क* लगाए गए हैं, जो टिकट काउंटर और सूचना केंद्र दोनों के रूप में कार्य करते हैं। इससे न केवल लंबी कतारों की समस्या हल होती है, बल्कि यात्रियों को कुशल तरीके से स्टेशन पर नेविगेट करने में मदद मिलती है।
इसके अतिरिक्त, भारतीय रेल ने *बारकोड-आधारित अनारक्षित टिकट प्रणाली (UTS)* को लागू किया है, जिससे टिकट खरीदने की प्रक्रिया और अधिक सरल और तेज हो गई है। स्टेशन पर रेल कर्मी क्यूआर कोड से सुसज्जित हरे जैकेट पहने मौजूद हैं, जिसको स्कैन कर के यात्री मोबाइल UTS ऐप डाउनलोड कर सकते हैं.
वॉर रूम: महाकुंभ की निगरानी और सुरक्षा
महाकुंभ 2025 में इतने बड़े पैमाने पर जनसमूह के आगमन को देखते हुए भारतीय रेल और संबंधित प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। प्रयागराज में स्थित *महाकुंभ वॉर रूम* इस आयोजन का मुख्य नियंत्रण केंद्र बन चुका है, जहां 24×7 निगरानी की जा रही है। वॉर रूम में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए ट्रेनों के संचालन, सार्वजनिक यातायात और तीर्थयात्रियों के आवागमन पर कड़ी`निगरानी रखी जाती है।
सुरक्षा के लिहाज से एक हजार से अधिक *निगरानी कैमरे*, जिनमें कुछ में चेहरे की पहचान प्रणाली भी शामिल है, तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, ड्रोन का भी उपयोग किया जा रहा है. रेल सुरक्षा बल (RPF) और राज्य पुलिस के 23,000 से अधिक कर्मी इस आयोजन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैनात किए गए हैं।
नवीनता और सांस्कृतिक समागम
महाकुंभ 2025 न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक होगा, बल्कि यह भारत की तकनीकी और डिजिटल प्रगति को भी उजागर करेगा। यह आयोजन दर्शाता है कि कैसे पुरानी परंपराओं के साथ नवीनतम तकनीक का समागम एक बेहतर और सुरक्षित अनुभव पैदा कर सकता है। भारतीय रेल की ये पहलें न केवल तीर्थयात्रियों के लिए यात्रा को सरल बनाती हैं, बल्कि वे भारतीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और नवाचार के बीच संतुलन स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।
(लेखिका रेल्वे बोर्ड की पूर्व अध्यक्ष एवँ मुख्य कार्यकारी अधिकारी CEO हैं )